उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूजा पाल के बयान और निष्कासन के बाद हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने उन्हें क्रॉस वोटिंग और सरकार की तारीफ के चलते बाहर कर दिया।
UP Politics: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बाद राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल की तारीफ वाली प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद देते हुए कहा कि मोदी जी ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को अधिकार देने का प्रयास किया। संसद में महिलाओं के हक के लिए बिल लाने का काम किया।
कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल को हाल ही में समाजवादी पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने और योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ करने के कारण यह कार्रवाई हुई। अब चर्चा जोरों पर है कि पूजा पाल जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकती हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा पूजा पाल को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में शामिल कर सकती है। पूजा पाल की एंट्री भाजपा के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। वे इलाहाबाद पश्चिम (प्रयागराज) की पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी हैं। राजू पाल की 2004 में चुनाव जीतने के कुछ दिनों बाद ही दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पूजा पाल इस पूरे मामले में माफिया और अपराध के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखती रही हैं। भाजपा पूजा पाल के जरिए यूपी में "माफिया बनाम कानून व्यवस्था" का मजबूत नैरेटिव चला सकती है। उनकी कहानी भाजपा को महिलाओं के मुद्दे, कानून व्यवस्था और पूर्वांचल-बुंदेलखंड क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका देगी।
पूजा पाल की भाजपा में एंट्री से यूपी की सियासी तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है। सपा के लिए यह एक बड़ा झटका होगा क्योंकि पूजा पाल यादव-ब्राह्मण समीकरण और महिला वोटरों को प्रभावित कर सकती हैं। भाजपा को महिला चेहरे के रूप में एक नई ताकत मिलेगी, खासकर 2027 चुनाव में महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर। प्रयागराज और आसपास के इलाकों में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
अभी यह साफ नहीं है कि पूजा पाल कब आधिकारिक रूप से भाजपा जॉइन करेंगी, लेकिन संकेत साफ हैं। अगर वे भाजपा में शामिल होती हैं, तो 2027 के चुनाव में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। पूजा पाल की यात्रा अब सपा से भाजपा की ओर मुड़ चुकी है। उनकी एंट्री न सिर्फ सपा को कमजोर करेगी, बल्कि भाजपा को यूपी की सियासत में नया आयाम देने वाली साबित हो सकती है।