मेरठ

2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने के लिए महागठबंधन को मजबूत बनाने के लिए तैयार हुई रणनीति

महागठबंधन को और मजबूत बनाने के लिए सभी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच दूरियां खत्म करने के लिए सपा ने निकाला नायाब फॉर्मूला

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Aug 18, 2018
2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने के लिए महागठबंधन को मजबूत बनाने के लिए तैयार हुई रणनीति

मेरठ. लोकसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है। सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई हैं। सपा, बसपा और रालोद तीनों ही महागठबंधन की एकता और सीट बंटवारे से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। दलों के वरिष्ठ नेता अपने-अपने कार्यकर्ताओं को महागठबंधन का महत्व और उसके फायदे गिना रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो बकायदा अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को चेतावनी जारी की है कि अगर कोई भी महागठबंधन के खिलाफ एक शब्द भी बोलता है तो उसको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इसी कड़ी में एक कदम और आगे बढ़ते हुए समाजवादी ने अच्छी पहल की है। इसके तहत महागठबंधन में शामिल दलों के बीच की दूरियां मिटाने के लिए एक नया फॉर्मूला तलाश किया है। सपा के इस फॉर्मूले के अंतगर्त समाजवादी पार्टी के जिम्मेदार बडे़ नेताओं पर अगले लोकसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अन्य दलों से राजनीतिक समन्वय बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। ये बडे़ नेता अपने कार्यकर्ताओं और दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच समन्यवय बनाने का काम करेंगे। सपा के ये नेता जिलों का दौरा कर वहां पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को इसके लिए निर्देशित तो करेंगे ही, साथ ही उन बिंदुओं से भी अवगत कराएंगे, जिनकी वजह से माहौल बिगड़ने का अंदेशा हो सकता है।

बसपा कार्यकर्ताओं से तालमेल बैठाना प्राथमिकता
समाजवादी पार्टी से मंत्री रहे और पूर्व विधायक शाहिद मंजूर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के एजेंडे में बसपा कार्यकर्ताओं से तालमेल बैठाना पहली प्राथमिकता है। इस दिशा में स्थानीय स्तर पर काम भी शुरू किया गया है। हमारा सर्वप्रथम प्रयास भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है। ऐसा तभी संभव है, जब पार्टी स्तर के साथ ही महागठबंधन में शामिल दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच भी सामंजस्य बना हुआ हो। पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पिछले दिनों लखनऊ में ली गई पदाधिकारियों की बैठक में यह आगाह किया था कि भाजपा की कोशिश सपा-बसपा के कार्यकर्ताओं में मतभेद पैदा करने की है। इसके लिए हर जिले के कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर आगाह करने की जिम्मेदारी बडे़ नेताओं को सौंपी गई थी। उसी के तहत पार्टी के बडे़ नेता जिलों में जाकर सपा-बसपा कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और उनके बीच सामंजस्य बैठाने का काम करेंगे।

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Published on:
18 Aug 2018 01:59 pm
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