
Career Tips: आजकल वर्क एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए स्टूडेंट्स कई बड़ी कंपनियों में फुलटाइम जॉब की बजाय शॉर्ट टर्म के लिए ट्रेनिंग करना पसंद कर रहे हैं। इनकी खास बात है कि इस तरह की इंटरर्नशिप ट्रेनिंग के लिए कैंडिडेट को मासिक तौर पर स्टाइपेंड भी दिया जाता है। इंटरर्नशिप दो माह से लेकर 6-8 माह तक की भी हो सकती है। मैनेजमेंट से लेकर टेक्नीकल, कम्प्यूटिंग आदि से लेकर पत्रकारिता के क्षेत्र में भी इस तरह की ट्रेनिंग का मौका पाया जा सकता है। कुछ मददगार टिप्स भी हैं जिन्हें फॉलो कर आप कुछ माह की इंटरर्नशिप ट्रेनिंग को फुल टाइम जॉब में तब्दील कर सकते हैं। जानें इस बारे में-