लखनऊ

Uttar Pradesh Assembly Hungama: यूपी विधानसभा में सपा का जोरदार हंगामा, डिप्टी सीएम के बयान पर भड़के विधायक

Uttar Pradesh Assembly 2025 : उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी (सपा) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा के दौरान विवादित टिप्पणियों से माहौल गरमा गया, जिससे सपा विधायक अतुल प्रधान को सदन से निष्कासित करना पड़ा।

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Feb 24, 2025
विधानसभा में सपा का हंगामा: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान पर तीखी नोकझोंक

Uttar Pradesh Assembly: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी (सपा) विधायकों के बीच तीखी बहस हुई। सपा विधायक अतुल प्रधान के सवालों पर डिप्टी सीएम की विवादित टिप्पणियों ने सदन का माहौल गरमा दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा के दौरान विवाद

सत्र के तीसरे दिन, सपा विधायक अतुल प्रधान ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन सुविधाओं की कमी और गंभीर मरीजों के इलाज में हो रही समस्याओं को उठाया। इसके जवाब में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, "प्राथमिक अस्पतालों में इमरजेंसी की सुविधा नहीं होती है। आप गंभीर मरीज ले जाकर मरीज को मारना चाहते हैं। जनता को गुमराह कर रहे हैं, सदन को गुमराह कर रहे हैं।"

सदन में बढ़ता तनाव

डिप्टी सीएम की इस टिप्पणी पर सपा विधायक अतुल प्रधान ने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति छुपा रही है। इस पर डिप्टी सीएम ने पलटवार करते हुए कहा, "सपा के लोग चिट्ठी पर आंख बंद कर साइन करते हैं। ये गले की खराश मिटाने आते हैं, इनके लिए डिस्पेंसरी में विक्स की गोली रख देंगे।"

अतुल प्रधान का निष्कासन

बढ़ते तनाव को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सपा विधायकों से शांत रहने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। अंततः अध्यक्ष ने सपा विधायक अतुल प्रधान को पूरे सत्र के लिए सदन से निष्कासित करने का आदेश दिया। मार्शल ने उन्हें सदन से बाहर निकाला।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

सपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने डिप्टी सीएम की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "नेता जी (मुलायम सिंह यादव) सम्मानित व्यक्ति रहे हैं। उनके लिए इस तरह की बात नहीं की जानी चाहिए। मंत्री जी ने जानबूझकर ऐसा बोला कि विवाद हो जाए।"

सत्ता पक्ष का पक्ष

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सदन में किसी का नाम नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, "मुलायम सिंह सबके आदरणीय नेता हैं। किसी का नाम नहीं लिया गया है।"

इस घटना ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को उजागर किया है। स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर इस तरह की नोकझोंक से जनता के समक्ष नकारात्मक संदेश जाता है। आवश्यक है कि जनप्रतिनिधि संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करें और समाधान निकालें, ताकि प्रदेश की जनता का विश्वास बना रहे।

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