
मिड डे मील से अंडा हटाने पर क्यों विवाद होता है? (Photo: IANS)
Mid Day Meal Egg Controversy : भारत में स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने और स्कूलों में नामांकन एवं उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई मिड डे मील योजना (अब इसका नाम पीएम पोषण योजना हो चुका है) दुनिया के सबसे बड़े स्कूल पोषण कार्यक्रमों में से एक है। इस योजना के तहत करोड़ों बच्चों को स्कूल में गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, कुछ राज्यों में इसे मिड डे मील में देना बंद कर दिया गया है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता में आई बीजेपी सरकार ने भी स्कूली बच्चों के मिड डे मील (PM POSHAN scheme) में से अंडा हटाकर शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसने के आदेश दे दिए। अब राज्य के 1800 स्कूलों के लिए मिड डे मील पकाने और वितरित करने की जिम्मेदारी इस्कॉन (ISKCON) को दे दी गई है। मिड डे मील के तहत इस्कॉन (ISKCON) से जुड़ी संस्थाएं, विशेष रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन (Akshaya Patra Foundation) और कुछ राज्यों में अन्नमित्र फाउंडेशन (Annamrita Foundation), कई राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में भोजन तैयार और वितरित करती रही हैं। इस्कॉन प्रशासन के अनुसार, 8 राज्यों के 20 से अधिक शहरों के 12 लाख से ज्यादा स्कूलों में मिड डे मिल की व्यवस्था की जा रही है।
मिड डे मील योजना की फंडिंग केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में होती है। नई नीति के अनुसार, प्रति छात्र मील पर लागत 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। बीते कुछ वर्षों में इस योजना में अंडा (Egg) शामिल करने को लेकर कई राज्यों में बहस हुई है। कुछ राज्यों ने इसे बच्चों के पोषण के लिए आवश्यक मानते हुए नियमित रूप से मेन्यू में शामिल किया, जबकि कुछ राज्यों में धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक कारणों से अंडा नहीं दिया गया या बाद में बंद कर दिया गया। मिड डे मील से अंडा हटाने की शुरुआत सबसे पहले कर्नाटक से शुरू हुई थी। फिलहाल, 28 में से 14 राज्यों के स्कूलों में दोपहर के भोजन में अंडा मिलना बंद हो चुका है। कुछ राज्यों ने धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से अंडे को मिड डे मील में शामिल नहीं किया। इन राज्यों में अंडे के स्थान पर दूध, केला, मूंगफली, दाल, सोया या अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ देने की व्यवस्था की गई।
| क्र. सं. | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | मिड डे मील में अंडों की स्थिति |
|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 2 | गुजरात | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 3 | मध्य प्रदेश | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 4 | राजस्थान | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 5 | महाराष्ट्र | 🟠 अंडा दिया जाता था (सरकार ने फंडिंग बंद कर दी) |
| 6 | असम | ✅ अंडा दिया जाता है |
| 7 | हरियाणा | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 8 | पश्चिम बंगाल | ❌ अंडा देना बंद / हटाया गया |
| 9 | ओडिशा | ✅ अंडा दिया जाता है |
| 10 | उत्तराखंड | ✅ अंडा दिया जाता है |
| 11 | छत्तीसगढ़ | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 12 | गोवा | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 13 | त्रिपुरा | ✅ अंडा दिया जाता है |
| 14 | अरुणाचल प्रदेश | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 15 | मणिपुर | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 16 | दिल्ली (केंद्रशासित प्रदेश) | ❌ अंडा नहीं दिया जाता |
| 17 | बिहार | ✅ अंडा दिया जाता है |
भारत में बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और प्रोटीन की कमी लंबे समय से गंभीर समस्या रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार देश में बड़ी संख्या में बच्चों में बौनापन, कम वजन और एनीमिया से प्रभावित हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, 5 वर्ष से कम आयु के 32.1% (लगभग हर तीसरा) बच्चे कम वजन (अंडरवेट) के हैं और 35.5% बच्चे बौनेपन (स्टंटिंग) का शिकार हैं।
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि अंडा सस्ता, आसानी से उपलब्ध और उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन स्रोत है। इसमें प्रोटीन के अलावा आयरन, विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन बी-12, फोलेट और आवश्यक वसा भी होती है। इसी वजह से कई राज्यों ने स्कूल भोजन में अंडा शामिल किया।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) और कई सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत है कि बच्चों के आहार में पर्याप्त प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व होने चाहिए। अंडा इन आवश्यकताओं को पूरा करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है, हालांकि यह भी स्वीकार किया जाता है कि संतुलित शाकाहारी विकल्पों से भी पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है, यदि उनकी गुणवत्ता और मात्रा पर्याप्त हो।
भारत के कई राज्यों ने अलग-अलग समय पर अंडे को मिड डे मील का हिस्सा बनाया। मिड-डे मील (Mid Day Meal) में सबसे पहले बच्चों को अंडा परोसने की शुरुआत तमिलनाडु में हुई थी। यह ऐतिहासिक कदम जून 1989 में एम. करुणानिधि की सरकार के दौरान उठाया गया था। शुरुआत में इसे हर 15 दिन में एक बार दिया जाता था। हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने बच्चों में पोषण को बढ़ावा देने के लिए अंडे को हफ्ते में 3 बार और फिर 2010 में सभी कार्य दिवसों (Working days) तक बढ़ा दिया गया। कई राज्यों में सप्ताह में एक से पांच दिन तक अंडा भोजन में दिया जाता रहा है। कुछ राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसकी संख्या तय की गई। हालांकि, अब कई राज्यों में से अब भोजन से अंडे हटाए जा चुके हैं।
इस विवाद के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं-
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत स्कूलों में निर्धारित पोषण मानकों वाला भोजन उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और कई पोषण विशेषज्ञ समितियों ने समय-समय पर सुझाव दिया है कि जिन क्षेत्रों में बच्चों में कुपोषण अधिक है, वहां अंडा या समान पोषण वाला विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
Published on:
02 Jul 2026 04:04 pm
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