17 नवंबर तक अयोध्या मामले पर संभावित फैसले के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है...
अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की बहस खत्म हो गई है। 17 नवंबर तक मामले पर संभावित फैसला आ सकता है। इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है। रामनगरी में 10 दिसंबर तक धारा 144 पहले से ही लागू है। भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं। इस बीच बुधवार को राज्य सरकार ने सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां 30 नवंबर तक के लिए रद्द कर दी हैं। शासन का कहना है कि अति विशेष परिस्थिति को छोड़कर किसी भी प्रकार का अवकाश स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सभी अधिकारियों को अपने-अपने मुख्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश भी दिये गए हैं। छुट्टियां रद्द करने के संदर्भ में शासन का कहना है कि आगामी त्योहारों के मद्देजनर ऐसा किया गया है। वर्तमान में अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था बनाये रखने के लिए कम से कम 15 पीएसी बल और चार कंपनी से ज्यादा अर्धसैनिक बल तैनात हैं। जरूरत पड़ी तो इनकी संख्या और बढ़ाई जा सकती है। अयोध्या और आसपास के सभी जिलों के प्राथमिक स्कूलों के एक कमरे को सुरक्षाबलों के लिए पहले ही रिजर्व रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले योगी सरकार प्रदेश में खासकर अयोध्या में सुरक्षा-व्यवस्था चुस्त कर लेना चाह रही है। निषेधाज्ञा लागू किए जाने के बाद अयोध्या में अतिरिक्त पुलिस व पीएसी बल भी तैनात किया जा रहा है। अयोध्या व आसपास के जिलों की सीमाओं पर पहरा कड़ा किया जा रहा रहा है। डीजीपी मुख्यालय स्तर से अयोध्या में सात एएसपी, 20 सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 70 उपनिरीक्षक व 500 सिपाही भेजे जाने का निर्देश दिया गया है। सात कंपनी अतिरिक्त पीएसी भेजने का आदेश भी दिया गया है। वर्तमान में अयोध्या में करीब चार कंपनी अर्द्धसैनिक बल व 15 कंपनी पीएसी तैनात है। बताया गया कि डीजीपी मुख्यालय से अयोध्या में अतिरिक्त पुलिस की तैनाती की मांग की गई है। अयोध्या में जिला प्रशासन भी अतिरिक्त सुरक्षा बरत रहा है।
अफसरों को दिये सख्त निर्देश
बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पांच कालिदास मार्ग पर पुलिस के नोडल अधिकारियों की बैठक भी बुलाई थी। बैठक में डीजीपी ओपी सिंह, मुख्य सचिव आरके तिवारी और अपर मुख्य सचिव अवस्थी सहित पुलिस विभाग के कई अधिकारी मौजूद थे। मीटिंग में अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी सूरत में प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर आंच नहीं आनी चाहिए।