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जोधपुर की मंडोर खुली जेल में जीवनसाथी बने 2 कैदी, उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम-सीमा ने रचाई शादी, 21 बाराती बने गवाह

राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद जोधपुर की मंडोर खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा विवाह बंधन में बंध गए। खुले जेल परिसर में सात फेरे लिए गए। जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में संपन्न यह शादी जेल सुधार और पुनर्वास की अनोखी मिसाल बनी।
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Mandore Open Jail Moolaram-Seema Wedding

उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने रचाई शादी (पत्रिका फोटो)

Mandore Open Jail Moolaram-Seema Wedding: जोधपुर: साफा, किलंगी और सूट-बूट में सजा दूल्हा…हाथों में मेहंदी, सिर पर मोड़ और लाल जोड़े में सजी दुल्हन…मंत्रोच्चार करते पंडित…अग्नि के समक्ष सात फेरे और वरमाला के बाद आशीर्वाद देते लोग। बाहर ढोल-थाली की थाप पर नाचते बाराती और शामियाने में भोजन करते मेहमान…यह किसी आम घर में होने वाली शादी का दृश्य नहीं, बल्कि बुधवार को मंडोर की खुली जेल का नजारा था।

बता दें कि यहां हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और वैवाहिक बंधन में बंध गए। जेल की चारदीवारी के बीच हुई यह शादी प्रेम, विश्वास और नई जिंदगी की उम्मीद की अनोखी कहानी बन गई।

मंडोर की खुली जेल में कैदियों के लिए बने आवासों के बीच आयोजित विवाह समारोह में बुधवार को उत्सव का माहौल रहा। शादी में दूल्हा-दुल्हन के परिजन और रिश्तेदार शामिल हुए। जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अधिवक्ता भी इस अनूठे विवाह के गवाह बने। कुल 21 बाराती शादी में शामिल हुए।

हाईकोर्ट के आदेश और विशेष पैरोल से संभव हुई शादी

इस अनोखे विवाह का मार्ग राजस्थान उच्च न्यायालय के एक विशेष आदेश के बाद प्रशस्त हुआ था। दोनों ही बंदी हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अच्छे आचरण के कारण दोनों को मंडोर की खुली जेल में स्थानांतरित किया गया था। जहां रहने के दौरान वे एक-दूसरे के संपर्क में आए और उन्होंने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया।

विवाह के लिए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और बंदियों के पुनर्वास व मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को मंजूरी दी और आवश्यक पैरोल प्रदान करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक और अनूठे आदेश के बाद जेल प्रशासन ने शादी की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की थी।

लड़की के माता-पिता ने किया कन्यादान, बंदी ने निभाई भाई की रस्म

मूलाराम और सीमा का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। सीमा के माता-पिता ने कन्यादान की रस्म निभाई। वहीं, जेल में सजा काट रहे जोराराम ने भाई बनकर शादी की रस्मों में हिस्सा लिया। विवाह समारोह के लिए जेल परिसर में शामियाना लगाया गया था। परिजनों और रिश्तेदारों के साथ बारातियों के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई।

मंगल गीतों से गूंजा जेल परिसर

शादी के दौरान जेल परिसर का माहौल पूरी तरह बदल गया। दोनों परिवारों की महिलाओं ने मंगल गीत गाए। ढोल और थाली की थाप पर बारातियों ने नृत्य किया। दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर साथ जीने-मरने का संकल्प लिया। शादी में शामिल लोगों ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देकर उनके सुखद भविष्य की कामना की।

हाईकोर्ट की अनुमति के बाद बंधे विवाह बंधन में

नागौर निवासी मूलाराम और सीमा दोनों हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दोनों की शादी को लेकर हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद विवाह समारोह आयोजित किया गया। मूलाराम 16 फरवरी 2017 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषसिद्ध है और खुली जेल में रह रही है। अब दोनों ने विवाह के बाद जेल परिसर में ही साथ जीवन बिताने का फैसला किया।