लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर का जीवन बहुत ही संघर्षों से भरा रहा है। रामअचल राजभर का जन्म अम्बेडकरनगर के एक बड़े गरीब परिवार में हुआ था। रामअचल राजभर ने राजनैतिक करियर की शुरुआत अकबरपुर ब्लाकप्रमुखी चुनाव से की थी। जिसमें वह बुरी तरह से हार गए थे। 135 सदस्यों में से केवल 11 वोट ही उन्हें मिल पाये थे। इसके बाद उन्होंने 1991 में वह बसपा से विधायकी का चुनाव लड़े लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस हार के बावजूद बसपा में रामअचल की आवाज गूंजने लगी। उसके बाद 1993 में फिर वह बसपा से विधानसभा चुनाव लड़े, जिसके दम पर वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। जिसके बाद वह 1996, 2002 और 2007 में लगातार विजयी हुए। 2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद उन्हें परिवहन मंत्री बनाया गया। परिवहन मंत्री रहते राजभर ने इस क्षेत्र में लोगों को सुविधाओं की झड़ी लगा दी। हालांकि उन पर घोटाले के कई आरोप भी लगे।
चूहामार दवा बेचकर बने अरबपति
रामअचल राजभर किसी समय चूहामार दवा बेचकर परिवार चलाते थे वह भोंपू को लाउडस्पीकर की तरह सौदा बेचा करते थे। सौदा था चूहामार दवा। अकबरपुर के कई लोगों को याद है जब मूस-मार दवा ले लो, की गुहार लगाते हुए दवा बेचा करते थे। यह सब लम्बे समय तक चला। वक्त गुजरता चलता रहा और उसी की रफ्तार में रामअचल राजभर विश्वेश्वरनाथ कैलाश बिहारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंग्रेजी में एमए और एलएलबी हो गये। वर्तमान में करोड़ों की अचल-सम्पति के मालिक हैं, जो भ्रष्टाचार और अवैध ढंग से बनाई गई है। इतना ही नहीं, इस मंत्री ने अपने परिजनों के नाम से भी काफी नामी-बेनामी सम्पति गैर कानूनी ढंग से एकत्रित की है। यह आरोप पिछले दिनों बार एसोसिएशन अम्बेडकर नगर ने उनके ऊपर लगाए थे।
सबसे भ्रष्ट नेता होने का भी आरोप
बार एसोसियेशन के सदस्यों ने कहा था कि अनेक नेता व जन सेवकों के भ्रष्टाचार से अम्बेडकर नगर जिला का विकास अवरूद्ध हुआ है। अम्बेडकर नगर के इतिहास में अनेक लोकप्रिय शख्सियत हुई हैं, किन्तु मंत्री राम अचल ने तो भ्रष्टाचार की हद कर दी। संगठन के पहला निशाना राम अचल को बनाया था।
आय से अधिक संपत्ति
आय से अधिक संपत्ति जैसे गाटा संख्या-184 क्षेत्रफल 4.007 हैक्टेयर, जो गांव बाराखान हासिमपुर, अम्बेडकरनगर में वर्ष 2005-5 में जमीन खरीदी। एक दो मंजिला मकान अम्बेडकर नगर के पॉश इलाके में राजभर के पुत्र संजय कुमार राजभर के नाम 26 नवंबर 2007 को खरीदा। एक आटा मिल एवं अजंता राईस मिल, जो अकबरपुर बरसारी रोड पर स्थित है, उसे राजभर और उसके पुत्र संजय कुमार ने मुकेश अग्रवाल से खरीद की।
ईंट का भट्टा व अन्य भी बहुत कुछ
करोड़ों रुपयों के मूल्य की संपति ग्राम अटवारा अम्बेडकर नगर एवं ईंट का भट्टा पुत्र संजय कुमार के नाम खरीदा गया। संजय कुमार राजभर ने 10-12 दुकानें शहजादपुर-मालीपुर बाईपास पर सिंह मार्किट के सामने गयासुद्दीन से खरीदी। संजय कुमार ने करोड़ों रुपयों की संपति सरदार संतोष सिंह के पुत्र से खरीदी। इतना ही नहीं, अपने परिवार के नाम पर राजभर ने कुर्की बाजार से काफी भूमि खरीदी है।
सीबीआई ने छापेमारी कर धन किया था जब्त
एक 4600 वर्गफुट का भूखंड राम अचल ने बुध विहार कालौनी चिनहट में खरीदा। एक तालाब गाटा संख्या 1444 क्षेत्रफल .961 हैक्टेयर गांव रिझौली अम्बेडकर नगर को पाटकर राजभर के प्रबंधक दया राम राजभर ने वहां बिल्डिंग का निर्माण करवा दिया। इन संपतियों के अतिरिक्त मंत्री, परिवारजन व रिश्तेदारों द्वारा अनेक बसें राजभर के विधायक व मंत्रीकाल में अर्जित की गई। जिक्रयोग है कि राम अचल राजभर के पूर्व में, जब वह बेसिक मंत्री थे, आवास पर सी.बी.आई ने छापा मारकर अवैध तरीके से अर्जित किये धन को जब्त किया था।
पहनावा सीधा साधा
55 साल की उम्र, कद: साढ़े पांच फीट, रंग: साफ गेहुंआ, कपड़ा: सामान्य तौर पर सफेद सस्ती सादी पैंट-शर्ट, शिक्षा: अंग्रेजी में एमए एलएलबी, वैवाहिक स्थिति: विधुर,रहन-सहन: बेमिसाल, शौक: बोलना, लेकिन पार्टी की बैठकों में ही, सम्पत्ति: बेशुमार, दिक्कत: गुर्दा और कान की बीमारी, भोजन: खाना से ज्यादा दवा-दारू, प्रतिबद्धता: बसपा, बरास्ते सुप्रीमो मायावती। सरकारी कागजों में रामअचल राजभर के गांव का नाम भले ही कायमुद्दीनपुर लिखा हो, लेकिन उनका मूल गांव कुर्की गांव ही है, जहां उनके पिता रामअवध राजभर ने हलवाही के बल पर अपना परिवार पाला-पोसा।
97 से ज्यादा जमीनों की कराई रजिस्ट्री
पिछले पांच बरसों में रामअचल ऐंड कम्पनी ने 97 से ज्यादा जमीनों की रजिस्ट्री करायी है। जिधर भी नजर आती है या सवाल उठता है, तो जवाब होता है कि रामअचल राजभर। चाहे वह शहजाद रोड की नई सड़क पर 90 लाख से खरीदी गयी दूकान हो, या तहसील के पास की बेशकीमती दूकान। बसखारी रोड का 7 बीघा जमीन हो या कटेहरी के सुईडीह का 18 बीघा रकबा। रामअवध ट्रस्ट और भानवती ट्रस्ट जैसे कई ट्रस्ट के नाम पर जमीनों की भारी खरीद के आरोप खूब हैं।
एयरपोर्ट पर कारतूसों के साथ पकड़ा गया था बेटा
अंबेडकर नगर में चल रही ऐसी करतूतों के चलते ही शायद बसपा ने रामअचल राजभर का टिकट काट दिया था। लेकिन यह दिखने वाले दांत थे, क्योंकि उनके बेटे संजय को टिकट देकर रामअचल की रियासत बनाये रखने की कोशिश की गयी थी। संजय को कई महीनों पहले लखनऊ एयरपोर्ट में 20 करतूसों के साथ पुलिस ने पकड़ा था। खैर, पिछले चुनाव में संजय एक निजी स्टिंग में फंसे और नतीजे हार गये। हार से खिसियाये बसपाइयों ने जीते लोगों के जुलूस पर फायरिंग कर दी थी। गुस्सायी जनता भड़क गयी और रामअचल की राइस मिल फूंक डाली थी।