
Ali Khamenei funeral : ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। मौत के चार महीने बाद शानदार तरीके से विदाई दी जाएगी। यह अनुमान किया जा रहा है कि उनकी अंतिम यात्रा में 1.5 -2 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल होंगे।
इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार में दुनिया भर के राजनयिकों सहित भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा (Pabitra Margherita) और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन (Syed Ata Hasnain) इसमें शामिल होंगे। आइए उन्हें 9 जुलाई को दफनाए जाने से पहले उनकी अंतिम यात्रा किन शहरों में किन उद्देश्यों के साथ घुमाया जाएगा, जानते हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई को ईरान की राजधानी तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला (Grand Mosalla) में अंतिम दर्शन के लिए लिए रखा जाएगा। यहां उनका पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई दो दिन के लिए रखा जाएगा। 6 जुलाई को तेहरान की सड़कों पर उनका जनाजा निकाला जाएगा। दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के विशाल चित्रों, शोक के प्रतीक काले झंडों और शहादत व प्रतिशोध का प्रतीक माने जाने वाले लाल झंडों से तेहरान का ग्रैंड मोसल्ला सजाया जा रहा है।
ईरान पर तीन दशकों तक शासन करने वाले सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार की रस्मों के शुरू होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। ग्रैंड मोसल्ला के मुख्य प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं, जो आसपास आने वाले हर वाहन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इस परिसर में प्रवेश करने के लिए यात्रियों को विशेष अनुमति पत्र (स्पेशल परमिट) दिखाना अनिवार्य है। फिलहाल इस परिसर को आम जनता के लिए नहीं खोला गया है।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर इस्लामी गणराज्य के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और औपचारिक स्थलों में से एक माना जाता है। विशाल ग्रैंड मोसल्ला का निर्माण जुमे की सामूहिक नमाज़, सरकारी समारोहों और बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए किया गया था। लंबे समय से यह स्थान धार्मिक जीवन और राज्य सत्ता के बीच संबंध का प्रतीक रहा है।
ग्रैंड मोसल्ला का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है। यहां वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के भाषण, राष्ट्रीय समारोह और ऐसे बड़े जनसमूह आयोजित होते रहे हैं, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और सरकार के प्रति समर्थन का प्रदर्शन करना होता है। ऐसे में ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को यहां अंतिम दर्शन के लिए रखना, उन्हें एक धार्मिक नेता और धार्मिक शासन व्यवस्था पर आधारित राजनीतिक प्रणाली के प्रमुख- दोनों रूपों में सम्मान देने का प्रतीक माना जा रहा है।
तेहरान की सड़कों पर निकलने वाली अंतिम यात्रा देश की राजनीतिक राजधानी से अंतिम विदाई का प्रतीक होगी। तेहरान में राष्ट्रपति भवन, संसद, न्यायपालिका, सैन्य मुख्यालय और अधिकांश प्रमुख सरकारी संस्थान स्थित हैं। पूरे वर्ष तेहरान में बड़े जनसमूह और रैलियां आयोजित होती रहती हैं, जिनका उपयोग अक्सर राष्ट्रीय एकजुटता और राज्य की शक्ति प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इस दृष्टि से अंतिम यात्रा केवल शोक व्यक्त करने का अवसर नहीं होगी, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन के इस दौर में देश की राजनीतिक निरंतरता और स्थिरता का भी संदेश देगी।
खामेनेई का पार्थिव शरीर 7 जुलाई को धार्मिक शहर कोम (Qom) में अंतिम संस्कार की प्रार्थना और श्रद्धांजलि के लिए लाया जाएगा। क़ोम में धार्मिक रीतियां पूरी होने के बाद, उनका अंतिम संस्कार 9 जुलाई को मशहद शहर में स्थित इमाम रज़ा दरगाह में किया जाएगा। आइए जानते हैं कि क़ोम में ही क्यों खामनेई की धार्मिक रीतियां पूरी कराई जाएंगी। क़ोम में ईरान के सबसे प्रतिष्ठित शिया मदरसे हौज़ा-ए-इल्मिया स्थित हैं। यहां दुनिया भर से छात्र और धर्मगुरु धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। कई प्रमुख आयतुल्ला और शिया विद्वान यहीं से जुड़े रहे हैं। क़ोम में हज़रत फ़ातिमा मासूमेह का पवित्र मज़ार स्थित है। वे आठवें शिया इमाम रज़ा की बहन थीं। यह दरगाह शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति से पहले और उसके बाद क़ोम इस्लामी गणराज्य की धार्मिक विचारधारा का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के धर्मगुरुओं ने ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
अली ख़ामेनेई केवल ईरान के राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि शिया धर्मगुरु भी थे। उनकी अंतिम यात्रा का क़ोम पहुंचना उनकी धार्मिक प्रतिष्ठा और शिया धर्मगुरु वर्ग से उनके संबंधों को रेखांकित करता है। क़ोम में खामेनेई का अंतिम श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए जाने से वरिष्ठ आयतुल्लाओं, धर्मगुरुओं और मदरसों के छात्रों को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिलेगा। यहां इस आयोजन का मकसद खामेनेई की धार्मिक विरासत को सम्मान देने का संदेश भी जाता है।
कोम के बाद खामेनेई की अंतिम यात्रा 8 जुलाई को इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला से गुजरेगी। इराक के कर्बला और नजफ़ शिया मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक शहरों में गिने जाते हैं। कर्बला में इमाम हुसैन का पवित्र शहादत स्थल रौज़ा (मज़ार) स्थित है। यहां 680 ईस्वी में हुई इमाम हुसैन की शहादत हुई थी और इसे शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। यह शहर बलिदान, न्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। वहीं, नजफ़ में हज़रत अली का पवित्र रौज़ा और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिया धार्मिक शिक्षण केंद्रों में से एक स्थित है। यहां से अनेक प्रमुख शिया धर्मगुरु जुड़े रहे हैं। दोनों शहर शिया आस्था, धार्मिक शिक्षा और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। नजफ़ में आयोजित होने वाले समारोह इस बात को रेखांकित करेंगे कि ख़ामेनेई का स्थान केवल ईरान तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापक वैश्विक शिया समुदाय में भी उनकी धार्मिक पहचान थी।
9 जुलाई को खामेनेई को उनके जन्मस्थल मशहद में इमाम रज़ा दरगाह में अंतिम विदाई देकर दफना दिया जाएगा। अंतिम संस्कार का अंतिम चरण ईरान के सबसे पवित्र शहर मशहद में होगा, जहां इमाम रज़ा का पवित्र रौज़ा (Imam Reza Shrine) स्थित है। यह दरगाह हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
4-5 जुलाई : तेहरान के 'इमाम खोमैनी ग्रैंड मुसल्ला' (Grand Mosalla) में जनता के दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए पार्थिव शरीर रखा जाएगा।
6 जुलाई : तेहरान की सड़कों पर मुख्य जनाजा (अंतिम यात्रा) निकाला जाएगा। सुरक्षा कारणों से तेहरान में शनिवार से सोमवार तक सरकारी छुट्टियां और प्रतिबंध लागू रहेंगे।
7 जुलाई : पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर क़ोम ले जाया जाएगा, जहां विशेष शिया धार्मिक रीतियाँ और प्रार्थनाएं की जाएंगी।
8 जुलाई : अंतिम यात्रा पड़ोसी देश इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला से होकर गुजरेगी।
9 जुलाई : ख़ामेनेई के जन्मस्थान मशहद शहर में स्थित इमाम रज़ा दरगाह (Imam Reza Shrine) में उन्हें अंतिम विदाई देकर दफनाया जाएगा।
प्रतीकात्मक रूप से देखें तो यह अंतिम यात्रा उसी स्थान पर समाप्त होगी, जहां धार्मिक आस्था, राष्ट्रीय पहचान और अली ख़ामेनेई के जीवन की व्यक्तिगत यात्रा एक-दूसरे से मिलती हैं।