
पनीर के बाद अब मिठाइयों पर नजर (फोटो सोर्स- pixabay)
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन की मिठास पर मिलावट का साया है और निगरानी की व्यवस्था अभी समय से पीछे चल रही है। त्योहार में चार दिन शेष हैं, बाजार में मिठाइयों की बिक्री शुरू हो चुकी है और खाद्य सुरक्षा विभाग अब नमूने लेने जा रहा है। इनकी रिपोर्ट करीब 14 दिन बाद आएगी। यानी जिस मिठाई की शुद्धता जांची जाएगी, उसके बिकने और खाए जाने के बाद ही उसका सच सामने आने की संभावना है।
त्योहारी दिनों में मिठाइयों की खपत सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ उत्पादन भी तेज हो जाता है। मावा, खोआ, तैयार मिठाइयों के साथ पैक्ड और ब्रांडेड उत्पाद भी जांच के दायरे में रहेंगे। विभाग की टीम प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए राजधानी स्थित प्रयोगशाला भेजेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तय होगी और गड़बड़ी मिलने पर संबंधित संचालक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अधिकांश दुकानदार त्योहार से तीन-चार दिन पहले बड़ी मात्रा में मिठाइयां बनाना शुरू करते हैं। इसी वजह से विभाग की टीम चार-पांच दिन पहले नमूने लेने की तैयारी करती है। ब्रांडेड मिठाइयों के नमूने भी लिए जाएंगे।
नमूना लिए जाने के बाद प्रयोगशाला की प्रक्रिया पूरी होने में करीब 14 दिन लगते हैं। तब तक संबंधित बैच की मिठाइयां बिक जाने की पूरी संभावना रहती है। यदि बाद में जांच में गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो कार्रवाई उस उत्पाद की बिक्री हो जाने के बाद होती है। ऐसे में मिलावट की रोकथाम के बजाय कार्रवाई की प्रक्रिया बाद की स्थिति तक सीमित रह जाती है।
रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर मिष्ठान दुकानों में सुबह से रात तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। कई प्रतिष्ठानों में मांग के अनुरूप लगातार उत्पादन किया जाता है। भीड़ और अधिक बिक्री के बीच घटिया या मिलावटी सामग्री बाजार में पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है।
हर सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग अलग-अलग खाद्य पदार्थों की जांच करता है। त्योहार के दौरान मिठाइयों पर विशेष निगरानी रखी जाती है। विभाग का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नमूने प्रयोगशाला भेजे जाते हैं और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मानक से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होती है।
खाद्य सुरक्षा अभिहित अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि त्योहार से पहले बड़ी मात्रा में मिठाई तैयार किए जाने के कारण अभियान के तहत नमूने चार-पांच दिन पहले लिए जाते हैं। मावा, खोआ, मिठाई तथा ब्रांडेड उत्पादों की भी जांच की जाएगी। नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रयोगशाला भेजा जाता है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
ग्राहक आमतौर पर रंग, स्वाद, कीमत और दुकान की प्रतिष्ठा देखकर मिठाई चुनता है। उसे यह जानकारी आसानी से नहीं मिलती कि इस्तेमाल किए गए मावा, खोआ या अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कब हुई थी। खुले में रखे उत्पादों के मामले में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
कई दुकानों में तैयार माल को लंबे समय तक बिक्री के लिए रखा जाता है। ग्राहकों को निर्माण की तारीख, उपयोग की सुरक्षित अवधि और भंडारण संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। पैक्ड और ब्रांडेड उत्पादों पर विवरण मिल जाता है, लेकिन होटल और मिष्ठान प्रतिष्ठानों में तैयार खुली मिठाइयों की सीमित जानकारी रहती है।
त्योहार आते ही मिठाई कारोबार का असर दुकानों के बाहर तक दिखाई देने लगता है। कई प्रतिष्ठानों के संचालक बिक्री बढ़ने की संभावना को देखते हुए सड़क किनारे अतिरिक्त जगह घेर लेते हैं। कहीं टेंट लगाया जाता है तो कहीं सामान और काउंटर सड़क तक पहुंच जाते हैं। इससे पैदल चलने वालों के साथ छोटे-बड़े वाहनों को भी दिक्कत होती है। मुख्य मार्गों पर स्थिति तब और खराब हो जाती है, जब भारी वाहन आमने-सामने आ जाते हैं। सड़क का उपलब्ध हिस्सा कम होने से जाम की स्थिति बनती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की लगातार कार्रवाई से होटल और मिष्ठान कारोबारियों में हलचल है। पिछले कुछ दिनों में पनीर को लेकर कई जगह जांच और कार्रवाई की गई है। अब रक्षाबंधन के मद्देनजर मिठाइयों के नमूने लिए जाने की तैयारी से संचालकों की चिंता बढ़ी है।
होटल, मिष्ठान भंडार और किराना प्रतिष्ठानों में उपलब्ध ब्रांडेड मिठाइयों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। जांच में खाद्य सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरने पर विभाग नियमानुसार कार्रवाई करता है। गंभीर मामलों में लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान भी लागू किया जा रहा है। पिछले दिनों भी कार्रवाई की गई थी।
Updated on:
24 Aug 2026 06:23 pm
Published on:
24 Aug 2026 06:23 pm
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