महासमुंद

Chhattisgarh Monsoon 2026: महासमुंद की खुशखबरी- ट्रिपल सिस्टम से मानसून कोटा पूरा, केशवा जलाशय 6 साल बाद ओवरफ्लो की राह पर

Monsoon 2026 Mahasamund: महासमुंद में इस बार मानसून ने बारिश के सारे पुराने अनुमान पीछे छोड़ दिए हैं। अगस्त खत्म होने से पहले ही जिले में पूरे मानसून सीजन की सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हो गया है।
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Monsoon Trough
वक्त से पहले ही बरस गया मानसून का पूरा कोटा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Mahasamund Monsoon Quota: इस बार मानसून ने महासमुंद को पानी की कमी का मौका ही नहीं दिया। बादलों ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि अगस्त खत्म होने से पहले ही पूरे सीजन में होने वाली सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हो गया।

कहीं खेतों में धान की फसल के ऊपर तक पानी चढ़ आया है, तो कहीं वर्षों से पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे जलाशय लबालब हो उठे हैं। एक जून से 25 अगस्त तक 1016 मिमी वर्षा दर्ज हो चुकी है, जबकि पूरे मानसून सीजन में 993 मिमी बारिश का अनुमान था। छह साल बाद केशवा जलाशय का 36 फीट तक भरना इस बदले मौसम की सबसे बड़ी तस्वीर है। पानी की इस भरपूर आमद ने जलस्रोतों को नई जिंदगी दी है, लेकिन खेतों में पानी का ठहराव किसानों के लिए परेशानी बन गया है। अब महासमुंद जिले में बारिश से ज्यादा नजर इस बात पर है कि खेतों का पानी कब उतरेगा और फसल कितनी सुरक्षित रह पाएगी।

बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने मानसूनी गतिविधियों को ताकत दी। इसके साथ अमृतसर से पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैली मानसून द्रोणिका सक्रिय रही। उत्तर प्रदेश से ओडिशा तक बनी एक अन्य द्रोणिका का प्रभाव भी जिले के मौसम पर पड़ा। इन्हीं मौसमी परिस्थितियों के चलते लगातार झमाझम बारिश का दौर बना रहा।

इस वर्ष बारिश सामान्य से अधिक

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष बारिश सामान्य स्थिति से अधिक रही है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में औसत से कम वर्षा का सिलसिला रहा था। मानसून शुरू होने से पहले भी इस बार कम बारिश की आशंका जताई गई थी, लेकिन अगस्त आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अच्छी वर्षा का असर जलस्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कोडार बांध करीब दो सप्ताह पहले ही भर चुका है।

छह साल बाद केशवा में 36 फीट पानी

इस मानसून की सबसे बड़ी उपलब्धियों में जिले के जलाशयों का भरना भी शामिल है। कोडार बांध में पर्याप्त जलभराव पहले ही हो चुका है। इसके बाद केशवा जलाशय ने भी छह साल बाद पूर्ण भराव का स्तर छुआ है। केशवा में पानी 36 फीट तक पहुंचने से जलस्रोत की स्थिति मजबूत हुई है।

हालांकि, लगातार बारिश के बीच बांधों और जलाशयों के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासनिक अमला सतर्क है। संभावित जलभराव और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नदी-नालों में उफान के कारण ग्रामीण और निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मानसून सीजन का एक महीना और बाकी है।

पिथौरा सबसे आगे वर्षा

एक जून से अब तक पिथौरा 1187 मिमी के साथ सबसे आगे है। सरायपाली में 1178, बसना में 1011, बागबाहरा में 922, महासमुंद में 936 और कोमाखान में 864 मिमी वर्षा हुई। 25 अगस्त को महासमुंद में 66, सरायपाली में 44, बसना में 37, बागबाहरा में 32 और कोमाखान में 30 मिमी वर्षा हुई। पिथौरा में 23.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

Updated on:
26 Aug 2026 01:23 pm
Published on:
26 Aug 2026 01:12 pm
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