
ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम में दिनेश शर्मा के खिलाफ नारेबाजी, भाषण बीच में रोका गया (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Political Drama in Lucknow: राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित सभागार इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ब्राह्मण प्रबुद्ध समागम उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा सांसद दिनेश शर्मा के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। मंच पर मौजूद राजनीतिक दिग्गजों के बीच अचानक पैदा हुए इस विरोध ने पूरे आयोजन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण बना दिया।
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों की ओर से आयोजित इस प्रबुद्ध समागम का उद्देश्य समाज के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा और राजनीतिक संवाद स्थापित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
बताया गया कि जैसे ही दिनेश शर्मा मंच पर संबोधन देने पहुंचे, श्रोताओं के एक वर्ग ने उनसे यूजीसी (UGC) से जुड़े विवादित मुद्दे पर स्पष्ट बयान देने की मांग शुरू कर दी। आरोप था कि उन्होंने इस विषय पर पहले सार्वजनिक रूप से कोई ठोस रुख नहीं लिया।
शर्मा ने अपना भाषण शुरू ही किया था कि कुछ ही क्षणों में हूटिंग और नारेबाजी तेज हो गई। माहौल इतना शोरगुल भरा हो गया कि वे लगभग एक मिनट ही बोल सके। स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने अपना संबोधन बीच में ही रोक दिया और मंच पर वापस बैठ गए।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत यह रही कि अलग-अलग विचारधाराओं वाले दलों के नेता एक ही मंच पर दिखाई दिए। मंच पर पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों के बीच सामाजिक आधार को मजबूत करने के उद्देश्य से ऐसे मंचों की अहमियत बढ़ गई है। हालांकि कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य सामाजिक संवाद था, लेकिन राजनीतिक संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
सभा में वक्ताओं ने शिक्षा, प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक नियुक्तियों और सामाजिक सम्मान जैसे कई मुद्दों को उठाया। यूजीसी से जुड़े निर्णयों और शैक्षणिक नीतियों पर ब्राह्मण समाज की चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा गया। कुछ वक्ताओं ने आरोप लगाया कि समाज से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों की ओर से स्पष्ट नीति नहीं दिखाई देती। इसी असंतोष का असर दिनेश शर्मा के संबोधन के दौरान देखने को मिला।आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का मकसद किसी दल का विरोध नहीं बल्कि समाज की समस्याओं को राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचाना था। लेकिन भावनात्मक माहौल के कारण विरोध प्रदर्शन अचानक तेज हो गया।
कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें “संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक” बताते हुए सम्मान प्रदान किया। उनके सम्मान को लेकर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। इससे कार्यक्रम में मौजूद भीड़ का उत्साह भी बढ़ा और सामाजिक एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की गई।
चूंकि कार्यक्रम में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता शामिल थे, इसलिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम स्थल पर पहले से तैनात थीं। हालांकि नारेबाजी के दौरान माहौल कुछ समय के लिए गर्म हो गया, लेकिन किसी तरह की हिंसक घटना नहीं हुई। आयोजकों और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और कार्यक्रम आगे जारी रखा गया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि बदलते सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी है। ब्राह्मण समाज लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति निर्धारण में अपनी भूमिका को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहा है।
एक ही मंच पर भाजपा और कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी यह भी दर्शाती है कि सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों की संख्या और महत्व दोनों बढ़ सकते हैं।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि सभा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और संवाद कायम करना था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति भी अभिव्यक्ति का हिस्सा है और सभी नेताओं का सम्मान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नारेबाजी किसी व्यक्तिगत विरोध के बजाय मुद्दों पर नाराजगी का परिणाम थी।
Published on:
01 Mar 2026 04:15 am
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