
इन बच्चों के पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने की उम्र है, इन्हें बिगड़ने से रोकना हमारा कर्तव्य है। फोटो: Google Gemini AI.)
Juvenile Crime in India: देश में बच्चों के अपराध करने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले दस बरसों के दौरान पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने की उम्र वाले बच्चों के अपराधी बनने के ग्राफ में इजाफा हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट के मुताबिक, कानून से संघर्ष करने वाले नाबालिगों (Juveniles) के मामलों में 11.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए 97% से अधिक बच्चे 16 से 18 साल की उम्र के हैं। यही वह उम्र होती है, जब बच्चों को पढ़ाई और कैरियर पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन कई बच्चे अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये नाबालिग जो अपराध कर रहे हैं, उनमें चोरी, अपहरण और साइबर अपराध सबसे अधिक हैं।
भारत में गत 10 वर्षों के दौरान बाल अपराध के ग्राफ में इजाफा। (विजुअल: AI)
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। समाज, परिवार और डिजिटल दुनिया में आए बदलाव इसकी बड़ी वजह हैं।
देश में गरीबी में रहने वाले कई बच्चों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं। ऐसे में कुछ बच्चे गलत संगत में पड़ कर चोरी या दूसरे अपराध करने लगते हैं। शिक्षा नहीं मिलने से उन्हें सही और गलत का फर्क भी ठीक से समझ नहीं आता।
आज लगभग हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन है, लेकिन उसके इस्तेमाल पर निगरानी बहुत कम है। हिंसक वीडियो गेम, आपत्तिजनक वीडियो, सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद गलत सामग्री से बच्चों का व्यवहार प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा साइबर ठगी करने वाले गिरोह भी बच्चों को अपने जाल में फंसा रहे हैं, जिससे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।
आज संयुक्त परिवार कम होते जा रहे हैं। माता-पिता दोनों नौकरी में व्यस्त रहते हैं या कई घरों में आपसी विवाद चलते रहते हैं। ऐसे माहौल में बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं। कई बार वे गलत दोस्तों की संगत में आ जाते हैं और नशे की लत या दूसरे अपराधों की ओर बढ़ने लगते हैं।
बच्चे कैसे बन रहे हैं अपराधियों का हथियार?
आज अपराधी गिरोह भी पहले से ज्यादा चालाक हो गए हैं। कई संगठित अपराधी गिरोह जानबूझकर बच्चों से चोरी, नशे की तस्करी और दूसरे अपराध करवाते हैं।
उन्हें पता है कि भारत के किशोर न्याय कानून में नाबालिगों को वयस्क अपराधियों जैसी सजा नहीं मिलती, बल्कि सुधार और पुनर्वास पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इसी वजह से अपराधी बच्चों का इस्तेमाल करते हैं।
छोटे और नासमझ बच्चे आखिर क्यों बनते हैं अपराधी, ऐसे समझें ।( विजुअल: Google LLM)
तकनीक की अच्छी जानकारी होने के कारण कई बच्चों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी में 'मनी म्यूल' के रूप में किया जाता है। इसके अलावा कई किशोर दोस्तों के दबाव में आकर ऑनलाइन ब्लैकमेल, सेक्सटॉर्शन, डीपफेक वीडियो फैलाने और साइबर बुलिंग जैसे अपराधों में भी शामिल हो जाते हैं।
महिलाओं के सशक्तीकरण पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा पर रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि 2017 से 2022 के बीच महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध 239% बढ़ गए। इसी दौरान बच्चों से जुड़े ऑनलाइन शोषण और उत्पीड़न के मामलों में भी कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। समिति के अनुसार आज महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा इन अपराधों से है।
-साइबर स्टॉकिंग।
-सेक्सटॉर्शन।
-डीपफेक।
-ऑनलाइन ब्लैकमेल।
-फर्जी प्रोफाइल बनाकर परेशान करना।
सभी पुलिसकर्मियों को आधुनिक साइबर ट्रेनिंग दी जाए।
हर राज्य में डिजिटल फॉरेंसिक लैब बनाई जाए।
मोबाइल साइबर फॉरेंसिक वैन शुरू हों।
साइबर विशेषज्ञों की नियुक्ति बढ़ाई जाए।
महिला पुलिसकर्मियों, साइबर सेल और समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
साथ ही साइबर अपराध के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएं ताकि मामलों का जल्दी फैसला हो सके।
भारत में बाल अपराध होने के कारण और उनका समाधान। ( विजुअल: Google LLM)
समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भी कई सिफारिशें की हैं।
-AI की मदद से आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान अनिवार्य हो।
-बच्चों के लिए उम्र के अनुसार सोशल मीडिया नियम बनाए जाएं।
-सोशल मीडिया स्क्रीन टाइम सीमित किया जाए।
सभी सोशल मीडिया, गेमिंग और डेटिंग प्लेटफॉर्म पर KYC वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए ताकि फर्जी अकाउंट कम हो सकें।
समिति ने सुझाव दिया है कि अगर किसी महिला या बच्चे की आपत्तिजनक फोटो या वीडियो इंटरनेट पर अपलोड होती है तो उसे 24 घंटे के भीतर हटाने की व्यवस्था हो। इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान और पूरी तरह गोपनीय बनाई जाए।
ग्रामीण इलाकों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कर्मचारियों और शिक्षकों को 'साइबर सुरक्षा एंबेसडर' बनाया जाए। ये लोग गांव-गांव जाकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल करने की जानकारी देंगे।
सरकार को ऐसे एडवांस AI टूल विकसित करने चाहिए जो इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण (CSAM), डीपफेक और महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरों की पहचान कर तुरंत उन्हें ब्लॉक कर सकें। इन टूल्स को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (NCRP) और पुलिस सिस्टम से जोड़ा जाए ताकि अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो सके।
भारत में बच्चे क्यों बन रहे हैं अपराधी, ऐसे समझें। (विजुअल सहयोग: Google geminiAI.)
बहरहाल डिजिटल तकनीक ने हमारी जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर बच्चों को अपराध की राह से बचाना है और महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाना है, तो परिवार, समाज, स्कूल, पुलिस, सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। तभी देश का भविष्य सुरक्षित रह सकेगा।
Updated on:
15 Jul 2026 10:14 am
Published on:
15 Jul 2026 10:14 am
