UP Political Storm: लखनऊ के ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम में निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के विवादित बयान से हंगामा मच गया। आयोजकों ने भाषण रोका तो समर्थकों ने नारेबाजी कर माहौल गर्मा दिया।
ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम 2026 : लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम उस समय विवादों के केंद्र में आ गया, जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के भाषण ने कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। सामाजिक मुद्दों पर आयोजित इस सम्मेलन में उनके तीखे राजनीतिक और वैचारिक बयान के बाद हंगामा, नारेबाजी और तीखी बहस देखने को मिली। कुछ समय के लिए कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया और आयोजकों को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध वर्ग को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित इस समागम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के मुद्दों पर चर्चा और संवाद बताया गया था, लेकिन मंच पर पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री के भाषण ने कार्यक्रम की दिशा बदल दी।
अपने संबोधन के दौरान अग्निहोत्री ने भारतीय राजनीति, सनातन परंपरा और सामाजिक विमर्श से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने भाजपा सरकार पर टिप्पणी करते हुए उसे “गैर-सनातनी” बताया और अपने तर्क के समर्थन में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिज्ञाओं का उल्लेख किया।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने बौद्ध धम्म ग्रहण करते समय ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित कई देवी-देवताओं को न मानने की शपथ ली थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति आंबेडकर के विचारों को पूरी तरह स्वीकार करता है, तो वह स्वयं को सनातन परंपरा का अनुयायी कैसे बता सकता है।
उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी सनातन परंपरा में विश्वास रखती है और लोगों को आंबेडकर की प्रतिज्ञाओं को पढ़कर समझने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद सभा में बैठे लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
अपने भाषण में अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट का भी उल्लेख किया और सामाजिक न्याय तथा कानूनों के उपयोग को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान कुछ लोग उनके समर्थन में दिखाई दिए, जबकि कई लोग असहज नजर आए। धीरे-धीरे सभागार का माहौल गर्म होने लगा। सभा में मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी। आयोजकों को आशंका हुई कि कार्यक्रम का मूल उद्देश्य भटक रहा है और मंच राजनीतिक विवाद का केंद्र बन सकता है।
स्थिति बिगड़ती देख आयोजकों में से एक वरिष्ठ पदाधिकारी मंच पर पहुंचे और अलंकार अग्निहोत्री से अनुरोध किया कि वे सरकारी नीतियों या राजनीतिक विवादों की बजाय समाज से जुड़े विषयों पर ही बोलें। उन्हें संकेत दिया गया कि कार्यक्रम का स्वरूप सामाजिक है और इसे विवाद से बचाया जाना चाहिए। मंच पर हुई इस बातचीत को देखकर हॉल में बैठे लोगों की प्रतिक्रिया तेज हो गई। कुछ लोग आयोजकों के समर्थन में थे, जबकि बड़ी संख्या में उपस्थित लोग अग्निहोत्री के समर्थन में खड़े नजर आए।
जैसे ही आयोजकों ने उन्हें सीमित विषयों पर बोलने की सलाह दी, सभागार में अचानक शोर-शराबा शुरू हो गया। दर्शकों की ओर से “अलंकार जिंदाबाद” के नारे लगने लगे। कई लोग अपनी सीटों से खड़े होकर समर्थन जताने लगे।
कुछ देर के लिए कार्यक्रम पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। सुरक्षाकर्मियों और आयोजकों को स्थिति सामान्य करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि अग्निहोत्री पूरे समय मुस्कुराते रहे और शांत भाव से प्रतिक्रिया देते दिखाई दिए।
बढ़ते विवाद को देखते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने अपना भाषण बीच में ही रोक दिया। उन्होंने हाथ उठाकर उपस्थित लोगों का अभिवादन किया और मंच पर बैठ गए। लेकिन दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। बताया जाता है कि कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से फरसा भी हाथ में लहराया, जिसे समर्थकों ने उत्साह के रूप में देखा। इसके बाद सभागार में मौजूद कई लोग उनके समर्थन में आगे बढ़ते नजर आए।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना था कि अग्निहोत्री की लोकप्रियता विशेष रूप से युवाओं और ब्राह्मण समाज के एक वर्ग में काफी अधिक है। उनके मंच से हटने के बाद बड़ी संख्या में लोग सभागार से बाहर निकलते दिखाई दिए, जिससे कार्यक्रम का माहौल प्रभावित हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल एक भाषण का विवाद नहीं, बल्कि प्रदेश की बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी हो सकती है। सामाजिक मंचों पर राजनीतिक विमर्श का बढ़ता प्रभाव अब खुलकर सामने आने लगा है।
ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम का आयोजन समाज को जोड़ने और बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। विभिन्न दलों के नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि आयोजन को गैर-राजनीतिक स्वरूप देने की कोशिश की गई थी। लेकिन मंच से दिए गए बयानों ने कार्यक्रम को वैचारिक बहस और राजनीतिक चर्चा में बदल दिया। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, तो कुछ ने सामाजिक कार्यक्रम के राजनीतिकरण पर चिंता जताई।
घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। आयोजकों और प्रशासनिक टीम ने मिलकर माहौल को शांत करने की कोशिश की। कुछ समय बाद कार्यक्रम फिर से शुरू किया गया और अन्य वक्ताओं ने समाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखे। हालांकि विवाद की चर्चा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी जारी रही। सोशल मीडिया पर भी घटना के वीडियो और बयान तेजी से वायरल होने लगे।
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