लखनऊ

ये पांच कारण जिसकी वजह से अखिलेश यादव ने छोड़ी सांसदी

Akhilesh Yadav resign Lok Sabha अखिलेश यादव की लखनऊ से यारी और दिल्ली से दूरी अचम्भित करती है। वो भी तब जब यूपी में अब पूरे पांच साल तक बाबा का राज होगा। ऐसे में अखिलेश यादव ने लोकसभा की सदस्यता क्यों छोड़ दी, इसका कारण जानने की जब कोशिश की कई तो यह पांच कारण सामने आए

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Mar 22, 2022
ये पांच कारण जिसकी वजह से अखिलेश यादव ने छोड़ी सांसदी

समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। मंगलवार को अखिलेश यादव ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा विधायक दल के नेता के तौर पर अखिलेश यादव अब विपक्ष की कमान संभालते नजर आएंगे। समाजवादी पार्टी के ही एक अन्य लोकसभा सांसद आजम खान ने भी लोकसभा से इस्तीफा दे दिया है। 2019 के लोक सभा चुनाव में अखिलेश यादव आजमगढ़ और आजम खान रामपुर से सांसद चुने गए थे।

संशय खत्म, मामला हुआ साफ

यूपी चुनाव 2022 में अखिलेश यादव ने मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव जीता। और तब से ही संशय हो रहा था कि वह करहल रखेंगे या आजमगढ़। बताया जा रहा है कि, समाजवादी पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के कहने पर अखिलेश यादव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। आज जिस तरह से लोकसभा पहुंचकर लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा है उससे साफ हो गया है कि अब वह प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय रहना चाहते हैं।

अब करहल के विधायक कहलाएंगे अखिलेश

अब यह साफ हो गया है कि समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव करहल से विधायक रहेंगे। 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में करहल से सपा उम्मीदवार के तौर पर अखिलेश यादव, केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार एसपी सिंह बघेल को हरा कर विधायक निर्वाचित हुए।

अखिलेश की राह पर चलें आजम

अखिलेश यादव के साथ ही आजम खां ने भी लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, वह रामपुर सदर सीट से विधायक रहेंगे। आजम खान ने भी अखिलेश यादव के राह पर चलते हुए सांसद की बजाय विधायक रहकर राजनीतिक संघर्ष करने का फैसला किया।

जानें वो पांच वजह जिसके कारण अखिलेश यादव ने छोड़ी आजमगढ की लोकसभा सीट की सांसदी।

- अब लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटेंगे
- यूपी की सियासत से पूरी तरह जुटेंगे
- एक अच्छे और धारदार विपक्ष की भूमिका निभाएंगे
- पार्टी के नट बोल्ट को कसेंगे।
- कार्यकर्ताओं और संगठन में जोश भरेंगे।

Published on:
22 Mar 2022 03:11 pm
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