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Rajasthan Land Registry Process : राजस्थान में जमीन की रजिस्ट्री अब पूरी तरह डिजिटल, जानें पूरी प्रक्रिया

Rajasthan Land Registry Process : राजस्थान में जमीन, मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री कराना अब हुआ बेहद आसान। जानिए ePanjiyan 3.0 पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन, e-GRAS पर शुल्क भुगतान और स्लॉट बुकिंग की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया।
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Jul 17, 2026
Rajasthan Land Registry Process
Rajasthan Land Registry Process : राजस्थान में कैसे करें जमीन की रजिस्ट्री, PC- Patrika

Rajasthan Land Registry Process : राजस्थान में जमीन, प्लॉट, मकान या फ्लैट खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्री कराना कानूनी रूप से सबसे जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है। रजिस्ट्री के जरिए ही संपत्ति का स्वामित्व आधिकारिक रूप से खरीदार के नाम दर्ज होता है। राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक ऑनलाइन कर दिया है, जिससे नागरिक घर बैठे मूल्यांकन से लेकर शुल्क भुगतान तक के कई चरण पूरे कर सकते हैं। हालांकि अंतिम सत्यापन और पंजीकरण के लिए अब भी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय जाना अनिवार्य है।

रजिस्ट्री से पहले क्या जांचें

संपत्ति खरीदने से पहले खरीदार को कुछ जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड जरूर जांच लेने चाहिए। इनमें विक्रेता का स्वामित्व रिकॉर्ड, जमाबंदी-खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि, भूमि पर किसी तरह के विवाद या रोक की स्थिति, कृषि और गैर-कृषि भूमि का वर्गीकरण, बैंक ऋण या बंधक की जानकारी, और संबंधित इलाके की DLC (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरें शामिल हैं। राजस्थान में भूमि रिकॉर्ड की जांच के लिए 'अपना खाता' पोर्टल और पंजीयन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

चरण 1: पोर्टल पर पंजीकरण

रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए सबसे पहले नागरिक को राज्य सरकार के ePanjiyan पोर्टल पर पंजीकरण कराना होता है। यहां एक जरूरी बात ध्यान रखनी चाहिए। पुराना पोर्टल epanjiyan.rajasthan.gov.in अब मुख्यतः DLC दरें, नोटिफिकेशन और सामान्य जानकारी देखने के लिए इस्तेमाल होता है। नागरिकों के लिए वास्तविक पंजीकरण, लॉगिन और आवेदन का काम अब ePanjiyan 3.0 नाम के अपडेटेड सिस्टम पर होता है, जो citizenepanjiyan.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यही मौजूदा आधिकारिक पोर्टल है जहां से आवेदन प्रक्रिया शुरू होती है। पंजीकरण के लिए मोबाइल नंबर और OTP का इस्तेमाल किया जाता है।

चरण 2: संपत्ति का मूल्यांकन

पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद संपत्ति का ऑनलाइन मूल्यांकन (वैल्यूएशन) किया जाता है। इसके लिए आवेदक को संपत्ति का प्रकार चुनना होता है, स्थान और क्षेत्रफल दर्ज करना होता है, और उस इलाके की DLC दर के आधार पर संपत्ति का मूल्य स्वतः निर्धारित हो जाता है। इसी मूल्य के आधार पर आगे स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क तय होता है। ePanjiyan 3.0 में एक नई सुविधा भी जोड़ी गई है। जियो-लोकेशन के आधार पर DLC दर चुनने का विकल्प, जिससे मैनुअल जोन चयन में होने वाली गलतियां कम हुई हैं।

चरण 3: दस्तावेज और पक्षकारों की जानकारी

ऑनलाइन आवेदन में खरीदार और विक्रेता का पूरा विवरण, गवाहों की जानकारी, संपत्ति का विस्तृत ब्योरा, विक्रय विलेख (सेल डीड) जैसे दस्तावेज, और जरूरी कागजातों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होती है। यह जानकारी भरने के बाद सिस्टम स्वतः एक CRN यानी सिटीजन रेफरेंस नंबर जारी करता है। यह नंबर आगे की पूरी प्रक्रिया… भुगतान, स्टेटस ट्रैकिंग और टाइम स्लॉट बुकिंग में इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे संभालकर रखना जरूरी है।

चरण 4: स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क का भुगतान

राजस्थान में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान e-GRAS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन किया जाता है। इसके लिए नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या बैंक चालान जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। ePanjiyan और e-GRAS के बीच अब सीधी API इंटीग्रेशन भी है, जिससे शुल्क की गणना और भुगतान की जानकारी अपने आप सिंक हो जाती है। भुगतान की रसीद को आवेदन में जोड़ना जरूरी होता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि भुगतान हमेशा e-GRAS के जरिए ही किया जाए, न कि सीधे ePanjiyan पर, क्योंकि इससे कई बार आवेदन में देरी की समस्या आ जाती है।

चरण 5: टाइम स्लॉट बुकिंग

ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होने के लिए समय स्लॉट बुक करना होता है। इसके लिए पोर्टल पर CRN दर्ज करते ही रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाता है, जिसे भरने के बाद उपलब्ध तारीखों में से एक चुनकर स्लॉट बुक किया जा सकता है।

चरण 6 और 7: कार्यालय जाना और दस्तावेज सत्यापन

निर्धारित तिथि और समय पर खरीदार, विक्रेता और गवाहों को मूल दस्तावेजों के साथ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचना होता है। वहां अधिकारी दस्तावेजों की जांच करते हैं, भुगतान की पुष्टि करते हैं, और संपत्ति के विवरण का मिलान किया जाता है। अगर किसी तरह की कमी पाई जाती है तो आवेदन को सुधार के लिए वापस भेजा जा सकता है।

चरण 8: बायोमेट्रिक और फोटो

सत्यापन के बाद खरीदार, विक्रेता और गवाहों की फोटो ली जाती है और अंगूठे के निशान लिए जाते हैं। इसी चरण में सभी पक्षकारों के हस्ताक्षर भी दर्ज किए जाते हैं, जिसके बाद दस्तावेज का अंतिम अनुमोदन होता है।

चरण 9: रजिस्ट्री पूर्ण

सब-रजिस्ट्रार दस्तावेज को आधिकारिक रूप से पंजीकृत करते हैं और उस पर हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद आवेदक को SMS के जरिए सूचना भेजी जाती है, पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है, और भविष्य के रिकॉर्ड के लिए इसे स्कैन कर सुरक्षित रखा जाता है। इसके साथ ही रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाती है। एक सामान्य विक्रय विलेख के लिए यह पूरी प्रक्रिया आवेदन से लेकर अंतिम पंजीकरण तक आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लेती है।

रजिस्ट्री के बाद क्या करें

रजिस्ट्री हो जाने के बाद केवल दस्तावेज हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को नामांतरण यानी म्यूटेशन जरूर करवाना चाहिए, ताकि राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके। इसके अलावा नई जमाबंदी की प्रति भी हासिल करनी चाहिए। ये दोनों कदम संपत्ति पर कानूनी स्वामित्व को और मजबूत बनाते हैं।

जरूरी दस्तावेजों की सूची

रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन आधार (यदि उपलब्ध हो), पासपोर्ट साइज फोटो, विक्रय विलेख, भूमि रिकॉर्ड यानी जमाबंदी-खसरा, गवाहों के पहचान पत्र और भुगतान रसीद जैसे दस्तावेज साथ रखना जरूरी है।

Updated on:
17 Jul 2026 04:14 pm
Published on:
17 Jul 2026 04:14 pm