Women Fury Hits Streets: लखनऊ में ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ के दौरान हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर नारी सम्मान और अधिकारों के लिए जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया।
Women Power Jan Aakrosh Rally: लखनऊ की सड़कों पर मंगलवार को महिलाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ के रूप में नारी शक्ति ने अपने अधिकारों और सम्मान को लेकर जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। “आधी आबादी का आक्रोश सड़कों पर” की गूंज के साथ यह पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास से लोकभवन तक निकाली गई, जिसने राजधानी की राजनीति और सामाजिक माहौल दोनों को एक नई दिशा देने का संकेत दिया।
इस पदयात्रा में हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। हाथों में तख्तियां, बैनर और नारे लगाती महिलाएं अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज बुलंद करती नजर आईं। यह केवल एक रैली नहीं, बल्कि एक व्यापक जनभावना का प्रदर्शन था, जिसमें महिलाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हैं और किसी भी प्रकार के अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगी।
यह रणनीति केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का भी गहरा संबंध माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) इस विस्तार के जरिए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की दिशा में काम कर रही है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में कई बड़े नेता शामिल हुए। उनके साथ केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, अपर्णा यादव और सुषमा खर्कवाल भी मौजूद रहीं।
साथ ही पंकज चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। भाजपा महिला मोर्चा की बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने इस पदयात्रा को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए बताया कि विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी कहा कि इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों का आचरण नारी गरिमा के प्रतिकूल रहा है, जिसके कारण आज देशभर की महिलाएं सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई हैं।
इस पदयात्रा को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा नेताओं ने इस मंच से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
नेताओं का कहना था कि विपक्षी दलों की नीतियां और व्यवहार महिलाओं के हितों के विपरीत रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
इस पदयात्रा की सबसे खास बात महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी रही। अलग-अलग आयु वर्ग और पृष्ठभूमि की महिलाएं इस रैली में शामिल हुईं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक की महिलाओं ने इसमें भाग लेकर यह दिखा दिया कि अब वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि बदलाव की सक्रिय भागीदार हैं। महिलाओं का कहना था कि वे अपने अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाने के लिए एकजुट हुई हैं और भविष्य में भी इस तरह के आंदोलनों में भाग लेती रहेंगी।
यह पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर लोकभवन तक पहुंची। पूरे रास्ते में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की ओर से यातायात को नियंत्रित किया गया ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रास्ते भर महिलाओं के नारे और उत्साह देखने लायक था। “नारी सम्मान- देश का अभिमान” और “महिलाओं के अधिकार- हमारी पहचान” जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।