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महंगे र्इंधन के लिए रहिए तैयार,पेट्रोल-डीजल पर नहीं लागू होगा GST

जीएसटी के तहत दो ईंधन लाये जाते हैं, तो केंद्र को जीएसटी से पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, जेट ईंधन और कच्चे तेल में अपनी जेब से 20,000 करोड़ इनपुट टैक्स क्रेडिट देना होगा।
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GST on Petrol Diesel
झटकाः पेट्रोल-डीजल पर नहीं लगेगा GST, महंगे र्इंधन के लिए रहिए तैयार

नर्इ दिल्ली। बीते कर्इ माह से पेट्रोल-डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर जोरो शाेरों से बहस चल रही है। हर किसी के मन ये सवाल है कि क्या पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लगेगा या नहीं। यदि इन्हें जीएसटी के दायेरे में लाया जाता है तो आखिर इससे आम जनता को कितना राहत मिल सकता है? लेकिन अब इन सभी कयासों पर ब्रेक लगता हुआ नजर आ रहा है। बता दें कि पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी को लेकर आैर केंद्र व सभी राज्य सरकारों को सहमत होना जरूरी है। लेकिन इन पेट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी लगने के बाद न तो केंद्र सरकार आैर न ही कोर्इ भी राज्य सरकार इससे होने वाले राजस्व में कमी को झेलने के लिए तैयार हैं।


केंद्रीय वित्त मंत्रालय का पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी को लेकर कोर्इ प्रस्ताव नहीं
गौरतलब है कि पिछले साल 1 जुलार्इ 2017 को जब "एक राष्ट्र, एक कर" के नारे के साथ वस्तु एवं सेवा कर लागू किया गया था, उस वक्त पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल, डीजल, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस आैर विमानन टर्बाइन र्इंधन को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया था। यद्यपि उद्योग और मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान और नितिन गडकरी के बीच पेट्रोल और डीजल पर जीएसटी के लिए क्रूड प्राइस अस्थिरता से निपटने के लिए जल्द से जल्द बातचीत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल पर जीएसटी के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन 4 अगस्त को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया था।


जीएसटी से राजस्व में बड़ा नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। यदि जीएसटी के तहत दो ईंधन लाये जाते हैं, तो केंद्र को जीएसटी से पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, जेट ईंधन और कच्चे तेल में अपनी जेब से 20,000 करोड़ इनपुट टैक्स क्रेडिट देना होगा। दूसरी ओर राज्य केरल में बाढ़ जैसी किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपने खजाए को मजबूत बनाये रखना चाहते हैं। पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लागू करने में सबसे बड़ी मुश्किल यह भी है कि जब भी बेंचमार्क अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में वृद्धि होगी इससे राजस्व पर असर पड़ेगा।


वर्तामान में कितना लगता है टैक्स
केंद्र वर्तमान में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर लगाता है। जबकी राज्य मूल्य वर्धित कर (वैट) लेते हैं। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे कम है जहां ईंधन दोनों पर 6% बिक्री कर लगाया जाता है। पेट्रोल पर 39.12% का उच्चतम वैट है, जबकि तेलंगाना डीजल पर 26% का उच्चतम वैट है।

Updated on:
23 Aug 2018 08:50 am
Published on:
22 Aug 2018 06:42 pm