Shivpal Yadav vs Akhilesh Yadav: सपा पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच रही नाराजगी में शिवपाल कुछ बातें साफ कर दी है। उन्होंने जानिए एक इंटरव्यू में क्या कहा दिया।
सियासत के गलियारों में तो अक्सर कोई न कोई उठा-पटक चलती रहती है। लेकिन इन दिनों सपा पार्टी में चल रही बगावत बड़ा रूप लेती जा रही है। आजम खान से मिलने के बाद शिवपाल द्वारा दिए गए बयानों ने अखिलेश यादव के मुश्किलें बढ़ा ही। यहां तक कि शिवपाल ने नेताजी के खिलाफ भी बोल दिया थी। हालांकि हाल ही में एक इंटरव्यू दौरान शिवपाल यादव ने न केवल चाचा-भतीजों के बीच चल रही नाराजगी बयां की बल्कि पार्टी में घमासान की कहानी को भी बताया। उन्होंने ये भी कहा कि नेताजी से कोई नाराजगी नहीं है। अब आगे सही समय का इंतजार है।
भाजपा में जाने के सवाल पर क्या बोले शिवपाल
शिवपाल यादव का कहना है कि मैंने पार्टी कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि मैं बीजेपी के नेताओं से मिला लेकिन सिर्फ राजनीति पक्ष से। यदि मैं विधान सभा चुनाव के तुरंत बाद न मिलता तो शायद ये मुद्दा न बनता। नेताओं से मिलना ये मेरे व्यक्तिगत और राजनीतिक संबन्ध है। आगे किसी फैसले के लिए सही वक्त का इंजतजार है।
विधान सभा चुनाव में ऐसा क्या हुआ जो दुखी हो गए शिवपाल
बातचीत के दौरान शिवपाल यादव ने कहा कि सपा में अब मुझसे वरिष्ठ नेता कोई नहीं। मैंने अखिलेश यादव से 100 सीटें मांगी लेकिन मना कर दिया। फिर मैंने 35 तब भी नहीं माने तो मैंने कहा कम से कम 25 ही मिलनी चाहिए। लेकिन मुझे एकमात्र मेरी ही सीट मिली। वह टिकट मैंने आदित्य को देना चाहा पर उसने मना कर दिया। इसके बाद सपा विधान मंडल के सदस्यों की चुनाव बैठक में भी मुझे आने से रोक दिया गया। रैलियों में नहीं शामिल किया। मेरे मन में तब भी कोई द्वेष नहीं। सपा में मेरी ही ऐसी सीट रही जहां सबसे अधिक मार्जिन के साथ सपा पार्टी जीती।
अखिलेश से रिश्ते पर क्या बोले चाचा
राजनीति में ऊंची पकड़ रखने वाले रिश्ते में कैसे फेल हो गए। इसके जवाब पर शिवपाल ने कहा कि इस पर कोई बात नहीं करनी। लेकिन आगे कहते हैं कि आखिरी बार मैं अखिलेश यादव से 25 मार्च को मिला था। उस दिन भी अखिलेश से राजनीति के अलावा पारिवारिक रिश्ते को लेकर बात हुई। वहीं, अखिलेश से दोबारा पहले जैसे रिश्ते की सवाल पर शिवपाल कहते है अभी मैं सपा पार्टी का विधायक हूं। अगर दिलों में कुछ बचा तो देखेंगे। इसके अलावा नेताजी से उन्होंने अपने रिश्ते साफ बताए। कहा नेताजी से कोई गिला शिकवा या नाराजगी नहीं है।