रूसी बिजनेस टायकून रोमन अब्रामोविच भले ही आज खुद को एक सक्सेस बिजनेस पर्सनैलिटी के रूप में स्थापित कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने जिंदगी के हर कदम पर विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है।
अक्सर लोग दुनिया के रईसों को देखकर सोचते हैं कि ये तो मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। लेकिन आपको बता दें कि जो भी आज सफल हैं, उनमें से आधे से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके मामले में यह बात सटीक नहीं बैठती। दरअसल, बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपनी किस्मत तमाम संघर्षों का सामना करते हुए कड़ी मेहनत और लगन से लिखी है। ऐसा ही एक नाम है रूसी बिजनेस टायकून रोमन अब्रामोविच का। रोमन भले ही आज खुद को एक सक्सेस बिजनेस पर्सनैलिटी के रूप में स्थापित कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने जिंदगी के हर कदम पर विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है।
वर्ष 1966 में रूस के सारतोव में रोमन का जन्म हुआ था। उनके पिता स्टेट ऑफिस मैनेजर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थी। रोमन अपनी चार साल की उम्र से पहले ही अनाथ हो गए थे। उनका लालन-पोषण उनके अंकल और ग्रैंड पैरेंट्स ने किया। उनकी जिंदगी गरीबी में गुजरी। थोड़े समय के लिए सेना में सेवा करने से पहले रोमन दो अलग-अलग कॉलेजों से ड्रॉपआउट रहे। सोवियत आर्मी में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के बाद रोमन ने ओल्गा से शादी की। फिर उन्होंने पहला काम स्ट्रीट वेंडर के रूप में किया और इसके बाद उन्होंने स्थानीय कारखाने में मैकेनिक के रूप में काम किया। यहां तक कि उन्होंने रबर डक्स भी बेचे।
1988 में पेरेस्ट्रॉइका ने सोवियत संघ में प्राइवेटाइजेशन के अवसर खोले। रोमन और उनकी पत्नी ओल्गा ने डॉल्स बनाने वाली कंपनी शुरू की। कुछ सालों के भीतर उनकी संपत्ति तेल समूहों से लेकर पिग फाम्र्स तक फैल गई। उन्होंने अन्य व्यवसायों में भी निवेश करना शुरू कर दिया। 1995 में रोमन और बोरिस बेरेजोवस्की ने बड़ी तेल कंपनी सिबनेट में कंट्रोलिंग इंटरेस्ट हासिल कर लिया। बोरिस प्रेसिडेंट बोरिस येल्तसिन के सहयोगी थे। हालांकि यह सौदा विवादास्पद भी रहा।
30 वर्ष की उम्र तक रोमन रिच और पॉलिटिकली वेल-कनेक्टेड पर्सन बन चुके थे। 1999 में वह रूस के रिमोट चोकोटका के पूर्वी प्रांत के गवर्नर चुने गए। इस तरह वह सफल बिजनेसमैन, इन्वेस्टमेंट और पॉलिटिशियन बन गए। आज वह दुनियाभर में इन्वेस्टमेंट कंपनी मिलहाउस कैपिटल और फुटबॉल क्लब चेल्सिया एफसी समेत बहुत सी कंपनियों के ओनर के रूप में पहचान रखते हैं। उनका मानना है कि आपका गोल ही आपकों जिताता है। उन्होंने हमेशा हार्डवर्किंग और प्रैग्मैटिक बने रहने पर फोकस किया।