
मंदसौर। पिता के हाथों में औजार थे और आंखों में बेटी के सुनहरे भविष्य का सपना। मेहनत-मजदूरी से परिवार चलाने वाले पिता समरथ माली ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी आशा माली के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। उनकी इसी उम्मीद, परिवार के विश्वास और आशा की अथक मेहनत ने अब सफलता का रूप ले लिया है। मंदसौर जिले के लोध गांव की आशा का चयन भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज में हुआ है। बेटी के डॉक्टर बनने की दिशा में बढ़े इस कदम से परिवार में खुशियों की लहर है और गांव भी अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
आशा के पिता समरथ माली मिस्त्री का काम करते हैं। मेहनत से परिवार का पालन-पोषण करने वाले पिता के लिए बेटी की पढ़ाई और उसके सपनों को पूरा करना एक बड़ी जिम्मेदारी थी। आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन बेटी को आगे बढ़ाने का हौसला कम नहीं हुआ। माता-पिता ने हर कदम पर आशा का साथ दिया और उसे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।
आशा ने भी परिवार के इस भरोसे को अपनी ताकत बनाया। कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास और उचित मार्गदर्शन के सहारे उसने डॉक्टर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। उसकी उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि परिस्थितियां कठिन हों, तब भी मजबूत इरादे और परिवार का साथ सपनों को साकार करने की राह खोल सकते हैं।
आशा की सफलता से उत्साहित अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट की टीम उसके घर पहुंची। यहां आशा और उसके परिवार का सम्मान किया गया। टीम ने आशा को माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उसकी उपलब्धि की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने प्रसन्नता जताते हुए टीम का आभार व्यक्त किया।
गांव के सरपंच रामचंद्र गायरी ने आशा की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि वह पूरे गांव के लिए प्रेरणास्रोत है। उसकी सफलता से दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला मिलेगा।