
- रिफाइनरी शुरू होने से औद्योगिक विकास की उड़ान भर रहे बालोतरा को अब हवाई सेवा से जोड़ने की दरकार
लोगो - पत्रिका मुद्दा
बाड़मेर पत्रिका.
राज्य में उड़ान योजना का द्वितीय चरण शुरू करने से कई जिलों में हवाई सेवा को लेकर उम्मीदें बलवती हुई हैं। नए जिले बालोतरा में भी हवाई सेवा को लेकर विपुल संभावनाएं हैं। यहां तिलवाड़ा के निकट हवाई पट्टी पहले से ही है। ऐसे में यह सुविधा मिले तो रिफाइनरी के बाद बालोतरा को एक बड़ी सौगात मिल सकती है।
बालोतरा के निकट पचपदरा अंग्रेजों के जमाने में नमक का बड़ा केन्द्र था और मारवाड़ में राजकोष का बड़ा जरिया भी रहा। जानकारी अनुसार जोधपुर के पूर्व महाराज उम्मेदसिंह ने मारवाड़ में 22 जगह पर हवाई पट्टियां बनवाई थी ताकि यहां हवाई सेवा मिले। उस समय में तिलवाड़ा में भी हवाई पट्टी निर्मित हुई। अंग्रेजी शासनकाल में इसका उपयोग हुआ। आजादी के बाद में इस हवाई पट्टी की जमीन को सरकारी खाते में दर्ज कर लिया गया।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पास
हवाई पट्टी की यह जमीन करीब 145 बीघा है। यह अभी नागरिक उड्डयन मंत्रालय के खाते में दर्ज है। यहां आजादी के बाद में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के इस इलाके के दौरे के दौरान इसका इस्तेमाल किए जाने का दावा स्थानीय लोग करते हैं।
700 बीघा सरकारी जमीन भी
इसी जमीन के निकट में 700 बीघा सरकारी जमीन भी है जो, आगे रिफाइनरी तक के इलाके को जोड़ती है। इस हवाई पट्टी की जमीन का सीधा जुड़ाव आगे रिफाइनरी तक हो रहा है।
मिल सकता है उड़ान का फायदा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 4 जुलाई को जोधपुर में उड़ान योजना के द्वितीय चरण को भी प्रारंभ किया है। इसमें राजस्थान के ऐसे शहर जहां हवाई संभावनाएं हैं, उनको जोड़ा जाएगा। बालोतरा अभी नया जिला बना है। यहां रिफाइनरी के साथ ही पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स का निर्माण हो रहा है। 239 विभिन्न औद्योगिक उत्पाद के कारखाने लगेंगे। ऐसे में बालोतरा में भी अब हवाई सेवा का नया अध्याय जोडऩे की स्थितियां हैं।
औद्योगिक इलाका
बालोतरा में कपड़ा व्यवसाय है। इसकी एक हजार से अधिक इकाइयां हैं। करीब पांच दशक से भी अधिक समय पुराने इस व्यवसाय का टर्न ओवर करोड़ों रुपए है। देशभर के विभिन्न शहर इससे जुड़े हैं। व्यापारियों के लिए भी हवाई सुविधा आने-जाने के लिए बेहतर है।
धार्मिक पर्यटन भी खूब
बालोतरा के निकट आसोतरा और नाकोड़ा दोनों ही बड़े धार्मिक स्थल हैं, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग दर्शनार्थ पहुंचते हैं। इसके अलावा जसोल, मल्लीनाथ मंदिर तिलवाड़ा, नागाणाराय नागणेच्यां माता के मंदिर भी यहीं हैं, जो पूरे भारत से जुड़े हैं। ऐसे में धार्मिक पर्यटन के हिसाब से भी यहां हवाई सेवा की दरकार है।
हवाई सेवा आज की जरूरत
बालोतरा पहले से औद्योगिक सिटी रहा है। रिफाइनरी शुरू होने के बाद यहां पेट्रोकेमिकल जोन सहित अन्य उद्योग भी विकसित होंगे। ऐसे में अब बालोतरा को हवाई सेवा से जोड़ना जरूरी हो गया है। इस मामले को संसद में उठाया जाएगा। इसके साथ ही बाड़मेर के उत्तरलाई में सिविल एयरपोर्ट भी जल्द चालू होना चाहिए। इससे दोनों शहर सीधे देश के प्रमुख शहरों से एयर कनेक्टिविटी से जुड़ जाएंगे।
- उम्मेदाराम बेनीवाल, सांसद
पूर्व में पैरवी की है
उड़ान योजना को लागू किया गया है। बालोतरा को हवाई सेवा से जोड़ने के लिए हवाई पट्टी मौजूद है। इसके लिए पूर्व में भी नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखा गया है। इसके लिए पैरवी की जाएगी। -मानवेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद
Updated on:
24 Jul 2026 06:01 am
Published on:
24 Jul 2026 06:01 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
