
अनिल के. अंकुर
लखनऊ। Samajwadi Party के नाराज चाचा Shivpal Singh Yadav जल्द ही अपने भतीजे Akhilesh Yadav के सामने सरेंडर मुद्रा में दिखेंगे। हालांकि शिवपाल इस स बन्ध में कुछ भी बोलने को तैयार नही हैं, पर उन्होंने इटावा, मैनपुरी और एटा के अपने समर्थकों को यह संदेश जरूर भिजवा दिया है कि वे वही करेंगे जो नेताजी कहेंगे। वे नेताजी के साथ थे और आगे भी रहेंगे। पांच नव बर को आगरा की धरती पर वह सीन दिखेगा जिसको लेकर पिछले दो साल से यूपी की सियासत में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे थे। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि वहां पर आयोजित सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में जहां मुलायम ङ्क्षसह यादव को फिर से सपा की कमान सौंपी जाने की संभावना है वहीं शिवपाल के बारे में भी परिद़श्य साफ हो जाएगा।
पार्टी की सत्ता हथियाने के लिए चचा भतीजे के बीच विवाद (Akhilesh Shivpal Dispute)
हम बताते चलें कि बीते दो सालों से शिवपाल सिंह यादव और उनके भतीजे अखिलेश यादव के बीच पार्टी को हथियानें को लेकर विवाद शुरू हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि UP Vidhan Sabha Election 2017 से पहले Akhilesh Yadav ने सपा सुप्रीमो Mulayam Singh yadav से बगावत कर उनकी ही पार्टी का सर्वोच्च पद हथिया लिया था। इसके बाद आए चुनावी नतीजों में अखिलेश को करारी हार का सामना करना पड़ा था। पिता के खिलाफ अखिलेश के बगावती तेवर पर राजनीतिक पंडितों का कहना था कि राजनीति की जिद में भी अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह पर ही गए हैं। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव 2022 में हैं और लोकसभा 2019 में, सभी दल अभी सुश्कावस्था में हैं और वहीं अखिलेश संघर्ष कर रहे हैं। हर रोज पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
नया मोर्चा बनाने की जुगत में थे शिवपाल को मिला चरखा दांव (Shivpal Singh Yadav Morcha)
शिवपाल सिंह यादव ने पहले घोषणा की थी कि वे एक मोर्चा बनाएंगे। पिछले दिनों सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की प्रेस कांफ्रेंस के बाद सारा मामलो साफ हो गया। मुलायम ने कहा कि वे समाजवादी पार्टी में हैं और रहेंगे। शिवपाल उसी पल से बैक फुट पर चले गए हैं। समाजवादी पार्टी की विरासत सौपने को लेकर पिछले एक साल से चल रही जद्दो जहद अब अपने उतार पर है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने बीते एक साल में कई बार चरखा दांव चला तो इस बार धोबी पाट दांव। इसके बाद से शिवपाल सिंह यादव ने अपने समर्थकों को यह संदेशा ोज दिया है कि वे नेताजी के साथ हैं और आगे भी रहेंगे।
मुलायम को सपा की बागडोर मिलने की संभावना
बदले समीकरणों से इस बात का अंदोशा बढ़ रहा है कि Mulayam Singh Yadav को Akhilesh Yadav सपा की बागडोर फिर सौंप दें। इसी के साथ चाचा शिवपाल भी अपनी जगह पार्टी में तलाश लेंगे। इसके संकेत इस बात से और प्रबल हो जाते हैं जब अखिलेश यादव मुलायम सिंह यादव को न्यौता देने पहुंचे। मुलायम सिंह यादव ने जब अपनी चालें चलीं तो जो पिता पुत्र का विवाद सार्वजनिक रूप से दिखता था, उसमें मोड़ आ गया है। राजनीतिक प्रेक्षकों की नजर अब पांच अक्तूबर को आगरा में होने वाले सपा के राष्ट्रीय स मेलन पर है। इस स मेलन में सपा पांच साल के लिए अध्यक्ष चुनेगी। बदले हुए घटना क्रम में अंदाज लगाया जा रहा है कि सपा अपना अध्यक्ष बदल सकती है और बागडोर पार्टी के संस्थापक मुलायम के हाथों फिर सौंप सकती है और अखिलेश कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पार्टी का संचालन करेंगे।