उत्तर प्रदेश सहित पूरे देशभर में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में हर नागरिक को अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
लखनऊ. अगर आप राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के बारे में जानना चाहते हैं कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) क्या है तो इसके बारे में यहां आपको पूरी जानकारी दी जा रही है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देशभर में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में हर नागरिक को अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। बता दें कि नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने भी 2021 की जनगणना और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर को अपडेट करने के लिए मंजूरी दे दी है।
उत्तर प्रदेश के लोगों को भी इस राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करना होगा। उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में यदि कोई किसी इलाके रह रहा है और उस इलाके में रहते हुए 6 महीने पूरे हो गए हैं। तो उसको इस रजिस्टर में अपना दर्ज करना बहुत जरूरी होगा। बता दें कि NPR को लेकर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन पहले ही पश्चिम बंगाल और केरल की सरकार ने इसे लेकर विरोध जताया है हालांकि NPR का CAA और NRC से कोई संबंध नहीं है।
मनमोहन सरकार ने की थी इसकी शुरूआत
साल 2010 में यूपीए सरकार ने NPR बनाने की पहल शुरू की थी। इसके बाद साल 2011 में जनगणना होने से पहले इस पर काम शुरू किया गया था। बता दें कि अब साल 2021 में फिर देश की जनगणना होनी है, ऐसे में NPR पर एक बार फिर से काम शुरू हो सकता है। कोई व्यक्ति अगर बाहरी है और वह देश के किसी हिस्से में 6 महीने से ज्यादा वक्त से रह रहा है तो उसे भी NPR में नाम दर्ज कराना अनिवार्य है। NPR का मुख्य मकसद बायोमैट्रिक डेटा तैयार कर असली लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
घर बैठे दे सकते हैं अपनी जानकारी
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए आपको किसी भी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। इस रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए आपको एक एप के माध्यम से ऑनलाइन जानकारी भरनी होगी। आप घर बैठे एप के जरिए अपनी जानकारी दे सकते हैं। कहीं भी आपको जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए आपको किसी भी कागज की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। एनपीआर के लिए प्रत्येक व्यक्ति के बारे में 15 जानकारियां जुटाई जाएंगी। जिसमें व्यक्ति के नाम, माता पिता, लिंग, जन्म, शैक्षणिक स्थिति, पता आदि शामिल हैं। सरकार का एनपीआर बनाने का मुख्य उद्देश्य देश के हर नागरिक के लिए एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में जनसांख्यिकी एवं बायोमेट्रिक जानकारी रहेगी।