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Big Bang New Theory: क्या है ब्रह्मांड की उत्पत्ति की मेड इन इंडिया थ्योरी ? ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारत की गूंज

Cosmic Bounce: भारतीय सैद्धांतिक भौतिकविद् देव अरस्तु पंचारिया ने 'आइंस्टीन-कार्टन कॉस्मोलॉजी' और 'लैंगलैंड्स प्रोग्राम' के जरिए ब्रह्मांड की उत्पत्ति की 100 साल पुरानी 'सिंगुलैरिटी' की पहेली को सुलझा दिया है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित 'नेक्सस फोरम' में अपनी नई 'कॉस्मिक बाउंस' थ्योरी पेश करने जा रहे देव अरस्तु के इस शोध ने वैश्विक विज्ञान जगत में भारत का डंका बजा दिया है।
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भारत

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MI Zahir

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एम आई जाहिर

Jul 14, 2026

Big Bang Theory News.

प्रख्यात भारतवंशी भौतिकविद और गणितज्ञ देव अरस्तु ब्रह्मांड के सिद्धांत से संबंधित अपने नये शोध के बारे में इंग्लैंड में बताएंगे। फोटो डिजाइन: पत्रिका

Cosmic Bounce Big Bang New Indian Theory: 'ब्रह्मांड की उत्पत्ति कैसे हुई? यह सवाल जिज्ञासाओं भरा है और मानव सभ्यता जितना ही पुराना है। दरसअल पिछले करीब 100 साल से भौतिकी और गणित के समीकरण इस यक्ष प्रश्न के सामने घुटने टेक रहे थे, और इस रुकावट की सबसे बड़ी वजह थी-'सिंगुलैरिटी'। लेकिन अब भारत के युवा सैद्धांतिक भौतिकविद् और गणितज्ञ देव अरस्तु पंचारिया की 'मेड इन इंडिया' थ्योरी पर केंद्रित रिसर्च ने इस जटिल पहेली को सुलझा दिया है। उनका यह शोध-पत्र यूरोपियन फिजिकल सोसाइटी के प्रतिष्ठित जर्नल 'ईपीएल: यूरोफिजिक्स लेटर्स' में प्रकाशित हुआ है, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

आखिर क्या होती है सिंगुलैरिटी ?

विज्ञान के अनुसार यह एक ऐसी अजीब स्थिति है जहां ब्रह्मांड की पूरी ताकत और सारा का सारा पदार्थ एक सूई की नोक से भी अरबों गुना छोटे बिंदु में सिमट जाता है। इस बिंदु पर आकर विज्ञान के सारे नियम, गणित के समीकरण और आइंस्टीन की थ्योरी भी पूरी तरह फेल हो जाते हैं। यहां आकर विज्ञान घुटने टेक देता था।

ब्रह्मांड के जन्म का नया गणित समझाएंगे देव अरस्तु पंचारिया

इसी बीच, देव अरस्तु को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक 'रोड्स हाउस' में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बौद्धिक मंच 'नेक्सस फोरम' में अपना यह नया सिद्धांत प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जहां वे ब्रह्मांड के जन्म का नया गणित समझाएंगे। patrika.com ने वैज्ञानिक देव अरस्तु से एक्सक्लूसिव बातचीत कर इस क्रांतिकारी थ्योरी की बारीकियां जानीं।

यूरोपियन फिजिकल सोसाइटी के जर्नल ईपीएल यूरो फिजिक्स लैटर्स में प्रकाशित मशहूर भौतिकविद् और गणितज्ञ देव अरस्तु की थ्योरी। (विजुअल: साइंस जर्नल,डिजाइन: ChatGPt )

नेक्सस फोरम: दुनिया के सबसे बड़े ;थिंक टैंक' का जमावड़ा

उन्होंने patrika.com से बातचीत में कहा कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, हांगकांग पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय और विज्ञान जगत की प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था 'सेल प्रेस' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले 'नेक्सस फोरम' को 'इक्कीसवीं सदी का बौद्धिक कुंभ' माना जाता है। इस वैश्विक मंच पर नोबेल विजेता, फील्ड्स मेडलिस्ट, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के नीति-निर्माता एक साथ जुटते हैं, जहाँ मंथन से निकले विचार सीधे वैश्विक नीतियों और विज्ञान की दिशा को प्रभावित करते हैं। इसी ऐतिहासिक मंच से युवा वैज्ञानिक देव अरस्तु ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर अपनी नई थ्योरी दुनिया के सामने रखेंगे।

100 साल पुरानी समस्या: 'सिंगुलैरिटी' क्या है ?

देव अरस्तु ने बताया कि 1920 के दशक से ही आधुनिक विज्ञान 'बिग बैंग थ्योरी' को मान्यता देता आ रहा है, जिसके अनुसार करीब 13.8 अरब साल पहले एक अति-सूक्ष्म और सघन बिंदु में हुए महाविस्फोट से हमारे ब्रह्मांड का जन्म हुआ। लेकिन आधुनिक भौतिकी की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जैसे ही हम गणितीय समीकरणों के जरिए ब्रह्मांड के उस 'पहले पल' के करीब पहुंचते हैं, विज्ञान के सारे नियम ध्वस्त हो जाते हैं। उस परम क्षण में पदार्थ का घनत्व (Density) और ऊर्जा (Energy) अनंत हो जाती है; तथा गुरुत्वाकर्षण, समय और स्पेस (अंतरिक्ष) अपना मूल अस्तित्व ही खो देते हैं। वैज्ञानिक इसी अबूझ बिंदु को 'सिंगुलैरिटी' कहते हैं।

'जवाब पिछले एक सदी से दुनिया के किसी वैज्ञानिक के पास नहीं था'

उन्होंने बातचीत में कहा कि यह वही चरम बिंदु है जहां महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का 'सापेक्षता का सामान्य सिद्धांत' (General Theory of Relativity) भी पूरी तरह नाकाम हो जाता है। खुद आइंस्टीन ने जीवनभर इस पहेली को सुलझाने का असफल प्रयास किया था। सच तो यह है कि बिग बैंग थ्योरी हमें महाविस्फोट के 0.00001 सेकंड बाद की कहानी तो विस्तार से बताती है, लेकिन ठीक '0 सेकंड' (ब्रह्मांड के जन्म के सटीक क्षण) पर वास्तव में क्या घटित हुआ था, इसका जवाब पिछले एक सदी से दुनिया के किसी वैज्ञानिक के पास नहीं था।'

देव अरस्तु का जवाब: ब्रह्मांड 'फटा' नहीं, 'उछला' है

देव अरस्तु ने 2 बिल्कुल अलग-अलग दुनियाओं को जोड़ कर इस समस्या का समाधान निकाला। उनका शोध-पत्र का शीर्षक है: 'आइंस्टीन-कार्टन कॉस्मोलॉजी (ब्रह्मांड विज्ञान) में ज्योमेट्रिक लैंगलैंड्स डुअलिटी (ज्यामितीय लैंगलैंड्स द्वैतता)।

पहला हिस्सा: आइंस्टीन-कार्टन कॉस्मोलॉजी

आइंस्टीन ने कहा था - द्रव्यमान की वजह से स्पेस-टाइम मुड़ जाता है। सन 1929 में गणितज्ञ एली कार्टन ने इसमें एक नया विचार जोड़ा - पदार्थ के पास 'स्पिन' भी होता है। देव अरस्तु ने कहा कि इस स्पिन की वजह से स्पेस-टाइम सिर्फ मुड़ता ही नहीं, बल्कि 'ट्विस्ट' भी करता है। इसे टॉर्शन कहते हैं। यही टॉर्शन गेम-चेंजर है। देव अरस्तु के गणित के अनुसार, टॉर्शन की वजह से ब्रह्मांड एक बिंदु पर पहुंच कर फटा नहीं, बल्कि वह पहले अधिकतम घनत्व तक सिकुड़ा, और फिर रबर की गेंद की तरह उछल गया। इसे 'कॉस्मिक बाउंस' कहते हैं। मतलब बिग बैंग से पहले भी एक ब्रह्मांड था।

दूसरा हिस्सा: लैंगलैंड्स प्रोग्राम

सन 1976 में गणितज्ञ रॉबर्ट लैंगलैंड्स ने गणित की सबसे गहरी और जटिल संरचना दी। इसे "गणित का ग्रैंड यूनिफाइड थ्योरी" कहा जाता है। अब तक इसका वास्तविक भौतिक ब्रह्मांड से कोई संबंध नहीं माना जाता था। देव अरस्तु ने दुनिया को पहली बार दिखाया कि ब्रह्मांड के जन्म का गणित और लैंगलैंड्स प्रोग्राम का गणित एक ही है। उन्होंने साबित किया कि ब्रह्मांड की ज्यामिति गणित के नियमों से 'बाधित' है।

ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में भारत के युवा वैज्ञानिक देव अरस्तु पंचारिया ने नई थ्योरी प्रस्तुत की है। (फोटो : AI)

EPL जर्नल में प्रकाशन: नोबेल विजेताओं की कतार में

देव अरस्तु का यह पेपर यूरोपियन फिजिकल सोसाइटी की EPL जर्नल में प्रकाशित हुआ है। यह जर्नल भौतिकी के सबसे कठिन जर्नलों में से एक है। इसमें आज तक दर्जनों नोबेल पुरस्कार विजेताओं के पेपर छप चुके हैं। किसी भारतीय युवा वैज्ञानिक का इस स्तर पर ब्रह्मांड विज्ञान में पेपर आना अपने आप में ऐतिहासिक है।

इस नए सिद्धांत से दुनिया को क्या मिलेगा ? 3 बड़े प्रेडिक्शन

अरस्तु की थ्योरी सिर्फ कागज पर नहीं है। यह 3 ऐसी भविष्यवाणियां करती है जिन्हें हम टेलीस्कोप से टेस्ट कर सकते हैं:

कॉस्मिक बाउंस का सुबूत: ब्रह्मांड की शुरुआत में एक 'उछाल' हुआ था, विस्फोट नहीं। इससे ब्रह्मांड की पृष्ठभूमि में एक खास तरह की गुरुत्वीय तरंगें रह जानी चाहिए।

CMB में सटीक आंकड़ा: ब्रह्मांड की पहली रोशनी यानि सीएमबी में स्केलर स्पेक्ट्रल इंडेक्स n_s = 0.965 ± 0.005 होना चाहिए। प्लैंक सैटेलाइट का डेटा लगभग इसी के आसपास है। अगली पीढ़ी के टेलीस्कोप इसे और पुख्ता करेंगे।

विज्ञान एक साथ: यह एक ही गणित से फिजिक्स की सिंगुलैरिटी, गणित की लैंगलैंड्स समस्या और कॉस्मोलॉजी के डार्क एनर्जी जैसे सवालों को एक साथ छूता है।

यूरोपियन फिजिकल सोसाइटी के जर्नल ईपीएल यूरो फिजिक्स लैटर्स में प्रकाशित मशहूर भौतिकविद् और गणितज्ञ देव अरस्तु की थ्योरी। ( इन्फो ग्राफिक: गूगल एलएलएम)

इक्कीसवीं सदी में भारत की बौद्धिक क्षमता का प्रतीक

देव अरस्तु का यह सफर सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है। यह इक्कीसवीं सदी में भारत की बौद्धिक क्षमता का प्रतीक है। जब दुनिया के सबसे बड़ा मंच ऑक्सफोर्ड उन्हें बुलाता है, जब पोलैंड की अकादमी उन्हें सबसे युवा सलाहकार बनाती है, तो यह साबित होता है कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी में नहीं, बल्कि 'मौलिक विज्ञान' में भी नेतृत्व कर रहा है।

प्रख्यात भारतवंशी भौतिकविद और गणितज्ञ देव अरस्तु ब्रह्मांड के सिद्धांत के बारे में बताते हुए। (फोटो डिजाइन: ChaTGPT)

'शायद आने वाले समय में बिग बैंग के साथ'बाउंस' का नाम भी लिखा जाए'

ब्रिटेन के राजघराने से संबंधित रॉयल सोसाइटी फॉर द एनकरेजमेंट ऑफ आर्ट्स, मैन्युफैक्चरर्स एंड कॉमर्स (UK) और इसकी ब्रिटिश मुख्य परिषद से नामांकित देव अरस्तु 22 से 24 जुलाई 2026 के बीच आयोजित कार्यक्रम में ऑक्सफोर्ड के रोड्स हाउस में जब बोलेंगे, तो दुनिया पहली बार सुनेगी कि कैसे एक भारतीय गणितज्ञ ने 100 साल पुरानी 'सिंगुलैरिटी' की गुत्थी को सुलझा दिया। उन्होंने patrika.com से फोन पर बातचीत में कहा: 'विज्ञान की सबसे बड़ी सुंदरता यही है कि ब्रह्मांड गणित की भाषा बोलता है। हमें बस उस भाषा को सीखना है। शायद आने वाले समय में इतिहास में बिग बैंग के साथ-साथ'बाउंस' का नाम भी लिखा जाए।'

दुनिया के सबसे युवा और भारतीय मूल के पहले विचारक

बहरहाल, देव अरस्तु की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्हें पोलैंड की प्रतिष्ठित 'पोलिश अकादमी ऑफ साइंसेज' की 'साइंस एंड फिलॉसफी' परिषद का सलाहकार भी नियुक्त किया गया है। विज्ञान और दर्शन की इस वैश्विक शीर्ष परिषद में जगह बनाने वाले वे दुनिया के सबसे युवा और भारतीय मूल के पहले विचारक हैं।