
केंद्रीय जनजाति मामलात मंत्रालय और फेसबुक ने हाल ही एक पार्टनरशिप प्रोग्राम शुरू किया है। गोल (गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स) नामक इस प्रोग्राम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जनजातीय युवाओं को डिजिटल मोड के माध्यम से मेंटरशिप उपलब्ध करवाई जाएगी। इस तरह से जनजातीय युवाओं की छुपी हुई प्रतिभा को बाहर लाने में मदद मिलेगी। इससे उनके व्यक्तित्व का विकास होगा और वे अपने समाज को आगे ले जाने में सक्रिय तथा सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे। कोरोना महामारी के बाद की स्थितियों में डिजिटल साक्षरता का महत्व काफी बढ़ गया है। इससे आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जुडऩे का अच्छा अवसर मिल सकेगा।
आगे बढऩे के नए रास्ते सीखेंगे
इस प्रोग्राम का उद्देश्य पांच हजार आदिवासी युवाओं को डिजिटल स्किल्ड बनाना है। इससे वे घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार को समझकर बिजनेस करने के नए रास्ते सीख सकेंगे। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आदिवासी युवक और युवतियां उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मधुमक्खी पालन, आदिवासी कला व संस्कृति, चिकित्सकीय औषधियों और उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों के बारे में मेंटरशिप से स्किल व ज्ञान प्राप्त कर पाएंगे। पांच हजार युवाओं को प्रशिक्षण देने के बाद भी इस प्रोग्राम का विस्तार किया जा सकेगा और आदिवासी युवाओं को अपने लक्ष्य हासिल करने में मदद की जाएगी।
कर सकते हैं आवेदन
इस तरह के यूनीक प्रोग्राम से आदिवासी युवा अपनी प्रतिभा को संवार सकेंगे और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इस बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए आप वेबसाइट http://goal.tribal.gov.in/ पर जा सकते हैं। यहां आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2020 है। इंडस्ट्री और अकादमिक लीडर्स भी मेंटर के रूप में यहां पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इस प्रोग्राम के तहत 28 सप्ताह की मेंटरशिप होगी और 8 सप्ताह की इंटर्नशिप। यह प्रोग्राम खासतौर पर तीन क्षेत्रों पर फोकस करेगा- डिजिटल स्किल्स, लाइफ स्किल्स और एंटरप्रेन्योरशिप।