
भारत में पहली बार सेवा उत्पादन सूचकांक लागू (सांकेतिक इमेज-AI)
Service Production Index: देश की आर्थिक जानकारी (Financial Information) और उसकी ग्रोथ के लिए सभी सेक्टरों के उतार-चढ़ाव का आकलन बेहद आवश्यक है। इसके आकलन के लिए देश की 53% से अधिक GDP में योगदान देने वाले सर्विस सेक्टर IT, बैंकिंग, ट्रांसपोर्ट आदि के डेटा के लिए 3 महीने का इंतजार करना पड़ता था। अब यह पुरानी व्यवस्था बदल गई है। पहली बार भारत में नया आर्थिक पैमाना (Economic Scale) लागू हुआ है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) की लांचिंग कर दी गई है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए 19 उप-क्षेत्रों के लिए सेवा उत्पादन सूचकांक का पहला संस्करण जारी किया है। यह 19 उप-क्षेत्र, सेवा क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं। इसके बाद हर महीने की 29 तारीख को सेवा उत्पादन सूचकांक-ISP जारी किया जाएगा। उप-क्षेत्रीय ISP की स्थिरता और स्थिति अनुकूल सक्षमता का अध्ययन और सेवाओं के समग्र कवरेज में सुधार के बाद समग्र ISP की जानकारी बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने व्यापक आर्थिक संकेतकों के एक भाग के रूप में साल 2024-25 को आधार वर्ष मानते हुए 19 उप-क्षेत्रों के सेवा उत्पादन सूचकांक जारी करना शुरू किया है। सेवा उत्पादन सूचकांक का पहला सेट अप्रैल 2026 के लिए जारी किया जा रहा है। यह सूचकांक भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत बनाने और सेवा क्षेत्र मापन में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की आधे से अधिक आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। उप-क्षेत्रीय ISP के जारी होने से पहली बार भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत कवरेज के साथ अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का मासिक मापन उपलब्ध होगा।
देश की अर्थव्यस्था उद्योग और सेवा पर टिकी है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production) के जरिए फैक्ट्रियों और औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) की स्थिति मापी जाती है। जिस महीने में IIP की रिपोर्ट आती है, सरकार उसी महीने के पिछले साल की रिपोर्ट से उसकी तुलना करती है। इस प्रक्रिया से जो भी प्रतिशत सामने आता है, उसी को औद्योगिक विकास दर कहा जाता है।
वहीं, सर्विस सेक्टर का आकलन अब तक हर 3 महीने में आ रहा था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) देश की तिमाही GDP और जीवीए (GVA) रिपोर्ट में इसे एक चैप्टर के रूप में शामिल करता रहा था। अब ISP से हर महीने इस सेक्टर की सटीक रिपोर्ट मिल सकेगी। यह देश में पहली बार होने जा रहा है।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) में सेवा क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार करने में कुछ अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं होगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, GST का डेटा इसकी ताकत बनेगा। कारोबारियों को भी इसके लिए कुछ नया करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सेवा क्षेत्र के उद्योगों की ओर से हर महीने GST रिटर्न फाइल की जाती है।
सेवा उत्पादन सूचकांक में कुल सेल्स डेटा यानी कितना उत्पादन, कितना खपत आदि जानकारियों का प्रयोग कर हर महीने रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इससे पता चलता रहेगा कि सर्विस सेक्टर में हालात क्या चल रहे हैं। सेवा उत्पादन सूचकांक, 19 सर्विस सेक्टरों को कवर करेगा।
प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो (PIB) के अनुसार, सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख ताकत के रूप से उभरा है। देश की GDP यानी Gross Domestic Product (सकल घरेलू उत्पाद) में यह सेक्टर 53% से अधिक का योगदान देता है। वहीं, साल 2013-14 से यह क्षेत्र देश की GVA यानी Gross Value Added (सकल मूल्य वर्धित) में 50% से अधिक का योगदान देता चला आ रहा है।
सर्विस क्षेत्र में कुल आबादी के करीब 32% लोग कार्यरत हैं। वैश्विक रुझान के अनुसार, अभी तक इस सेक्टर की रफ्तार को प्रत्येक महीने मापने के लिए कोई पैमाना नहीं था। ऐसी स्थिति में सर्विस सेक्टर संकट आने पर तत्काल कोई उपाय करना मुश्किल था। सेवा उत्पादन सूचकांक इन जरूरतों को पूरा करेगा।
ISP की रिपोर्ट हर महीने आएगी तो सर्विस सेक्टर की कमियों को सुधारना आसाना होगा। अभी तक काफी लेट रिपोर्ट मिलती रही है। इससे इस सेक्टर में मंदी या अन्य कोई नुकसान होने पर आरबीआई आदि को फैसले लेने में दिक्कत होती है। तत्काल बचाव नहीं शुरू हो पाता है। कमियों को भी सुधारना मुश्किल हो जाता है। मंदी की स्थिति में तमाम लोगों को अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ जाता था।
अब हर महीने रिपोर्ट आएगी तो स्थिति के आकलन के अनुसार समय से प्रयास शुरू हो सकेंगे। नौकरी जाने का खतरा कम होगा। निवेश के लिए भी देश-विदेश के निवेशकों को मदद मिलेगी। रुझान के हिसाब से वे हर महीने इसमें निवेश कर सकेंग। अभी तक उन्हें इसके लिए 3 महीने का इंतजार करना पड़ता था।
दुनिया के कई देश पहले से उद्योगों के उत्पादन, खपत आदि के सटीक मूल्यांकन के लिए ISP का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, जापान, कनाडा आदि देश आईएसपी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन देशों में इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस सूचकांक से उन्हें बेहतर जानकारी मिल रही है। इसके हिसाब से वहां की सरकारें योजनाएं बना रहीं हैं। भारत में यह सूचकांक ट्रायल बेसिस पर शुरू हुआ है। महीने के अंत में इसका डेटा जारी होगा। आईएसपी को देश में हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर के नाम से भी जाना जा रहा है। आर्थिक जानकार ISP को आकलन का कारगर तरीका मान रहे हैं।
Updated on:
15 Jul 2026 10:52 am
Published on:
15 Jul 2026 10:52 am
