जिन लोगों को सरकार ने आम जन की सहायता के लिए नियुक्त किया है, वह अधिकारी अपने पद की आड़ लेकर भ्रष्टाचार की जड़ों में पानी सिजते हुए
महासमुंद/बागबाहरा. जिन लोगों को सरकार ने आम जन की सहायता के लिए नियुक्त किया है, वह अधिकारी अपने पद की आड़ लेकर भ्रष्टाचार की जड़ों में पानी सिजते हुए, आम लोगों को ठग रहा है। कोमाखान अंतर्गत बागबाहरा तहसील में एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां भ्रष्टाचार निरोधक दल ने बागबाहरा तहसील इलाके में एक महिला पटवारी को 10 हजार रुपए घुस लेते हुए धर दबोचा।
भ्रष्टाचार निरोधक के हवाले से जानकारी है कि ग्राम घोयनाबाहरा पह कोमाखान, महासमुन्द जिले के खल्लारी राजस्व मंडल तहसील बागबाहरा में पटवारी के पद पर काम करने वाली कुमारी नंदा साहू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवादी नागेन्द्र ठाकुर ने जमीन का पटटा बनाने के लिए उसके चचेरे भाई मनीश ठाकुर से 20 हजार रूपए की पटवारी ने मांग की थी। जब उसने इतनी ज्यादा रकम देने में परेशानी जाहिर की तो 15 हजार रुपए में सहमति बनी। नागेन्द्र ठाकुर और पटवारी के बीच 5 हजार रुपए पहले और बाकी 10 हजार रुपए जमीन की ऋण पुस्तिका मिलने के बाद देने की बात तय हुई। इसके बाद नागेन्द्र ठाकुर ने पटवारी तथा इसके बीच रुपए के लेन देन के सबंध में हुए संवाद की रिकार्डिंग के साथ पटवारी कुमारी नंदा साहू के रिश्वत मांगने की शिकायत रायपुर एण्टी करप्शन विभाग में की थी। जिस पर एण्टी करप्शन विभाग ने उपअधीक्षक सोहेब खान के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम का गठन कर जॉच सौंपी।
कोमाखान पहुंची टीम ने केमिकल लगे नोट पीडि़त किसान नागेन्द्र ठाकुर को दिए। नागेन्द्र ठाकुर ने केमिकल लगे नोट पटवारी कुमारी नंदा साहू को दिया और उसके बदले जमीन की ऋण पुस्तिका हासिल की। पटवारी ने जैसे ही नोट गिनना शुरू किया, तभी टीम के सदस्यों ने उसे रंगे हाथ धर दबोचा । एंटी करप्शन की टीम जब कार्रवाई कर रही थी तो कुमारी नंदा साहू बार-बार मुंह पर हाथ रख रही थी। उसके चेहरे की हवाईयां उड़ी थी। इस दौरान वह चुपचाप बैठी रही। मामले में आवश्यक कार्रवाई व लिखा पढ़ी करने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पटवारी नंदा साहू के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और विवेचना पूरी होने तक बहरहाल पटवारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। नंदा साहू की गिरफ्तारी से पूरे तहसील के राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया।
कोमाखान के किसान नागेन्द्र ठाकुर और उसके चचेरे भाई मनीश ठाकुर परेशान थे। लेकिन उन्होंने अपने आप को भ्रष्ट सिस्टम के आगे समर्पित करने की बजाय, सच्चाई की लड़ाई लड़ी। नतीजा है कि नंदा साहू जैसी अधिकारी एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की चपेट में आई है।