19 जुलाई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan News : क्यों ‘पिंक’ हो रहा ‘ब्लू’ सिटी जोधपुर का पानी? एक्सपर्ट्स भी हैरान, जानिए Inside Story

Jodhpur के तनावड़ा गांव में तालाब का पानी अचानक हुआ 'गुलाबी'। Pollution Control Board की रिपोर्ट में भारी कचरा मिलने की पुष्टि, अब NEERI नागपुर के वैज्ञानिक सुलझाएंगे यह रहस्य।
3 min read
Google source verification
Jodhpur Tanawada Village Pink Pond Water Contamination NEERI Probe

Jodhpur Tanawada Village Pink Pond Water - Patrika PIC

राजस्थान के जोधपुर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो पूरे प्रशासनिक अमले और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी ऐतिहासिक पहचान और नीले मकानों के कारण दुनिया भर में 'ब्लू सिटी' के नाम से मशहूर जोधपुर शहर से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित तनावड़ा गांव का एक पुराना पारंपरिक तालाब पिछले 1 महीने से पूरी तरह 'गुलाबी' रंग के पानी में तब्दील हो चुका है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा इस तालाब के पानी के बदलते रंग को लेकर जताई गई गहरी चिंता और मीडिया में मामला प्रमुखता से उजागर होने के बाद, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) की टीम ने तुरंत एक्शन लिया है। बोर्ड द्वारा जारी की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में तालाब के पानी में सामान्य से कई गुना अधिक कार्बनिक और औद्योगिक अपशिष्ट भार मिलने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस गंभीर खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने तालाब के आसपास चल रही अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार किया है, लेकिन पानी के इस चमकीले गुलाबी रंग के पीछे का असली वैज्ञानिक कारण अब भी एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।

प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में भारी अपशिष्ट की पुष्टि

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 17 जून को ही तालाब के पानी के कई अलग-अलग सैंपल एकत्र कर लिए थे, जिसकी विस्तृत लैब रिपोर्ट अब सामने आ चुकी है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि तनावड़ा तालाब के बिल्कुल नजदीक दो अवैध टेक्सटाइल इकाइयां चुपके से संचालित की जा रही थीं। यह अंदेशा जताया गया कि इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला रंगीन रासायनिक पानी सीधे तालाब में बहाया जा रहा था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन दोनों अवैध फैक्ट्रियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

वहीं उद्योगों के जहरीले और रंगीन कचरे के अवैध परिवहन को रोकने के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) और पुलिस प्रशासन के सहयोग से विशेष उड़नदस्ते तैनात कर दिए गए हैं, जो रात-दिन क्षेत्र में आने-जाने वाले टैंकरों पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

असली कारण पर अब भी सस्पेंस

लगातार की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयों के बावजूद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक अभी तक किसी एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं कि पानी का रंग इतना गहरा गुलाबी क्यों बना हुआ है।

एक्सपर्ट्स ने जताई दो संभावनाएं

बोर्ड के विशेषज्ञों ने फिलहाल दो मुख्य तकनीकी संभावनाएं जताई हैं:

शैवाल (Algae) का अत्यधिक प्रभाव: पहली संभावना यह है कि पानी में न्यूट्रिएंट्स और कार्बनिक कचरे की मात्रा अत्यधिक बढ़ने के कारण खास किस्म के गुलाबी या लाल शैवाल (Red/Pink Algae Bloom) तेजी से पनप गए हैं, जो पानी के रंग को बदल देते हैं।

केमिकल और अतीत का कचरा: दूसरी संभावना यह है कि पूर्व में लंबे समय तक इस तालाब में रसायनिक टेक्सटाइल अपशिष्टों का अवैध निस्तारण किया जाता रहा है, जो अब पानी कम होने पर सतह से ऊपर आ गया है।

नागपुर से आ रही NEERI की स्पेशल टीम

स्थानीय लैब और राज्य स्तर के वैज्ञानिक इस रहस्यमयी गुलाबी पानी का सटीक कारण ढूंढने में पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं, इसलिए अब देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अनुसंधान संस्था नीरी (NEERI - National Environmental Engineering Research Institute, Nagpur) के शीर्ष वैज्ञानिकों को जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

नीरी नागपुर की यह विशेष टीम जल्द ही जोधपुर के तनावड़ा गांव पहुंचकर पानी, मिट्टी और तालाब की तलहटी के जैविक नमूनों का गहन वैज्ञानिक परीक्षण करेगी।

ग्रामीणों में पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर डर

तनावड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में इस गुलाबी पानी को लेकर भारी डर का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब सदियों से उनके मवेशियों और स्थानीय वन्यजीवों के पीने के पानी का मुख्य जरिया रहा है। पानी के जहरीले होने की आशंका के चलते अब लोग अपने पशुओं को तालाब के पास ले जाने से कतरा रहे हैं। स्थानीय पंचायत ने भी प्रशासन से मांग की है कि जब तक नीरी (NEERI) की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती और तालाब के पानी को पूरी तरह ट्रीट (Treat) नहीं कर दिया जाता, तब तक इस पूरे क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित घेरे में रखा जाए।