
Global Liveability Index 2026: इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) द्वारा जारी ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में रहने लायक दुनिया के टॉप-10 शहरों (Top-10 City in the World) की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में डेनमार्क की राजधानी 'कोपेनहेगन' को दुनिया का सबसे रहने लायक शहर घोषित किया गया है। EIU ने अपनी रिपोर्ट में कुल 173 शहरों का मूल्यांकन किया।
मूल्यांकन रिपोर्ट में स्थिरता (स्टेबिलिटी), स्वास्थ्य सेवाएं (हेल्थकेयर), शिक्षा (एजुकेशन), संस्कृति एवं पर्यावरण (कल्चर एंड एनवायरनमेंट) तथा बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) जैसे 5 प्रमुख पैरामीटरों के आधार पर स्कोरिंग की गई। डेनमार्क के 'कोपेनहेगन' शहर को इनमें से 3 श्रेणियों में पूर्ण 100 अंक प्राप्त मिले हैं और कुल स्कोर 98 रहा। इस स्कोर के साथ 'कोपेनहेगन' शहर को शीर्ष स्थान मिला है।
विश्व के सबसे अच्छे टॉप-10 रहने लायक शहरों में ऑस्ट्रिया की राजधानी 'वियना' दूसरे स्थान पर रही, जबकि ऑस्ट्रेलिया का 'मेलबर्न' तीसरे स्थान पर है। टॉप-10 शहरों में पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड और जापान के शहरों का दबदबा रहा। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया का सिडनी-4, स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख- 5, जिनेवा- 6, जापान का ओसाका-7, एडिलेड- 8, वैंकूवर-9 और टोक्यो-10 नंबर पर है।
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में भारतीय शहरों की स्थिति चिंताजनक रही। नई दिल्ली-120, मुंबई-121, चेन्नई- 123 और बेंगलुरु- 127वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट में केवल 4 भारतीय शहरों को शामिल किया गया। पिछले साल की तुलना में नई दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, चीन के कई शहरों में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार हुआ है, जबकि भारत के बड़े महानगर प्रदूषण, ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझते नजर आए।
दुनिया के टॉप-10 शहरों में शामिल कोपेनहेगन, वियना, मेलबर्न, सिडनी-4, ज्यूरिख- 5, जिनेवा- 6, ओसाका-7, एडिलेड- 8, वैंकूवर-9 और टोक्यो की सफलता का मूल्यांकन कई चरणों में किया गया। दुनिया के टॉप-10 शहरों में शामिल होने वाले शहरों की सफलता यहां की सुरक्षा, बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं, विश्व स्तरीय शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है।
टॉप-10 शहरों में चिकित्सा सुविधाओं के लिए इंतजार न्यूनतम है। इन शहरों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आसानी से उपलब्ध है और दैनिक जीवन की हर जरूरत पूरी होती है। इन शहरों में स्थिरता और सुरक्षा का स्कोर लगभग बेहद अच्छा है। टॉप-10 शहरों के निवासियों को उच्च गुणवत्ता वाला जीवन मिल रहा है।
पश्चिमी यूरोप के शहरों का औसत स्कोर स्थिर रहा, जबकि एशिया के कुछ शहरों में मामूली सुधार देखने को मिला। EIU के अनुसार, ये शहर बेहतर शासन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन और सामाजिक समानता जैसे- मुद्दों पर मजबूत प्रदर्शन करते हैं।
नई दिल्ली ने शिक्षा में 66.7 अंक, इंफ्रास्ट्रक्चर में 58.9, स्थिरता में 50, स्वास्थ्य सेवाओं में 41.7 और संस्कृति-पर्यावरण में 35.4 अंक प्राप्त किए। मुंबई को शिक्षा में 58.3, इंफ्रास्ट्रक्चर में 51.8, स्थिरता में 60, स्वास्थ्य में 41.7 और संस्कृति-पर्यावरण में 33.3 अंक मिले। हालांकि, दोनों शहरों ने शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन वायु प्रदूषण, ट्रैफिक जाम, आवास की कमी, पानी-बिजली की समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के बड़े शहरों की आबादी और आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे का विकास इस गति से मेल नहीं खाता है। इसलिए लिवेबिलिटी स्कोर प्रभावित हुआ है।
रिपोर्ट के निचले पायदान पर युद्ध प्रभावित और अस्थिर शहर हैं। सीरिया की राजधानी दमिश्क सबसे निचले स्थान पर है। त्रिपोली (लीबिया), ढाका (बांग्लादेश), कराची (पाकिस्तान), अल्जीयर्स, लागोस (नाइजीरिया), पोर्ट मोरेस्बी, कीव (यूक्रेन) और हरारे जैसे शहरों में सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बुनियादी सुविधाएं और स्थिरता की गंभीर कमी है। इन शहरों में युद्ध, अराजकता, प्रदूषण, अपराध और आर्थिक संकट मुख्य कारण हैं।
इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ‘द इकोनॉमिस्ट’ पत्रिका का रिसर्च और एनालिसिस डिवीजन है। यह ग्लोबल बिजनेस इंटेलिजेंस, आर्थिक पूर्वानुमान, नीति विश्लेषण और एडवाइजरी सेवाएं देता है। 750 से अधिक विशेषज्ञों के नेटवर्क के साथ EIU राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ट्रेंड्स पर आधारित रिपोर्ट जारी करता है। ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स और डेमोक्रेसी इंडेक्स इसकी प्रमुख रिपोर्टों में शामिल हैं।
EIU सूचकांक व्यवसायों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बेंचमार्क प्रदान करता है। 2026 की रिपोर्ट में कुल 173 शहरों का आकलन किया गया। पश्चिमी देशों का टॉप-10 पर दबदबा जारी है, जो बेहतर शासन, उच्च आय, मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को दर्शाता है। वहीं, विकासशील देशों के शहरों में तेज शहरीकरण के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी और पर्यावरणीय चुनौतियां लिवेबिलिटी को प्रभावित कर रही हैं।
भारत के संदर्भ में EIU की यह रिपोर्ट शहरी विकास नीतियों की समीक्षा का अवसर प्रस्तुत करती है। स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो विस्तार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और प्रदूषण नियंत्रण उपायों ने कुछ प्रगति की है, लेकिन और तेज गति की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, शहरी भीड़ और आर्थिक असमानता भविष्य की बड़ी चुनौतियां होंगी।
कोपेनहेगन जैसे शहरों ने साइकिल फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा और समावेशी नीतियों से मिसाल पेश की है। भारत को भी ऐसे मॉडल से सीख लेकर अपने महानगरों को अधिक रहने योग्य बनाने की दिशा में काम करना होगा। EIU की इस रिपोर्ट का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कंपनियां कर्मचारियों के स्थानांतरण, निवेश निर्णयों और नीति-निर्माण के लिए करती हैं। 2026 की लिवेबिलिटी इंडेक्स पुष्टि करती है कि उच्च जीवन स्तर के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और सतत विकास की मजबूत नींव आवश्यक है।