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Klinefelter Syndrome क्या है? एनएचएस ने बताया पुरुषों में बांझपन और कम टेस्टोस्टेरोन की वजह बन सकती है यह जेनेटिक स्थिति

Klinefelter Syndrome: एनएचएस के अनुसार, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम एक ऐसी जेनेटिक स्थिति है, जिसके बारे में इंसान को सालों तक पता ही नहीं चलता। आइए मेयो क्लिनिक से जानते हैं कि इसका बांझपन और टेस्टोस्टेरोन से क्या संबंध है और इसके लक्षण क्या होते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Updated: 21 Jul 2026, 1:10 PM IST

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क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम एक ऐसी जेनेटिक स्थिति है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Low Testosterone Klinefelter Syndrome: अक्सर पुरुषों में थकान, मांसपेशियों की कमी या पिता न बन पाने (इनफर्टिलिटी) की समस्या को लोग केवल तनाव, खराब डाइट या लाइफस्टाइल का असर मान लेते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे एक ऐसी जन्मजात स्थिति होती है, जिसके बारे में इंसान को सालों तक पता ही नहीं चलता।

NHS के मुताबिक, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) एक ऐसी ही जेनेटिक स्थिति (genetic condition) है। यह कोई फैलने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि जन्म से ही शरीर में मौजूद रहने वाली एक स्थिति है। आइए जानते हैं कि क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इसका पुरुषों की सेहत पर क्या असर पड़ता है।

यह स्थिति क्यों और कैसे होती है?

इसे समझने के लिए हमें शरीर के क्रोमोसोम (chromosomes) को समझना होगा। हमारे शरीर में लिंग का फैसला क्रोमोसोम करते हैं, आमतौर पर महिलाओं में XX क्रोमोसोम होते हैं। पुरुषों में XY क्रोमोसोम होते हैं। मेयो क्लिनिक के अनुसार, जब किसी लड़के का जन्म एक अतिरिक्त (extra) X क्रोमोसोम के साथ होता है, तो उस स्थिति को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (XXY) कहा जाता है। पुरुषों में जहां XY क्रोमोसोम का जोड़ा होता है, वहीं क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से पीड़ित पुरुष के शरीर की कोशिकाओं में XXY का कॉम्बिनेशन बन जाता है। इस एक X क्रोमोसोम की वजह से शरीर में पुरुषों वाले हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता।

क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के मुख्य लक्षण

  • टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी।
  • बांझपन (Infertility/पिता न बन पाना)।
  • शारीरिक बनावट में बदलाव।
  • थकान और कम एनर्जी।
  • हड्डियों का कमजोर होना।

बांझपन और टेस्टोस्टेरोन का इससे क्या संबंध है?

पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन ही दाढ़ी-मूछें, आवाज का भारीपन, मांसपेशियों की मजबूती और स्पर्म बनाने का काम करता है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम में अतिरिक्त X क्रोमोसोम के कारण टेस्टिस (अंडकोष) का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता। नतीजा यह होता है कि शरीर पर्याप्त मात्रा में टेस्टोस्टेरोन नहीं बना पाता। जब टेस्टोस्टेरोन कम बनता है, तो स्पर्म काउंट भी बहुत कम या जीरो (Azoospermia) हो जाता है। यही वजह है कि ऐसे पुरुषों को प्राकृतिक रूप से पिता बनने में काफी परेशानी आती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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