President Ramnath Kovind family shopping in Hazratganj market Lucknow- राजधानी लखनऊ की चिकनकारी विश्व चर्चित है। लखनवी चिकनकारी की विरासत के प्रति लगाव का मोह देश के प्रथम नागरिक परिवार को भी भा गया। सोमवार दोपहर अचानक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) की बेटी स्वाति कोविंद हजरंतगंज स्थित छंगामल के चिकन शोरूम पर पहुंचीं और यहां की कारीगरी पर फिदा होकर जमकर खरीदारी की।
लखनऊ. President Ramnath Kovind family shopping in Hazratganj market Lucknow. राजधानी लखनऊ की चिकनकारी विश्व चर्चित है। लखनवी चिकनकारी की विरासत के प्रति लगाव का मोह देश के प्रथम नागरिक परिवार को भी भा गया। सोमवार दोपहर अचानक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) की बेटी स्वाति कोविंद हजरंतगंज स्थित छंगामल के चिकन शोरूम पर पहुंचीं और यहां की कारीगरी पर फिदा होकर जमकर खरीदारी की। उन्होंने करीब 25 आइटम खरीदे। इनमें राष्ट्रपति के लिए कुर्ता-पायजामा का सेट, मां के लिए साड़ियां और अपने लिए लॉन्ग और शॉर्ट कुर्तियों की रेंज पसंद की। महामहिम की पुत्री स्वाती कोविंद करीब तीन घंटे वह प्रतिष्ठान पर रहीं। उन्होंने चिकन के वस्त्रों की लंबी रेंज पसंद की। शोरूम के मालिक प्रभात गर्ग ने कहा कि परिवार सभी के साथ सादगी से मिला। उन्हें लखनऊ की चिकनकारी बेहद पसंद आई। राष्ट्रपति की बेटी ने कारोबार की जानकारी ली। चिकन के उद्भव से लेकर उसकी विकास यात्रा, कसीदाकारी के प्रकार और तरीकों के बारे में भी बारीकी से जाना और समझा।
लखनवी क्राफ्ट की ली जानकारी
कारोबारी प्रशांत गर्ग ने कहा कि लखनऊ आए राष्ट्रपति व उनके परिवार को लखनवी कारीगरी बेहद पसंद आई। उन्हें चिकन और इस लखनवी क्राफ्ट के बारे में बताया गया कि इसका श्रेय नूरजहां को जाता है, जिन्होंने सर्वप्रथम इसे कपड़े पर उतारा था। उन्होंने एग्जीबिशन के जरिए चिकनकारी की प्रक्रिया को बारीकी से समझा। इस दौरान वह स्टाफ के साथ संजीदगी से पेश आए। स्टाफ उनकी सादगी और सिंपल व्यवहार को देखकर कायल हो गया था। शो रूम के मालिक ने कहा कि परिवार के लोग द्वितीय तल पर भी गए और वहां एक बड़े शो केस में लगी प्रदर्शनी को देखा।
प्रतिष्ठान का इतिहास भी जाना
प्रतिष्ठान के मालिक गर्ग ने कहा कि राष्ट्रपति की बेटी ने प्रतिष्ठान की स्थापना के बारे में उत्सुकता जताई। इस पर उन्हें बताया गया कि सन् 1897 में इस प्रतिष्ठान की स्थापना स्व. रामशरण गर्ग ने अपने पिता के नाम स्व. छंगामल के नाम पर की थी। पिता चंद्र प्रकाश गर्ग से होते हुए अब यह कारोबार प्रभात गर्ग और पांचवी पीढ़ी के सदस्य अनंत गर्ग संभाल रहे हैं।