बदायूं में कुछ दिन पहले SDM ने 'राज्यपाल को हाजिर होने के लिए समन भेजा था। इस पर राजभवन ने नाराजगी जताई थी। अब SDM और पेशकार को सस्पेंड कर दिया गया है।
बदायूं में जमीन अधिग्रहण के एक मामले में एसडीएम ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को समन भेज दिया। नोटिस मिलते ही राजभवन में हड़कंप मच गया था। राज्यपाल के विशेष सचिव ने डीएम को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद गुरुवार को शासन ने एसडीएम (न्यायिक) विनीत कुमार और कोर्ट पेशकार बदन सिंह को सस्पेंड कर दिया है।
दरअसल कुछ दिन पहले बदायूं जिले में एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने राज्यपाल को समन जारी करके 18 अक्तूबर को पेश होने का आदेश दिया गया था। जब समन 10 अक्तूबर को राजभवन पहुंचा तो राज्यपाल के विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह ने इस मामले में 16 अक्तूबर को डीएम को पत्र भेजा।
क्या था मामला?
बदायूं जिले के थाना सिविल लाइंस क्षेत्र का मामला है। यहां गांव लोड़ा बहेड़ी निवासी चंद्रहास ने सदर तहसील के एसडीएम न्यायिक कोर्ट में एक परिवाद दायर किया। इसमें विपक्षी पक्षकार के रूप में लेखराज, पीडब्ल्यूडी के संबंधित अधिकारी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को दर्शाया गया। इसमें चंद्रहास ने आरोप लगाया कि उसकी चाची कटोरी देवी की संपत्ति उनके एक रिश्तेदार ने अपने नाम दर्ज करवा ली है। इसके बाद उस जमीन को लेखराज के नाम बेच दिया गया।
नोटिस पर राजभवन ने जताई थी नाराजगी
चंद्रहास ने दायर वाद में बताया कि कुछ दिन बाद बदायूं बाईपास बहेड़ी के पास स्थित उस जमीन का कुछ हिस्सा शासन ने अधिग्रहीत कर लिया। इसमें लेखराज को शासन की ओर से 12 लाख रुपये का मुआवजा मिला। इसकी जानकारी होने पर कटोरी देवी की ओर से चंद्रहास ने एसडीएम न्यायिक कोर्ट में परिवाद दायर किया। इसके बाद एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने आरोपी लेखराज, पीडब्ल्यूडी के संबंधित अधिकारी और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को कोर्ट में हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का नोटिस जारी कर दिया। इसमें राजस्व संहिता की धारा 144 में दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल बताया गया। हालांकि राज्यपाल को नोटिस मिलने के बाद उनके विशेष सचिव बद्री नाथ सिंह ने एसडीएम न्यायिक कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 361 का पूर्णतया उल्लंघन बताते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है।