
2 हफ्ते से पैर का घाव नहीं भर रहा तो यह Leg Ulcer का इशारा हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Leg Ulcer Symptoms: शरीर पर कोई छोटी-मोटी चोट या खरोंच लग जाना बेहद आम बात है। आमतौर पर 4-5 दिनों में घाव सूखने लगता है और हफ्ता-दस दिन में चमड़ी बिल्कुल ठीक हो जाती है। लेकिन, अगर आपके पैर में लगा कोई घाव या चोट 2 हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी नहीं भर रही है, तो इसे मामूली समझकर अनदेखा न करें। नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के मुताबिक, लंबे समय तक न भरने वाला पैर का यह घाव लेग अल्सर (Leg Ulcer) हो सकता है। आइए समझते हैं कि लेग अल्सर क्या होता है, यह क्यों होता है और इससे राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए।
लेग अल्सर पैरों (खासकर घुटने के नीचे या टखने के पास) में होने वाला एक ऐसा घाव या छाला है, जिसे ठीक होने में 2 हफ्ते से ज्यादा समय लगता है।आमतौर पर जब पैर में चोट लगती है, तो खून के बहाव के साथ शरीर खुद उस घाव को भरने लगता है। लेकिन जब पैरों की नसों (veins or arteries) में खून का दौरा ठीक से नहीं हो पाता, तो उस जगह की चमड़ी कमजोर होने लगती है और वहां एक गहरा घाव बन जाता है जो खुद-ब-खुद आसानी से ठीक नहीं होता।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर आपके पैर में घाव है और उसके आसपास नीचे दिए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो यह लेग अल्सर का संकेत हो सकता है;
1. वेनस लेग अल्सर (Venous Leg Ulcer- सबसे आम कारण)- यह तब होता है जब पैरों की नसों के वाल्व (Valves) कमजोर हो जाते हैं। आमतौर पर नसें खून को वापस दिल की तरफ भेजती हैं, लेकिन वाल्व खराब होने पर खून पैर की निचली नसों में ही जमा होने लगता है। इससे नसों में दबाव बढ़ता है और चमड़ी कटकर घाव बन जाती है।
2. आर्टेरियल लेग अल्सर (Arterial Leg Ulcer)- यह तब होता है जब पैरों तक ऑक्सीजन और ताजा खून पहुंचाने वाली धमनियां (arteries) सख्त या ब्लॉक हो जाती हैं। खून की सप्लाई कम होने से वहां की टिश्यूज (तंतु) मरने लगते हैं और घाव बन जाता है।
3. डायबिटीज (Diabetes)- शुगर के मरीजों में नसों को नुकसान पहुंचता है और खून का बहाव धीमा पड़ जाता है। इस वजह से शुगर के मरीजों में पैरों का छोटा सा घाव भी लेग अल्सर का रूप ले लेता है।
4. अन्य कारण- ज्यादा वजन (मोटापा), सिगरेट पीना, बढ़ती उम्र, गतिहीन जीवनशैली (दिनभर बैठे रहना) या पहले कभी पैरों में खून का थक्का (DVT/Blood Clot) जमना।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
22 Jul 2026 07:00 am
