
जोजरी नदी में प्रदूषण। फोटो: पत्रिका
जोधपुर। जोजरी नदी में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य अपने नागरिकों को जहर देना चाहता है तो यह शर्मनाक है। हम राज्य के हाथों लोगों को जहर नहीं देने देंगे। चाहे इसके कारण कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं, हम 20 लाख लोगों की जान की रक्षा करेंगे।
सप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि नदी में अभी भी बहुत ज्यादा जहरीला पानी बह रहा है। एसआईटी ने अब तक कुछ नहीं किया है। रिपोर्ट के रिव्यू से पता चलता है कि जांच सही दिशा में नहीं चल रही है, बल्कि यह सिर्फ़ एक दिखावा है। कोर्ट में अब अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। बता दें कि जोजरी नदी में प्रदूषण का मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। जोधपुर सहित कई जिलों के लोग लगातार नदी में प्रदूषण को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए वकील एएसजी राजू ने कोर्ट को बताया कि एसआईटी पिछले महीने बनाई गई थी और उसने अपनी शुरुआती रिपोर्ट एक्सपर्ट कमिटी को सौंप दी है। राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू किया है और सीईटीपी से पानी के सैंपल के कलेक्शन के लिए ज़िम्मेदार रीजनल अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि, कोर्ट इन जवाबों से खुश नहीं दिखा। बेंच ने कहा कि गलत रिपोर्ट दी जा रही हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि कमेटी के निर्देशों को न मानने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जोजरी नदी किनारे बनी सभी फैक्ट्रियां अभी बंद हैं, लेकिन एक्सपर्ट कमेटी उन इंडस्ट्रीज़ के रिप्रेजेंटेशन पर विचार कर सकती है जो पॉल्यूशन कंट्रोल के तरीके अपनाने को तैयार हैं।
बता दें कि जोजरी नदी में प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। इसमें स्टील और टैक्सटाइल सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों की बड़ी भूमिका सामने आई थी।
हाल ही में जोधपुर की जोजरी नदी पर जेएनवीयू के शोध में बड़ा खुलासा हुआ था। अध्ययन में सामने आया था कि जोजरी नदी का पानी न केवल पीने योग्य रहा, बल्कि सिंचाई के लिए भी असुरक्षित श्रेणी में पहुंच चुका है। शोधकर्ताओं की मानें तो स्टील और टैक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट इस स्थिति के प्रमुख कारण है। उनका मानना है कि यदि प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण और जल शोधन के उपाय तुरंत नहीं किए गए तो जोजरी नदी से जुड़े गांवों की खेती, भूजल, पशुधन और जैव विविधता पर इसका असर और गंभीर हो सकता है।
राजस्थान की जोजरी नदी नागौर जिले के पाण्डलू गांव की पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर जिले के खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। पिछले कई सालों से जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली जिलों की फैक्ट्रियों, खासकर टैक्सटाइल और स्टील री-रोलिंग यूनिट्स से निकलने वाला प्रदूषित पानी जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी के किनारे बसे 50 से ज्यादा गांव और बस्तियां इससे सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
Updated on:
23 Jul 2026 02:28 pm
Published on:
23 Jul 2026 02:28 pm
