क्रिकेट बुकी के लिए सट्टेबाजी करवाता था यह सिपाही, UP STF ने पकड़ा

यूपी पुलिस को वर्दीधारी लगातार दागदार बना रहे हैं कोई असलहों की तस्करी करवाता चुका है तो कईयों पर इश्क का बुखार चढ़ चुका है।
2 min read
• •
Updated: 24 Sep 2016, 9:55 AM IST
UP STF and Mahanagar Police Arrested Constable
UP STF and Mahanagar Police Arrested Constable
लखनऊ. भले कुछ सिपाही यूपी पुलिस का मान बढ़ा रहे हों लेकिन कुछ दागी विभाग की लुटिया डुबो रहे हैं। ताजा मामला महानगर इलाके का है जहां से यूपी एसटीएफ ने पुलिस की मदद से एक सिपाही को गिरफ्तार किया है जो क्रिकेट के बुकी के लिए सट्टेबाजी करवाता था। साथ ही साथी सिपाही की मदद से अपराधियों को पुलिस व एसटीएफ की जानकारी मुहैया करा रहा था। इतना ही नहीं यह सिपाही, सोना लूटकांड में भी जेल जा चुका है, एसटीएफ ने महानगर पुलिस की मदद से उसे एक अपार्टमेंट से दो साथियों के साथ सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसका साथ देने वाले सिपाही पर कार्रवाई के लिए संबंधित जिले के कप्तान को पत्र भेज दिया है। यूपी पुलिस को वर्दीधारी लगातार दागदार बना रहे हैं कोई असलहों की तस्करी करवाता चुका है तो कईयों पर इश्क का बुखार चढ़ चुका है।

पुलिस के मुताबिक, डीजीपी जावीद अहमद को शिकायत मिली थी कि लखनऊ पुलिस लाइंस में तैनात कॉन्स्टेबल सुशील पचौरी बड़े स्तर पर अपराधी गिरोहों को पुलिस ऑपरेशन की सूचनाएं लीक कर रहा है। जिला पुलिस और एसटीएफ में लंबे समय तक तैनात रह चुके सुशील के दोनों जगह कई करीबी हैं। ऐसे में डीजीपी ने उस पर नजर रखने और गिरफ्तारी के लिए एटीएस को जिम्मेदारी सौंपी। एटीएस ने निगरानी के दौरान शिकायतों को सही पाया।

देर रात एटीएस और महानगर की टीम ने फिरोजाबाद के नसीरपुर निवासी सुशील पचौरी, फैजाबाद के रौनाही निवासी बृजेश सिंह और रामपुर के पटवायी निवासी हरिशंकर प्रसाद को महानगर स्थित पार्क व्यू अपार्टमेन्ट के फ्लैट नं0 104 से गिरफ्तार कर लिया। सुशील और उसके साथी लंबे समय से फ्लैट का इस्तेमाल सट्टा लगाने और जुआघर के रूप में कर रहे थे। आरोपितों के पास से एक लाख रुपये, लैपटॉप, 6 मोबाइल फोन समेत अन्य सामान बरामद हुआ है।

सोना लूट में हुआ था बर्खास्त
सुशील पचौरी वर्ष 2006 में एसटीएफ में तैनात था। उस दौरान सुशील पर कॉन्स्टेबल आलोक सिंह समेत पांच के साथ सोना लूटने का आरोप लगा था। इस मामले में गिरफ्तारी और बर्खास्तगी भी हुई। वर्ष 2010 में हाई कोर्ट के आदेश पर महकमे में वापस ले लिया गया। वर्ष 2016 तक वाणिज्य कर विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहा। जून 2016 में लखनऊ पुलिस में तैनाती हुई थी। वहीं, गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है।

पूरे सिस्टम में गहरी पैठ
सुशील की पुलिस के पूरे सिस्टम में गहरी पैठ है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोना लूट में बर्खास्तगी और गिरफ्तारी के बाद बहाली होने पर वाणिज्यकर जैसी मलाईदार विभाग में भेज दिया गया। इसके बाद जब लखनऊ पुलिस लाइसं में तैनाती के बाद एक बार भी कहीं ड्यूटी नहीं लगाई गई।

अपराधियों को महत्वपूर्ण सूचनाएं करवाता था मुहैया
सुशील लगातार अपराधियों को महत्वपूर्ण सूचनाएं मुहैया करवा रहा था। कई अपराधी उसके संपर्क में थे, जो अपने विरोधियों के टॉप फाइव कॉलर की डिटेल लेते थे। पुलिस महकमे में तैनात एक सिपाही की मदद से सुशील जानकारी निकलवाता था। एटीएस ने मदद करने वाले सिपाही के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर संबंधित अधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है। इससे पहले कानपुर में आईजी कार्यालय में तैनात एक सिपाही को कॉल डिटेल बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद से कॉल डिटेल को लेकर प्रक्रिया सख्त कर दी गई थी। इसके बाद भी सुशील पहुंच के जरिए कॉल डिटेल लीक कर रहा था।
Published on:
Also Read
View All
NZ vs IND: वनडे क्रिकेट में भारत का दबदबा या न्यूजीलैंड का जलवा? जानें किसका रिकॉर्ड है बेहतर

महाराष्ट्र में उठेगा सियासी तूफान? रोहित पवार का दावा- स्टिंग ऑपरेशन में घोटाला बेनकाब, बड़े मंत्री को देना पड़ेगा इस्तीफा

Indian Air Force Land Dispute: दिल्ली में वायुसेना की 40 एकड़ जमीन पर खींचतान, रिटायरमेंट से पहले पूर्व एयर चीफ ने राजनाथ सिंह को लिखी चिट्ठी

छत्तीसगढ़ में अगले कुछ घंटों में बिगड़ेगा मौसम, इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी, कई इलाकों में बिजली गिरने और तेज हवाओं की संभावना

राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बड़े बदलाव, ‘सस्ते मकानों’ के नियम का नया ड्राफ्ट जारी, जानिए EWS-LIG आवास की ख़ास शर्तें