लखनऊ

UPPSC Success Story: अभ्युदय योजना से सोनम बनीं SDM, ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

UPPSC Success Story 2026: अयोध्या की सोनम यादव ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का लाभ लेकर यूपीपीसीएस-2024 में एसडीएम पद हासिल किया। उनकी सफलता ग्रामीण बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनी है।
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Sep 11, 2026
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से मिली दिशा, यूपीपीसीएस-2024 में एसडीएम पद पर चयन के बाद लखनऊ में ले रहीं प्रशासनिक प्रशिक्षण (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से मिली दिशा, यूपीपीसीएस-2024 में एसडीएम पद पर चयन के बाद लखनऊ में ले रहीं प्रशासनिक प्रशिक्षण (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UPPSC Success Story Sonam Yadav: आर्थिक संसाधनों की कमी किसी युवा के सपनों के रास्ते में स्थायी बाधा नहीं बन सकती, यदि उसे सही दिशा, बेहतर मार्गदर्शन और आगे बढ़ने का अवसर मिले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से लाभान्वित होकर सफलता हासिल करने वाली अयोध्या की सोनम यादव इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। सीमित संसाधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाली सोनम ने अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर UPPCS-2024 में उप जिलाधिकारी (SDM) पद पर चयन हासिल किया है। आज वह न केवल अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि प्रदेश की हजारों छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए उम्मीद की नई तस्वीर बन गई हैं।

वर्तमान में सोनम यादव राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। जिस लक्ष्य को लेकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की थी, वह अब जिम्मेदारी में बदल चुका है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था की बारीकियों से रूबरू कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में वह आम जनता की समस्याओं को समझते हुए प्रभावी और संवेदनशील तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

अयोध्या की सोनम यादव ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का लाभ लेकर हासिल की प्रशासनिक सेवा में सफलता (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )    

अयोध्या के गांव से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

सोनम यादव मूल रूप से अयोध्या जिले के मवई ब्लाक क्षेत्र स्थित हारिका पांडे का पुरवा, गड़ौरा गांव की रहने वाली हैं। ग्रामीण परिवेश से निकलकर प्रदेश की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में स्थान हासिल करना उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि तो है ही, साथ ही उन युवाओं के लिए भी संदेश है जो छोटे शहरों और गांवों में रहकर बड़े सपने देखते हैं।

सोनम की सफलता यह बताती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संस्थान की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है सही दिशा में निरंतर प्रयास करने की। प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन तैयारी के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से मार्गदर्शन और अध्ययन का बेहतर वातावरण मिला। इसी ने उनकी तैयारी को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अभ्युदय योजना ने तैयारी को दी नई दिशा

सोनम यादव के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में केवल मेहनत करना पर्याप्त नहीं होता। मेहनत को सही दिशा देने के लिए बेहतर मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री और अनुभवी विशेषज्ञों की सलाह भी जरूरी होती है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से उन्हें इन्हीं पहलुओं का लाभ मिला।

योजना के तहत मिले गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और विषय विशेषज्ञों से सीखने के अवसर ने उनकी तैयारी को मजबूत किया। नियमित अध्ययन, अभ्यास और अपनी कमियों को पहचान कर उनमें सुधार करने की प्रक्रिया ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। सोनम का मानना है कि यदि किसी विद्यार्थी को अपनी तैयारी के दौरान सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वह सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन से कठिन प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

मेहनत के साथ जरूरी है सही रणनीति

प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर यह होती है कि तैयारी की शुरुआत कहां से की जाए और किस दिशा में आगे बढ़ा जाए। सोनम के अनुभव में भी सही रणनीति की अहम भूमिका रही। उनका मानना है कि परीक्षा की तैयारी को लंबे समय तक जारी रखने के लिए लक्ष्य को छोटे-छोटे चरणों में बांटकर आगे बढ़ना चाहिए।

वह विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास बनाए रखने की सलाह देती हैं। उनके मुताबिक किसी एक परीक्षा में असफलता को अंतिम परिणाम नहीं मानना चाहिए। असफलता से सीख लेकर तैयारी में बदलाव करना और लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता तैयार करता है।

ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं उम्मीद

सोनम यादव की सफलता का सबसे प्रेरक पक्ष यह है कि वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली उन बेटियों के लिए उदाहरण बनी हैं, जिन्हें कई बार संसाधनों और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सोनम का कहना है कि बेटियों को अपने सपनों को लेकर किसी तरह का संकोच नहीं करना चाहिए। उन्हें शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। परिवार और समाज का सहयोग मिलने के साथ-साथ स्वयं पर विश्वास रखना भी जरूरी है। उनका मानना है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के सामने अवसरों की कमी पहले जैसी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन अवसरों को पहचानकर उनका सही इस्तेमाल करने की है।

एसडीएम बनकर बढ़ी जिम्मेदारी

यूपीपीसीएस-2024 में एसडीएम पद पर चयन के बाद सोनम के जीवन में अब एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद अब प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लखनऊ स्थित अकादमी में चल रहे प्रशिक्षण में प्रशासनिक प्रक्रियाओं, कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम जनता के साथ संवाद जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रशासनिक नियमों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि अधिकारियों में जनसेवा की भावना, संवेदनशीलता और निर्णय लेने की क्षमता को भी विकसित करना है। सोनम के लिए यह चरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी से आगे बढ़कर उन्हें वास्तविक प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करने की तैयारी करनी है।

जन केंद्रित प्रशासन को मानती हैं प्राथमिकता

सोनम यादव का कहना है कि प्रशासनिक सेवा में चयन के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। एक अधिकारी के निर्णय का सीधा प्रभाव आम नागरिक के जीवन पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी के लिए संवेदनशीलता, पारदर्शिता और लोगों की समस्याओं को सुनने की क्षमता बेहद जरूरी है। उनकी प्राथमिकता भविष्य में ऐसा प्रशासन सुनिश्चित करने की है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। उनका मानना है कि किसी भी सरकारी योजना की वास्तविक सफलता तभी मानी जा सकती है, जब उसका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।

सरकारी योजनाएं बन रही हैं अवसर का माध्यम

सोनम यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की युवा और छात्राओं से जुड़ी योजनाओं को अवसरों की समानता की दिशा में महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर या सीमित संसाधनों वाले परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान नहीं होती। ऐसे में मार्गदर्शन और अध्ययन संसाधन उपलब्ध कराने वाली योजनाएं उनकी राह आसान कर सकती हैं।उनके अनुसार प्रतिभा और मेहनत किसी भी विद्यार्थी की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन सही अवसर मिलने पर वही प्रतिभा सफलता में बदलती है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने उन्हें इसी दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया और उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।

युवाओं को सोनम का संदेश-परिस्थितियों को सपनों की सीमा न बनाएं

सोनम यादव की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि परिस्थितियां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं। मंजिल तक पहुंचने के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास की जरूरत होती है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपनी तैयारी के दौरान धैर्य बनाए रखना चाहिए और किसी भी कठिनाई से घबराना नहीं चाहिए। वह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और बेटियों से अपील करती हैं कि वे बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करें। यदि संसाधन सीमित हैं तो उपलब्ध साधनों का बेहतर उपयोग किया जाए। सही दिशा में की गई मेहनत धीरे-धीरे सफलता का रास्ता खोलती है।

एक सफलता, हजारों सपनों की ताकत

सोनम यादव की कहानी केवल यूपीपीसीएस परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी भी है कि सही अवसर मिलने पर छोटे गांवों और सीमित संसाधनों वाले परिवारों से निकलने वाले युवा भी बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं। अयोध्या के एक गांव से निकलकर एसडीएम पद तक पहुंचीं सोनम आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं जो सरकारी सेवा में जाने का सपना देख रहे हैं।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से मिली दिशा, अपनी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर सोनम ने यह साबित किया है कि प्रतिभा को अगर सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो सफलता की दूरी कम की जा सकती है। आज लखनऊ में प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं सोनम के सामने नई जिम्मेदारियां हैं और नई उम्मीदें भी। उनकी कहानी प्रदेश की बेटियों और युवाओं को यही संदेश देती है कि सपने बड़े हों, मेहनत लगातार हो और खुद पर विश्वास कायम रहे तो मंजिल हासिल करना संभव है।