
Frequent Headaches: किसी भी व्यक्ति को सिर दर्द होना आम बात है, लेकिन बार-बार ऐसा होता है तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। बार-बार हो रही सिर दर्द की समस्या को अनदेखा करना आपकी स्वस्थ लाइफ को मुश्किल में डाल सकता है। कई बार मौसम परिवर्तन, तनाव, चिंता या नींद की कमी जैसे सामान्य कारणों से सिर दर्द हो जाता है। सिर दर्द की समस्या से परेशान मरीजों के लिए डॉक्टर्स ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। डॉक्टर्स के सुझाव आपकी सेहत को अच्छा रखने में मदद कर सकते हैं।
सिर दर्द होना चिंता का विषय है। कुछ लोग ऐसी समस्या होने पर MRI कराने की सलाह देते हैं। हालांकि, इस समस्या पर विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में MRI की जरूरत नहीं पड़ती है। ज्यादातर सिर दर्द सामान्य (Normal Headache) होते हैं। बैंगलोर स्थित एस्टर CMI हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. लोकेश बी के मुताबिक, सिरदर्द स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे आम शिकायतों में शामिल है। डॉ. लोकेश बी का कहना है कि अधिकांश सिरदर्द प्राइमरी हेडेक (Primary headaches) की श्रेणी में आते हैं, जैसे- टेंशन हेडेक, माइग्रेन या क्लस्टर हेडेक। इनका पता लगाने के लिए आमतौर पर मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच काफी होती है।
न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. लोकेश बी बताते हैं कि MRI (Magnetic Resonance Imaging) एक उन्नत जांच है, जो मस्तिष्क की विस्तृत तस्वीर लेती है। इसमें रेडिएशन का उपयोग नहीं होता। समान्य सिर दर्द होने पर MRI कराने से मरीज का खर्च बढ़ता है। इसलिए MRI का फैसला हमेशा क्लिनिकल मूल्यांकन के आधार पर ही लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ खास स्थितियां हैं जिनमें डॉक्टर तुरंत MRI करानी आवश्यक है। ऐसे लक्षणों को मेडिकल भाषा में 'रेड फ्लैग्स' कहा जाता है। अचानक शुरू होने वाला सिर दर्द कुछ ही मिनटों में बहुत तेज (Thunderclap Headache) होने लगे तो यह 'रेड फ्लैग्स' का संकेत है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार, जांच करानी चाहिए।
MRI मशीन एक बेलनाकार (ट्यूब के आकार की) की होती है। यह मशीन रोगी के चारों ओर एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र बनाती है और स्कैनर से रेडियो तरंगों के स्पंदन भेजती है। कुछ MRI मशीनें सुरंगों जैसी दिखती हैं, जबकि कुछ अधिक खुले आकार की होती हैं। MRI स्कैनर द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र शरीर के परमाणुओं को एक ही दिशा में संरेखित कर देता है। इसके बाद MRI मशीन से रेडियो तरंगें भेजी जाती हैं, जो इन परमाणुओं को उनकी मूल स्थिति से हटा देती हैं।
रेडियो तरंगें बंद होने पर, परमाणु अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं और रेडियो संकेत वापस भेजते हैं। इन संकेतों को कंप्यूटर द्वारा प्राप्त किया जाता है। इनके जरिए जांच किए जा रहे शरीर के अंग की छवि में परिवर्तित किया जाता है। यह छवि एक मॉनिटर पर दिखाई देती है। मायो क्लीनिक की वेबसाइट पर छपी रिसर्च बताती है कि MRI एक टेक्नोलॉजी है। इसमें शरीर के अंदर वाले हिस्से की तस्वीरों को आसानी से निकाला जा सकता है।
MRI का इस्तेमाल मुख्य रूप से दिमाग के अंदरूनी हिस्से जैसे- नसों और सॉफ्ट टिशू की जांच की जाती है। MRI की खास बात यह है कि इसमें किसी प्रकार के रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसलिए दिमाग के लिए यह स्कैन बिल्कुल सुरक्षित माना जाता है।
अचानक शुरू होने वाला सिर दर्द बहुत तेज होना, 50 वर्ष से अधिक की उम्र में पहली बार सिरदर्द होना, सिर दर्द के साथ बुखार, दौरे पड़ना, उलझन, कमजोरी, बोलने में कठिनाई या धुंधला दिखना जैसे लक्षण गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा खांसने, छींकने या जोर लगाने पर बढ़ने वाला सिर दर्द सेहत को बिगाड़ सकता है। सिर दर्द शुरू होने के बाद अचानक उसका पैटर्न बदल जाना भी बड़ा संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। कैंसर, इम्यून सिस्टम संबंधी बीमारी या हाल ही में सिर में चोट लगने वाले मरीज सिर दर्द को हल्के में न लें। बच्चों में सिरदर्द के साथ न्यूरोलॉजिकल लक्षण या विकास संबंधी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
डॉ. लोकेश बताते हैं कि सही समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। इसलिए अगर सिरदर्द के साथ कमजोरी, बार-बार उल्टी, बेहोशी या आंखों में समस्या हो तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। यदि सामान्य इलाज (दवाएं, लाइफस्टाइल बदलाव) के बावजूद सिरदर्द में कोई सुधार नहीं हो रहा हो तो डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। खासकर ऐसे मरीजों को जांच की सलाह दी जाती है, जिनका सिरदर्द पहले से अलग तरह का हो गया हो। MRI के अलावा डॉक्टर कभी-कभी CT स्कैन, EEG या ब्लड टेस्ट भी सुझाते हैं।
किसी भी व्यक्ति को बार-बार होने वाली सिर दर्द की समस्या परेशान कर सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि धैर्य से काम लें। ज्यादातर मामलों में सिर दर्द पूरी तरह से बेनाइन (हानिरहित) होता है। हालांकि, अगर 'रेड फ्लैग' लक्षण दिखें तो खुद को नजरअंदाज न करें। समय पर सही जांच से गंभीर बीमारियों का जल्दी पता लग सकता है और इलाज आसान हो जाता है। बार-बार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
डॉक्टर तय करेंगे कि आपको MRI की जरूरत है या किसी अन्य प्रकार की जांच की। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय मदद लेकर इस आम समस्या को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। डॉ. लोकेश बताते हैं कि सही समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। इसलिए अगर सिरदर्द के साथ कमजोरी, बार-बार उल्टी, बेहोशी या आंखों में समस्या हो तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।