प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा में भावुक दृश्य देखने को मिले। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह ने अर्थी को कंधा दिया, जबकि भैंसाकुंड में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो गईं।
समाजवादी पार्टी संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा गुरुवार को बेहद भावुक माहौल में निकाली गई। राजधानी लखनऊ में हर तरफ शोक और संवेदना का माहौल दिखाई दिया।
प्रतीक यादव की अर्थी को परिवार के सदस्यों, करीबी रिश्तेदारों और राजनीतिक हस्तियों ने कंधा दिया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और भाजपा नेता नीरज सिंह भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और उन्होंने प्रतीक यादव की अर्थी को कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। हर आंख नम थी और माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया।
प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा उनके आवास से शुरू होकर लखनऊ के भैंसा कुंड स्थित बैकुंठ धाम श्मशान घाट तक पहुंची। पूरे रास्ते समर्थकों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ उमड़ती रही। लोग सड़क किनारे खड़े होकर उन्हें अंतिम विदाई देते दिखाई दिए। कुछ ही देर में पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया जाएगा।
प्रतीक यादव के निधन की खबर के बाद से ही उनके आवास पर लोगों का तांता लगा हुआ था। अंतिम यात्रा शुरू होते ही बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता, भाजपा नेता, कारोबारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हो गए।
पति प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान भाजपा नेता अपर्णा यादव बेहद भावुक नजर आईं। वह लगातार परिवार के सदस्यों के साथ मौजूद रहीं और कई बार भावुक होकर रो पड़ीं। परिजनों और करीबी लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की। इस कठिन समय में पूरा परिवार गहरे सदमे में दिखाई दिया।
प्रति संवेदना व्यक्त की।
अंतिम यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह द्वारा प्रतीक यादव की अर्थी को कंधा देने की रही। इसे राजनीतिक शिष्टाचार और मानवीय संवेदना का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस तस्वीर को काफी भावुक और सकारात्मक संदेश देने वाला बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि दुख की घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर साथ खड़ा होना भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
38 वर्षीय प्रतीक यादव का अचानक निधन पूरे प्रदेश के लिए चौंकाने वाला रहा। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह वह अपने घर में अचेत अवस्था में मिले थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Pulmonary Embolism यानी फेफड़ों में खून का थक्का बनने की बात सामने आई है। हालांकि पूरे मामले को लेकर अब भी चर्चाएं जारी हैं और कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
प्रतीक यादव के निधन के बाद सोशल मीडिया पर भी शोक संदेशों की बाढ़ आ गई।राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, खिलाड़ियों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने उनकी सरलता, सौम्य व्यवहार और फिटनेस के प्रति जागरूक जीवन शैली को याद किया।
अब कुछ ही देर में प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे। भैंसा कुंड बैकुंठ धाम में पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। हर किसी की जुबान पर यही बात है कि इतनी कम उम्र में इस तरह अचानक दुनिया छोड़ जाना बेहद दुखद है। लखनऊ की सड़कों पर गुरुवार को निकली यह अंतिम यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक परिवार के सदस्य की विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे शख्स को अंतिम सलाम थी, जिसे लोग शांत, सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं।
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