समाजवादी पार्टी ने फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
UP Politics: सपा ने फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मिणी देवी निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसकी घोषणा बुधवार को सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने की। 67 साल की रुक्मिणी देवी की नियुक्ति सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रजामंदी के बाद हुई है। उन्हें रूबी श्रीवास्तव की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है। रुक्मिणी मूल रूप से जालौन जिले की रहने वाली हैं।
रुक्मिणी देवी फूलन देवी की बड़ी बहन हैं। फूलन देवी यूपी की चर्चित नेता रही हैं, जिन्हें पहले "बैंडिट क्वीन" कहा जाता था और बाद में वे समाजवादी पार्टी से सांसद भी बनीं। रुक्मिणी देवी जालौन के शेखपुर गुड्ढा, पुरवा गांव की निवासी हैं। वे लंबे समय से सामाजिक कामों में सक्रिय रही हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने डिंपल यादव के लिए प्रचार भी किया था। उनकी उम्र 67 साल है और वे निषाद समुदाय से आती हैं। पार्टी ने उनकी जमीनी पकड़ और अनुभव को देखते हुए यह फैसला लिया है।
यह नियुक्ति सिर्फ महिला सभा का सामान्य बदलाव नहीं लगती। माना जा रहा है कि यह सपा की PDA रणनीति (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) का हिस्सा है। सपा निषाद-मल्लाह समुदाय के वोटों को अपनी तरफ खींचना चाहती है। यूपी में निषाद समुदाय काफी बड़ी पिछड़ी जाति है। खासकर पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में इनका अच्छा प्रभाव है। अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस समुदाय को मजबूती से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। निषाद समुदाय मुख्य रूप से नदी-नालों से जुड़ा हुआ है। मछली पकड़ना, नाव चलाना इनके पारंपरिक काम हैं। इस समुदाय में कई उपजातियां हैं जैसे मल्लाह, केवट, बिंद आदि। सपा इन वोटों को NDA से अलग करके अपने PDA फॉर्मूले में शामिल करना चाहती है।
संजय निषाद निषाद पार्टी के अध्यक्ष हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। वे BJP के साथ गठबंधन में हैं। संजय निषाद लंबे समय से अपनी समुदाय के लिए SC दर्जे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर BJP इस मांग को पूरा नहीं करती तो 2027 में गठबंधन पर दोबारा विचार करेंगे। अब सपा ने फूलन देवी की बहन को आगे करके निषाद समुदाय में सेंध लगाने की कोशिश शुरू कर दी है। फूलन देवी का नाम इस समुदाय में बहुत सम्मान का है। उनकी बहन को महिला सभा का अध्यक्ष बनाकर सपा महिलाओं और निषाद वोटरों दोनों को साधने का दांव खेल रही है।
एक्सपर्ट इसे संजय निषाद के लिए चुनौती मान रहे हैं। सपा का मानना है कि रुक्मिणी देवी की नियुक्ति से निषाद समाज में भावनात्मक जुड़ाव बनेगा। फूलन देवी की विरासत का इस्तेमाल करके सपा संजय निषाद की पकड़ को कमजोर करने की कोशिश कर सकती है। रुक्मिणी देवी पूरे प्रदेश में महिला संगठन को मजबूत करेंगी और महिलाओं की समस्याओं को उठाएंगी। इससे पार्टी की जमीनी तैयारियां भी बढ़ेंगी।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव काफी सक्रिय हैं। PDA फॉर्मूला उनके लिए मुख्य हथियार है। निषाद जैसे पिछड़े समुदायों को जोड़कर वे BJP-NDA के गठबंधन को तोड़ना चाहते हैं। संजय निषाद की पार्टी अभी BJP के साथ है, लेकिन SC दर्जे की मांग अधर में लटकी हुई है। इस बीच सपा रुक्मिणी देवी जैसे चेहरों के जरिए सीधे समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। अगर यह रणनीति कामयाब हुई तो पूर्वांचल और अवध में सपा को फायदा हो सकता है। निषाद समुदाय यूपी की करीब 150 विधानसभा सीटों पर प्रभाव डाल सकता है।
रुक्मिणी देवी की यह जिम्मेदारी महिला सशक्तिकरण और जातीय समीकरण दोनों को साथ ले जाने का प्रयास लगता है। अब देखना होगा कि यह दांव कितना असरदार साबित होता है। रुक्मिणी देवी पर दांव खेलकर सपा की कोशिश है कि 2027 में निषाद वोट बैंक को मजबूती से अपने साथ जोड़ा जाए।