भाजपा सरकार में हो रही है गांधी के सिद्धांतों की हत्या- ईश्वर चंद्र
महराजगंज. महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर उनके प्रासांगिकता को हाईजैक करने की होड़ राजनीतिक दलों में मची हुई है। इस होड़ में फिलहाल अभी तक भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। महात्मा गांधी की पहचान सत्य अहिंसा और भेदभाव रहित समाज निर्माण की रही है लेकिन बदले हुए राजनीतिक परिदृष्य में गांधी जी केवल स्वच्छता के प्रतीक बनकर रह गए हैं।
जाहिर है दो अक्टूबर को गांधी जी के 150 वीं जयंती को सरकार की ओर से भव्य रूप से मनाए जाने की तैयारी है। सरकार के ऐसे आयोजनों में जगह जगह झाड़ू की धूम रहेगी। इसका सिलसिला अभी से शुरू हो गया है। नगर निकायों को इसके लिए भव्य तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। लखनऊ और दिल्ली में भी झाड़ू प्रदर्शन का बड़ा ओयोजन होगा। वहीं विपक्ष यानी कांगे ने इस अवसर पर गांधी की प्रासंगिकता को पुर्नजीवित करने के लिए प्रभात फेरी की शुरूआत की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने पिछले दिनों राजधानी से इसकी भव्य शुरूआत की है। यह सिलसिला अब विधानसभा क्षेत्रों तक पंहुच गया है। कांग्रेसी इसी बहाने स्वयं को सक्रिय करने की कसरत भी कर रहे हैं। कांग्रेस की यह कसरत यूपी में लोकसभा चुनाव में स्वयं की हैसितय का मूल्यांकन भी हो सकता है।
बहरहाल शनिवार को महराजगंज जिले के फरेंदा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की प्रभातफेरी संख्या बल के हिसाब से भले ही फीकी रही हो लेकिन जो सवाल उठाए गए उसकी चर्चा हर जुबान पर रही। प्रभातफेरी का नेतृत्व पूर्व विधायक ईश्वरचंद्र शुक्ल कर रहे थे। इसमें महराजगंज जिले के कांग्रेस के नामचीन नेता भी मौजूद थे। प्रदेश महासचिव विरेंन्द्र चौधरी, जिला अध्यक्ष आलोक प्रसाद, पूर्व जिलाध्यक्ष त्रिभुवन मिश्र,वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरविंद मिश्र हृदय पांडेय आदि। प्रभात फेरी का माध्यम से कांग्रेस का संदेश था कि वे गांधी जी के सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने के संदेश को पुर्नजीवित करने के लिए संर्घष कर रहे हैं और महात्मा के इस सिद्धांत की हत्या नहीं होने देंगे जो इस सरकार में लगातार हो रही है।
सिद्धार्थनगर के पूर्व कांग्रेस विधायक ईश्वर चंद्र शुक्ल ने आज ही घटित प्रदेश की दो घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की और ऐसी ही घटनाओं के जरिए गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत को कुचलने की सरकारी कोशिश करार दिया। पहली घटना जिसकी पूरा प्रदेश निंदा कर रहा है, वह है लखनऊ में विवेक तिवारी की पुलिस द्वारा की गई हत्या और दूसरी घटना गाजीपुर में बदमाशों की सरेआम पिटाई से एक युवक की मौत। इस हत्या को गाजीपुर पुलिस दुर्घटना में मौत बताने पर तुली हुई है जबकि इस मौत को कई लोगों ने हमलावरों के हमले से मरते हुए देखा।
पूर्व विधायक शुक्ल ने कहा कि दोनों ही घटनाओं में समानता यह है कि एक को पुलिस ने मार गिराया और दूसरे को पुलिस हत्या मानने को तैयार नहीं है। कहा कि सरकार की पुलिस जब ऐसे कृत्यों पर उतर आती है तो इसे ही सरकारी संरक्षण में गांधी के विचारों की हत्या कहते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के 150 वीं जयती पर पूरे देश में कांगे्रस के प्रभातफेरी का मक्शद यही है कि लोगों को बताया जाय कि सरकार एक ओर ऐसे ही कारनमों से महात्मा गांधी के विचारों व उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को कुचल रही है जबकि दूसरी ओर उनके तस्वीरों का इस्तेमाल कर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश जानता है कि भाजपा का गांधी से नहीं उनके हत्यारों से प्रेम है लेकिन वह यह भी जानती है कि गांधी को नकारा तो देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।