मंदसौर

एमपी में ‘सब-इंस्पेक्टर’ ने ली थी 30 हजार की रिश्वत, अब हुई 5 साल की जेल

MP News: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के सब-इंस्पेक्टर ने 30 हजार रूपये की रिश्वत ली थी। जिसमें कोर्ट ने अब 5 साल की सजा सुनाई है।

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Feb 26, 2026
फोटो सोर्स- पत्रिका

MP News: मध्य प्रदेश के मंदसौर की विशेष न्यायाधीश महोदय ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमें सेंट्रल ब्युरो नारकोटिक्स ने तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर मधुसुदन पाठक को रिश्वत लेने के मामले में दोषी पाते हुए 5 साल की सजा और जुर्माना लगाया है।

दरअसल, अभियोजन मीडिया प्रभारी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी बलराम सोलंकी ने बताया कि 30 जुलाई 2016 को नारकोटिक्स प्रकोष्ठ मंदसौर विंग ने राजस्थान के सुखलाल कुमावत के खिलाफ अफीम का केस बनाया था। जिसमें सुखलाल के द्वारा बताया गया था कि पप्पु पण्डित उर्फ कमलदास बैरागी से मादक पदार्थ लेकर आया है। जिसकी विवेचना नारकोटिक्स प्रकोष्ठ मंदसौर विंग ने की थी। उसमें नारकोटिक्स पुलिस आवेदक मुकेश बैरागी निवासी मिडलाखेडा मंदसौर के घर पर आई थी।

पिता को झूठे आरोप में फंसाने की कोशिश

आरोपी उपनिरीक्षक मधुसूदन पाठक ने आवेदक मुकेश से कहा कि सुखलाल कुमावत वाले केस में तुम्हारे पिताजी कमलदास बैरागी का भी नाम आ रहा है। पिता को बचाने के लिए तुम्हें 5 लाख रूपये देने होंगे। जब मुकेश ने निवेदन किया कि मेरे पास इतने पैसे नहीं है तो मुकेश ने निवेदन करके कहा कि 2 लाख 50 हजार रूपये में राजी हो गया था।

पैसे न देकर लोकायुक्त में की शिकायत

फरियादी मुकेश बैरागी आरोपी को रिश्वत नहीं देना चाहता था, वह उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था, इसलिए रिश्वत मांगने पर आवेदक ने 8 जुलाई 2016 को लोकायुक्त उज्जैन में लिखित शिकायत दे दी थी।

लोकायुक्त ने 30 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था

आवेदक की शिकायत पर लोकायुक्त ने 11 जुलाई 2016 को 30 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा आरोपी मधुसुदन पाठक के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर आवश्यक अनुसंधान उपरांत माननीय न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया गया था।

Published on:
26 Feb 2026 04:38 pm
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