प्राकृतिक कृषि पर चल रही कार्यशाला में 15 सौ से अधिक किसान भाग ले रहे हैं, जिसमें नेपाल, बांग्लादेश के भी किसान प्रशिक्षण ले रहे हैं।
लखनऊ. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में लोकभारती के तत्वावधान में चल रहे शून्य लागत प्राकृतिक कृषि शिविर के दूसरे दिन पदम श्री सुभाष पालेकर ने किसानों को खेती से जुड़ी कई बारीकियां बताई। उन्होंने कृषि और प्रकृति के आपसी संबंधों पर भी किसानों का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि ईश्वर की सेवा है। दुनिया में सबसे पहले प्रकृति बनी और उसके बाद मानव का विकास हुआ। मनुष्य ने भगवान को देखा तो नहीं है लेकिन हर पल महसूस किया है।
पालेकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति में जो भी फसलें या पेड़ पौधे हैं, सभी इस अन्नपूर्णा धरती से अपने विकास के लिए जो भी लेते हैं उसे वापस भी करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के सभी तत्व जिस रुप में पेड़ पौधों से लिए जाते हैं, फसल पकने के बाद वह प्रकृति को वापस हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर कोई पौधा धरती से नाइट्रोजन लेता है तो वह अपना भोजन बनाने के बाद फसल के पकने के बाद अवशेष के माध्यम से नाइट्रोजन वापस कर देता है। यही क्रिया हर तत्व के साथ होती है। पालेकर ने कहा कि मिट्टी की जांच एक धोखाधड़ी है। हम जमीन में जितना गहराई में जाते हैं खाद्य पदार्थों की मात्रा निरंतर बढ़ती जाती है। हमारे वैज्ञानिक मिट्टी की जांच कर खाद डालने की बात करते हैं जबकि जमीन के नीचे भंडार भरा पड़ा है।
प्राकृतिक कृषि पर चल रही इस कार्यशाला में 15 सौ से अधिक किसान भाग ले रहे हैं, जिसमें नेपाल, बांग्लादेश के भी किसान प्रशिक्षण ले रहे हैं। पालेकर ने इस बात को उत्साहजनक बताया कि युवा इस प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रहे हैं।रासायनिक एवं जैविक खेती एक विदेशी षड्यंत्र के तहत किसानों को लूटने की व्यवस्था है। शिविर में लोक भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह, कार्यक्रम समन्वयक गोपाल उपाध्याय तथा संपर्क प्रमुख श्रीकृष्ण चौधरी व अन्य उपस्थित रहे।