
अस्पताल में आग लगते ही मरीज को बाहर ले जाते हुए। फोटो: पत्रिका
Jodhpur Fire: जोधपुर। शाम करीब साढ़े सात बजे का समय। पावटा स्थित सोना मेडी हब अस्पताल में मरीज अपने वार्डों में थे। किसी का सुबह ही ऑपरेशन हुआ था, कोई दर्द से कराह रहा था तो कोई परिजन मरीज के पास बैठा था। तभी तीसरी मंजिल से धुएं का गुबार उठना शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में जोधपुर के अस्पताल की गलियों में चीख-पुकार गूंजने लगी। बिजली बंद हो गई, अंधेरा छा गया और वार्डों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की होड़ में परिजन बच्चों को गोद में उठाकर और मरीजों को सहारा देकर सीढ़ियों से नीचे भागने लगे।
गनीमत रही कि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, अन्यथा यह हादसा कहीं बड़ा रूप ले सकता था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भवन में भीतर और बाहर निर्माण कार्य चल रहा था, वहां गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार और ऑपरेशन कैसे किए जा रहे थे?
अस्पताल परिसर में जगह-जगह निर्माण सामग्री पड़ी थी और बाहर बल्लियां लगी हुई थीं। इसके बावजूद अस्पताल पूरी तरह संचालित था। आग लगने के बाद धुआं वार्डों तक पहुंचा तो मरीजों को लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों से नीचे उतारना पड़ा। कई मरीज ऐसे थे जिनका कुछ घंटे पहले ही ऑपरेशन हुआ था।
आग बुझाने में दमकलकर्मियों को भी निर्माण कार्य के कारण परेशानी हुई। राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने निर्माणाधीन भवन में अस्पताल संचालन और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आग कुछ देर और बेकाबू रहती या धुआं तेजी से फैलता तो हालात भयावह हो सकते थे।
सुबह उनके बच्चे का ऑपरेशन हुआ था। शाम को अचानक वार्ड धुएं से भर गया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल बाहर निकलने को कहा तो उन्होंने बच्चे को गोद में उठाया और किसी तरह नीचे पहुंचे। उन्होंने कहा, 'जान बच गई, ईश्वर का शुक्रिया।'
-चंपालाल, परिजन
मेरी मां अस्पताल में भर्ती थी। वार्ड में धुंआ उठा तो मैं बाहर दौड़कर आई। इतने में अस्पताल के कर्मचारी आए और उन्होंने बाहर जाने के लिए कहा। मेरी माताजी का वजन ज्यादा है। चार-पांच लोगों ने उठाकर सीढ़ियों से नीचे उतारा तब जान में जान आई।
-यशोदा, परिजन
मेरे स्पाइन का ऑपरेशन हो रखा है, इसलिए खड़ा भी नहीं हो सकता। वार्ड में अचानक चीख-पुकार सुनी तो घबरा गया। अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी आए और उन्होंने मुझे नीचे उतारा। पास के अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया। अब सुरक्षित महसूस कर रहा हूं।
-रोहन सांखला, मरीज
हमारे वार्ड के ऊपर की मंजिल में आग लगी। कुलिंग के साथ धुआं हमारे वार्ड में पहुंचा तो सभी घबरा गए। अंधेरा हो गया। सभी लोग दौड़ने लगे। मेरा तो आज ही ऑपरेशन हुआ था। मुझे आनन-फानन में सीढ़ियों से नीचे लाया गया। अस्पताल से बाहर आई तो जान में जान आई।
-उर्मिला आचार्य, मरीज
Published on:
11 Jun 2026 09:11 am
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