
Rain Impact Crops: पिछले गुरुवार और शुक्रवार को हुई लगातार बारिश ने धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, उड़द, केला, और अन्य सब्जियों की फसलों को प्रभावित किया है। भौली के प्रगतिशील किसान धीरेंद्र प्रताप सिंह और सुनील वर्मा ने बताया कि उनके खेतों में धान की शंकर प्रजातियां पानी में डूब गई हैं, जिससे उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बौनी प्रजातियों की फसलों को कम नुकसान हुआ है। बारिश की वजह से कुछ सब्जियों की फसलों को भी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों को आगे भी अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
गन्ना किसानों को इस बारिश से लाभ मिला है, क्योंकि गन्ने की फसल को ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। इसी के साथ लाही (सरसों) की बुवाई के लिए यह समय काफी अनुकूल माना जाता है, और बारिश ने लाही की बुवाई के लिए अच्छा माहौल तैयार किया है।
सितंबर का महीना टमाटर, बैंगन, मिर्च और गोभी जैसी सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त समय होता है। हालांकि, इस बार की लगातार बारिश ने इन सब्जियों की नर्सरी पर प्रभाव डाला है। नर्सरी में बीजों की बुवाई में देरी और पानी का जमाव किसानों के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
धान की फसल में नमी बढ़ने से गंधी कीट का प्रकोप भी बढ़ने का खतरा है। सितंबर का महीना धान की दग्धावस्था का होता है, जहां गंधी कीट का हमला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस कीट के प्रकोप को पहचानें और उसके लिए उचित कीटनाशकों का प्रयोग करें। कीटों के प्रबंधन के लिए क्लोरोपीरीफस और इमिडाक्लोप्रिड जैसे कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
सितंबर के अंत में यदि लगातार बारिश होती रही, तो रबी की फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है। विशेष रूप से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों की बुवाई के लिए सितंबर और अक्टूबर का महीना महत्वपूर्ण होता है। अगर यह बारिश जारी रहती है, तो किसानों को रबी की फसलों की बुवाई में परेशानी हो सकती है, जिससे फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है।
कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विशेषज्ञ डॉक्टर सत्येंद्र कुमार सिंह ने किसानों को आगामी फसलों के नुकसान को कम करने के उपाय सुझाए हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे पानी की निकासी के लिए उचित प्रबंध करें और फसलों को कीटों से बचाने के लिए सही समय पर कीटनाशकों का उपयोग करें।