
SIT जांच, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और केंद्रीय फोरेंसिक जांच की मांग (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Prateek Yadav Death Case Reaches NHRC: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। प्रतीक यादव की मौत को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब एक गैर सरकारी संस्था (NGO) ने हत्या की आशंका जताते हुए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मानवाधिकार के लिए काम करने वाली संस्था डीके फाउंडेशन ने NHRC में शिकायत दाखिल कर इस मामले को बेहद गंभीर बताया है। संस्था का कहना है कि प्रतीक यादव की मौत सामान्य नहीं लगती और शरीर पर मिले कथित चोट के निशान कई सवाल खड़े करते हैं। NGO ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए तत्काल विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए और पूरी जांच को राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए।
बता दें कि समाजवादी पार्टी संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ स्थित उनके आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया था। सूत्रों के मुताबिक सुबह करीब चार बजे वह घर के किचन में अचेत अवस्था में पाए गए थे। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने तक उनकी पल्स और हार्ट बीट बंद हो चुकी थी। इसके बाद उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
डीके फाउंडेशन नाम की संस्था ने अपनी शिकायत में कहा है कि प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण Cardiorespiratory Collapse बताया जा रहा है, लेकिन कई तथ्य इस मामले को संदिग्ध बनाते हैं। संस्था ने आरोप लगाया कि प्रतीक यादव के शरीर पर कथित Ante-mortem Injuries यानी मृत्यु से पहले के चोट के निशान पाए गए हैं। NGO का कहना है कि प्रतीक यादव फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जाने जाते थे। ऐसे में उनकी अचानक मौत और शरीर पर संदिग्ध निशान गंभीर सवाल पैदा करते हैं। संस्था ने NHRC से मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
NGO ने अपनी शिकायत में तीन अहम मांगें रखी हैं-
1. SIT का गठन हो
2. CCTV फुटेज सुरक्षित किए जाएं
3. केंद्रीय फोरेंसिक जांच कराई जाए
सूत्रों के मुताबिक प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Pulmonary Embolism यानी फेफड़ों में खून का थक्का बनने की बात सामने आई है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने शरीर के कुछ हिस्सों पर निशान भी नोट किए थे, जिसके बाद मामला और चर्चा में आ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रतीक यादव का मोबाइल फोन, लैपटॉप और निजी डायरी समेत कई सामान अपने कब्जे में लिया है। पुलिस अधिकारियों ने उनके आवास का निरीक्षण भी किया था और कुछ कमरों को सील कर दिया गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मौत से पहले प्रतीक यादव किन परिस्थितियों में थे।
पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया। यहां बड़ी संख्या में समर्थक, शुभचिंतक और राजनीतिक नेता पहुंचे। लोगों की आंखें नम थीं और परिवार को ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा।
प्रतीक यादव की मौत के बाद सोशल Media पर भी लगातार चर्चाएं हो रही हैं। कई लोग मामले को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर पुराने पोस्ट और निजी जीवन से जुड़ी चर्चाएं भी फिर से वायरल होने लगी हैं।
मेडिकल और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार Pulmonary Embolism जैसी बीमारी अचानक मौत का कारण बन सकती है, लेकिन यदि शरीर पर चोट के निशान मिले हैं तो हर पहलू की गहन जांच होना आवश्यक है।
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर अब जांच एजेंसियों और आने वाली रिपोर्टों पर टिकी है। NHRC में शिकायत पहुंचने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। अब देखना होगा कि आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या SIT जांच की मांग को मंजूरी मिलती है। प्रतीक यादव की अचानक मौत ने न सिर्फ राजनीतिक गल
Published on:
14 May 2026 11:32 am
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
