सहारा ग्रुप के संस्थापक सुब्रत राय ने मंगलवार को मुंबई में आखिरी सांस ली। इसके बाद से लोग उनके बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं। इन्हीं में से एक किस्सा है जब सहारा श्री फिल्म अभिनेता राज बब्बर को चुनाव लड़ाने के लिए पूर्व पीएम स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिए थे। आइए जानते हैं।
सत्तर के दशक में सहारा ग्रुप के संस्थापक सुब्रत राय की जिंदगी फिल्मों- सी थी। उनको जानने वाले बताते हैं कि सहारा श्री का राजदरबार लगता था। सुब्रत राय की हर सेक्टर में तूती बोलती थी। बॉलीवुड, क्रिकेट, से लेकर बड़े- बड़े राजनेता तक नतमस्तक थे। उनके इशारों पर शासन सत्ता चलती थी। उनकी व्यक्तिगत जिंदगी की कहानियां किवदंती बनकर फैली हुई थीं।
कुछ राजनीतिक पार्टियों के लोकसभा और विधानसभा के टिकट भी लखनऊ के सहारा शहर से तय होते थे। सहारा श्री का राजनीति में ऐसा दखल बढ़ा कि राज बब्बर को लखनऊ से चुनाव लड़ाने के लिए उन्होंने स्व अटल बिहारी वाजपेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
राज बब्बर को सपा ने दिया था टिकट
साल 1996 में पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेई लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से अटल बिहारी के खिलाफ राज बब्बर को चुनावी मैदान में उतारा। राज बब्बर का ये पहला लोकसभा चुनाव था और वो भी एक दिग्गज नेता के सामने चुनाव लड़ रहे थे।
इसी चुनाव में सहारा श्री ने राज बब्बर को चुनाव को जिताने के लिए अटल बिहारी बाजपेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राज बब्बर खुद भी जानते थे कि अटल बिहारी के सामने चुनाव जीतना लगभग नामुमकिन था। उनके मन में दुविधा में भी थी लेकिन निर्णय पार्टी ने लिया था। शायद यही वजह रही कि बे बिल्कुल आखिरी समय में चुनावी मैदान में उतरे। हालांकि, चुनाव हुए और जब नतीजे आए तो राज बब्बर चुनाव हार गए। उन्हें 37 फीसदी वोट मिले जबकि अटल जी को 52 फीसदी वोट मिले।
राज बब्बर ने सुब्रत राय को दी श्रद्धाजंलि
सहारा श्री के निधन के बाद राज बब्बर ने ’X’ पर पोस्ट करके सुब्रत राय को श्रद्धाजंलि दी। उन्होंने लिखा, “आप में मेरा एक बड़ा भाई था जिसे मैंने मामूली शुरुआत से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी सहकर्मियों की टीम बनाते हुए देखा। आप अपने साथ जुड़े सभी लोगों को 'परिवार' मानना पसंद करते थे। आपने जिस भारतीयता की भावना का समर्थन किया, वहीं कारण था कि आपको हर जगह इतना सम्मान मिला। आपके जाने से, मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरा एक हिस्सा चला गया है। क्योंकि हमारे बीच जो भावनात्मक रिश्ता था, उसे साझा करने का सौभाग्य मुझे हमेशा महसूस होता है। मेरे परिवार के लिए आपकी सुरक्षात्मक अभिभावक जैसी चिंता की बहुत याद आएगी और भले ही हम अलग- अलग दुनिया से थे, मैं हमेशा आपको अपने साथ याद करूंगा।
अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि आप नहीं रहे। अच्छी तरह यात्रा करें सहाराश्री- आपके जैसा कोई कभी नहीं हो सकता। नमन।”