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Sugarcane Pest Alert: गन्ना किसानों के लिए चेतावनी: चूसक कीटों का बढ़ा खतरा, बचाव के लिए विभाग ने जारी किया अलर्ट

Sugarcane Pest Alert News: उत्तर प्रदेश में बढ़ते तापमान के बीच गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का खतरा बढ़ा, विभाग ने अलर्ट जारी कर किसानों को बचाव और नियंत्रण के जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 05, 2026

चूसक कीटों का बढ़ा खतरा (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

चूसक कीटों का बढ़ा खतरा (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Sugarcane Pest Alert in UP: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गन्ना किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने फसल को कीटों से बचाने के लिए अलर्ट जारी किया है। अपर गन्ना आयुक्त वीके शुक्ला के मुताबिक इस समय चूसक कीटों का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने जरूरी सुझाव दिए हैं।वर्तमान में तापमान अधिक होने के कारण उत्तर प्रदेश में गन्ने के पौध और पेड़ी फसल में चूसक कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने इन चूसक कीटों की पहचान, लक्षण एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में विस्तृत जानकारी किसानों के लिए साझा की है।

बढ़ते तापमान से बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच तापमान में वृद्धि और वातावरण में नमी की कमी चूसक कीटों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है। यही वजह है कि इस समय गन्ने की फसल इन कीटों के हमले के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो गन्ने की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रमुख चूसक कीट और उनकी पहचान

1. काला चिकटा (ब्लैक बग)

काला चिकटा एक प्रमुख चूसक कीट है, जिसका रंग काला होता है। यह मुख्य रूप से पेड़ी फसल में अधिक दिखाई देता है।

  • प्रभावित पत्तियां पीली पड़ जाती हैं
  • पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं
  • कीट पत्तियों और गन्ने के गोंफ के बीच छिपकर रस चूसते हैं
  • पौधों की वृद्धि रुक जाती है

यह कीट गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है।

2. थ्रिप्स कीट

थ्रिप्स आकार में बहुत छोटे (2-3 मिमी) होते हैं, लेकिन इनका प्रभाव काफी गंभीर होता है।

  • मादा गहरे भूरे रंग की और नर हल्के रंग के होते हैं
  • ये पत्तियों की ऊपरी सतह के अंदर अंडे देते हैं
  • निम्फ निकलकर पत्तियों का रस चूसते हैं
  • पत्तियों का अग्रभाग मुड़कर नुकीला हो जाता है
  • पत्तियां ऊपर से नीचे की ओर पीली या सफेद पड़ने लगती हैं

हालांकि, बारिश शुरू होने पर इनकी संख्या में कमी आने लगती है।

3. सैनिक कीट (पत्ती खाने वाला कीट)

यह कीट सूंडी अवस्था में गन्ने की पत्तियों को कुतरकर खाता है।

  • मादा कीट समूह में अंडे देती है
  • पेड़ी फसल में इसका प्रकोप अधिक होता है
  • पत्तियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है।

फसल पर प्रभाव

इन कीटों के कारण गन्ने की फसल पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं:

  • पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है
  • पत्तियां पीली और कमजोर हो जाती हैं
  • प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है
  • गन्ने की मिठास और वजन में कमी आती है
  • कुल उत्पादन में गिरावट होती है
  • बचाव और नियंत्रण के उपाय

गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर इन कीटों के प्रभाव को कम किया जा सकता है:

  • 1. नियमित सिंचाई
  • खेत में नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर सिंचाई करें। शुष्क वातावरण कीटों के प्रसार को बढ़ावा देता है, इसलिए नमी बनाए रखना जरूरी है।
  • 2. खेत की साफ-सफाई
  • खरपतवार और सूखी पत्तियों को हटाते रहें। यह कीटों के छिपने और पनपने के लिए अनुकूल स्थान बनाते हैं।
  • 3. संतुलित उर्वरक का प्रयोग
  • फसल की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरक का उपयोग करें। कमजोर पौधे कीटों के हमले के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • 4. रासायनिक नियंत्रण

विशेषज्ञों ने कीट नियंत्रण के लिए कुछ रसायनों के उपयोग की भी सलाह दी है:

  • प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेन्थिन 4% ईसी (750 मिली प्रति हेक्टेयर)
  • या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल (200 मिली प्रति हेक्टेयर)

इन दवाओं को 625 लीटर पानी में घोलकर सुबह या शाम के समय छिड़काव करना चाहिए।

किसानों के लिए सलाह

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करें और जैसे ही कीटों के लक्षण दिखाई दें, तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं। देरी करने पर नुकसान बढ़ सकता है।

सरकार की पहल

उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और फसल को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दे रहा है।