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न खेत, न बीज, न खेती… फिर भी ₹2000 किलो बिकता है कटरुआ, क्या है जंगल का यह खजाना?

What is katrua Mushroom : मटन से भी महंगा बिकने वाला 'कटरुआ' मशरूम क्या है? जानिए मानसून की पहली बारिश के बाद जंगलों में क्यों शुरू होती है इसकी खोज और क्यों इसे कहते हैं 'शाकाहारियों का मटन'।
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What is katrua mushroom

what is katrua mushroom : कटरूआ तराई जंगलों में पाई जाने वाली मशरूम की एक प्रजाति है। PC- Chatgpt

मानसून की पहली तेज बारिश के बाद जब खेतों और जंगलों की मिट्टी से सोंधी खुशबू उठती है, उसी समय उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और देश के कई वन क्षेत्रों में लोगों की नजरें जमीन पर टिक जाती हैं। वजह है कटरुआ- एक ऐसी जंगली सब्जी यानि मशरूम, जो सालभर नहीं बल्कि केवल कुछ हफ्तों के लिए दिखाई देती है।

कई इलाकों में इसकी कीमत 1000 से 2000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। ग्रामीण बाजारों में इसकी मांग इतनी अधिक होती है कि लोग सुबह-सुबह जंगलों की ओर निकल पड़ते हैं ताकि दूसरे लोगों से पहले इसे खोज सकें। यही कारण है कि कटरुआ को कई जगह 'शाकाहारियों का मटन' भी कहा जाता है।

पहले जानिए क्या है जंगली सब्जी कटरूआ

कटरुआ एक जंगली खाद्य मशरूम (Wild Edible Mushroom) है, जिसे वैज्ञानिक रूप से आमतौर पर 'Termitomyces' समूह से जोड़ा जाता है। यह साधारण खेती वाले मशरूम की तरह नहीं होता। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसका जीवन चक्र दीमकों (Termites) से जुड़ा होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार Termitomyces प्रजातियां दीमकों के साथ सहजीवी (Symbiotic) संबंध में विकसित होती हैं और अक्सर दीमक के टीलों या उनके आसपास दिखाई देती हैं।

भारत में Termitomyces की कई प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं और उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी घाट तथा पूर्वोत्तर राज्यों तक इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है।

बारिश के मौसम में ही क्यों निकलता है?

कटरुआ का पूरा जीवन चक्र मानसून पर निर्भर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका वास्तविक फंगस नेटवर्क सालभर मिट्टी के भीतर मौजूद रहता है, लेकिन मशरूम का दिखाई देने वाला हिस्सा तभी विकसित होता है जब…

  • मिट्टी में पर्याप्त नमी हो
  • वातावरण में आर्द्रता बढ़े
  • तापमान अनुकूल हो
  • लगातार बारिश हो

यही वजह है कि मानसून शुरू होते ही यह अचानक बड़ी संख्या में दिखाई देने लगता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी बताया गया है कि Termitomyces प्रजातियां उच्च आर्द्रता और मानसूनी परिस्थितियों में सबसे अधिक विकसित होती हैं।

किस मिट्टी में उगता है?

  • जंगल की दोमट मिट्टी
  • लेटराइट मिट्टी
  • कार्बनिक पदार्थों से भरपूर जमीन
  • साल के जंगल
  • दीमक के टीलों के आसपा

केरल और अन्य क्षेत्रों पर हुए अध्ययनों में पाया गया कि Termitomyces मशरूम गर्म, आर्द्र और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी में सबसे बेहतर विकसित होते हैं।

कहां मिलता है कटरुआ?

  • उत्तर प्रदेश की तराई और वन पट्टी
  • बिहार
  • झारखंड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल
  • पूर्वोत्तर भारत
  • पश्चिमी घाट क्षेत्र

इतनी महंगी क्यों होती है यह मशरूम?

खेती लगभग नहीं होती : आज भी इसका व्यावसायिक उत्पादन बहुत सीमित है। अधिकांश कटरुआ प्राकृतिक रूप से जंगलों से ही एकत्र किया जाता है।

केवल कुछ हफ्तों का सीजन : यह पूरे साल उपलब्ध नहीं रहता। मानसून के दौरान कुछ सप्ताह ही बाजार में दिखाई देता है।

खोजने में मेहनत : इसे खेतों से नहीं बल्कि जंगलों और दीमक के टीलों के आसपास ढूंढना पड़ता है।

मांग ज्यादा : ग्रामीण इलाकों में इसे बेहद स्वादिष्ट माना जाता है और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

क्यों कहा जाता है 'शाकाहारियों का मटन'?

कटरुआ का स्वाद अन्य सामान्य मशरूम से काफी अलग माना जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि-

  • इसकी बनावट मांस जैसी महसूस होती है।
  • पकने पर इसमें गहरी सुगंध आती है।
  • यह मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख लेता है।
  • इसका टेक्सचर चबाने में संतोषजनक होता है।

इसी वजह से इसे कई क्षेत्रों में 'Vegetarian Mutton' कहा जाता है। यह धारणा केवल भारत तक सीमित नहीं है; दुनिया के अन्य हिस्सों में भी Termitomyces को प्रीमियम खाद्य मशरूम माना जाता है।

पोषण का खजाना है कटरूआ

कटरुआ सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पोषण के लिए भी जाना जाता है। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों में Termitomyces मशरूम को अच्छे पोषण स्रोत के रूप में जाना जाता है।

  • प्रोटीन का अच्छा स्रोत
  • फाइबर से भरपूर
  • कार्बोहाइड्रेट युक्त
  • खनिज पदार्थों से समृद्ध

लोग इसे खोजते कैसे हैं?

मानसून शुरू होते ही ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के लोग सुबह-सुबह जंगलों में निकल जाते हैं। इसे गांव के अनुभवी लोग खोज पाते हैं जो उसी मिट्टी में पले बढ़े हों। वह पुराने दीमक टीलों की पहचान करते हैं। बारिश के बाद की नमी देखते हैं। जंगल के उन स्थानों को याद रखते हैं जहां पहले कटरुआ मिला था।

कटरुआ की खोज करना जोखिम भरा

कटरुआ की तलाश रोमांचक जरूर है, लेकिन जोखिम भरी भी हो सकती है। बरसात के मौसम में जहरीले जीव सांप और बिच्छू भी सक्रिय रहते हैं। गीली जमीन और घने जंगल दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

जहरीले मशरूम की पहचान

सबसे बड़ा खतरा गलत पहचान है। कई जहरीले मशरूम देखने में खाद्य मशरूम जैसे लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभव के बिना जंगली मशरूम तोड़ना जोखिम भरा हो सकता है।

क्या भविष्य में इसकी खेती संभव है?

कटरुआ की व्यावसायिक खेती वैज्ञानिकों के लिए अभी भी चुनौती बनी हुई है। इसका मुख्य कारण दीमकों और मशरूम के बीच मौजूद जटिल सहजीवी संबंध है। इसी वजह से अधिकांश Termitomyces आज भी प्राकृतिक रूप से ही प्राप्त किए जाते हैं।