मशहूर संगीतकार उषी खन्ना को लेकर हाल ही में एक राष्ट्रीय अखबार ने खबर छापी की उनकी शोक सभा में बॉलीवुड के तमाम सितारे पहुंचे। जबकि सच यह है कि वह अभी जिंदा हैं। इस कारण उस अखबार की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं। पत्रिका ने सूत्रों से पता किया वह स्वस्थ्य हैं। उनका परिवार इस खबर के पब्लिश हो जाने से काफी दुखी है।
(अखबार में छपी थी यह फर्जी खबर)
संगीत में उषा खन्ना की पहचान भारतीय सिने इतिहास की पहली स्थापित महिला संगीतकार के तौर पर बनी थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1959 में आई फिल्म 'दिल देकर देखो' से की। इसके बाद उन्होंने लगातार कई फिल्मों में हिट गाने दिए। येसुदास से उन्होंने एक गीत गवाया 'दिल के टुकड़े-टुकड़े करके, मुस्कुराके चल दिये, जाते-जाते ये तो बता जा, हम जीएंगे किसके लिए 'जो हिट गया । इतना हिट हुआ कि उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया। उन्होंने 'सौतन' फिल्म के गीत कंपोज किए। वह हिट हुए। आखिर ऊषा को फिल्मफेयर नामांकन मिला।
1980 में रिलीज फिल्म 'आप तो ऐसे न थे' का रफी का गाया मशहूर गीत 'तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है' बेहतरीन गीत है। उषा खन्ना ने जब संगीत दिया, वह गौरतलब ही रहा। उन्होंने 'बिन फेरे हम तेरे', 'सौतन', 'पत्थर' की लकीर जैसी हिट फिल्मों में भी संगीत दिया।